आगरा। श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने और उसे दैनिक जीवन में अपनाने के उद्देश्य से गीता परिचय अभियान जयपुर के तत्वावधान में आगरा शाखा की ओर से दो दिवसीय आगरा गीता सेमिनार का आयोजन 12 और 13 सितंबर को महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में किया जाएगा। सेमिनार में गीता आधारित जीवन प्रबंधन, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता, अनुशासन और तनाव से निपटने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। विशेष रूप से युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार, करियर, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की चिंता के बीच गीता के ज्ञान को उपयोगी बताया जाएगा। बच्चों, युवाओं, गृहस्थों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए गीता के संदेशों को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में भजन-कीर्तन, प्रेरणादायक प्रवचन और गीता चिंतन के साथ प्रतिभागियों को गीता अध्ययन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

सेमिनार के आमंत्रण पत्र का विमोचन बुधवार को पुष्पांजलि सभागार, महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में किया गया। इस अवसर पर एडिशनल कमिश्नर (प्रोविडेंट फंड) मिथिलेश चौधरी ने सेमिनार की रूपरेखा पर चर्चा की और अधिक से अधिक लोगों से इसमें सहभागिता की अपील की।
प्रमोद कुमार अग्रवाल एवं बृजेश कुमार सक्सेना ने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला ज्ञानग्रंथ है। गीता कठिन परिस्थितियों में धैर्य, विवेक और आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने की प्रेरणा देती है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तनावपूर्ण जीवन में गीता का संदेश मानसिक संतुलन बनाए रखने और अपने कर्तव्यों का बेहतर ढंग से पालन करने की शक्ति देता है।
उमेश चंद्र दुबे ने कहा कि गीता में बताए गए कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने हजारों वर्ष पहले थे। श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक संघर्ष में मार्गदर्शन देता है। गीता परिस्थितियों से भागने के बजाय उनका साहस के साथ सामना करने, परिणाम की चिंता किए बिना कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन करने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
पुष्पेन्द्र सिंह एवं रमा शंकर गुप्ता ने बताया कि दो दिवसीय सेमिनार में गीता आधारित जीवन प्रबंधन पर विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि किस तरह श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान और सिद्धांतों को दैनिक एवं व्यावहारिक जीवन में अपनाकर जीवन को संतुलित, सफल और सार्थक बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा वर्ग शिक्षा, रोजगार, प्रतिस्पर्धा, करियर, पारिवारिक अपेक्षाओं और भविष्य की चिंता जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है। इसके चलते युवा तनाव और असमंजस की स्थिति में रहते हैं। ऐसे समय में गीता का अध्ययन लाइफ मैनेजमेंट और सेल्फ मैनेजमेंट का प्रभावी माध्यम बन सकता है। गीता आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता, नेतृत्व, अनुशासन, समय के सदुपयोग और लक्ष्य के प्रति समर्पण जैसे गुण विकसित करने की प्रेरणा देती है।
सेमिनार में अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए गीता के संदेशों को सरल और व्यावहारिक रूप में समझाया जाएगा। बच्चों और युवाओं को संस्कार, अनुशासन एवं व्यक्तित्व विकास की प्रेरणा मिलेगी। गृहस्थ जीवन से जुड़े लोगों को पारिवारिक और सामाजिक जीवन में संतुलन बनाने का मार्गदर्शन मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए गीता का अध्ययन मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और जीवन के गहरे अर्थ को समझने का माध्यम बनेगा।
आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में गीता आधारित जीवन प्रबंधन पर मार्गदर्शन, व्यावहारिक जीवन में गीता के ज्ञान का उपयोग, भजन-कीर्तन, प्रेरणादायक प्रवचन और आध्यात्मिक वातावरण में गीता चिंतन शामिल रहेगा। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों को गीता अध्ययन सामग्री निःशुल्क दी जाएगी, जिससे वे सेमिनार के बाद भी गीता के ज्ञान का अध्ययन और मनन कर सकेंगे।
आमंत्रण पत्र विमोचन के अवसर पर पीके अग्रवाल, बीके सक्सेना, उमेश चंद्र दुबे, साक्षी गोपाल, पुष्पेंद्र पाल सिंह और आरएस गुप्ता मौजूद रहे। आयोजन में सभी आयु वर्ग के लोगों से सहभागिता की अपील की गई है।

