आईएसबीटी-सिकंदरा के बीच मेट्रो निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, सिकंदरा स्टेशन का कॉन्कोर्स तल तैयार
आगरा। सिकंदरा और उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए मेट्रो की कनेक्टिविटी का इंतजार अब धीरे-धीरे खत्म होने की ओर है। आईएसबीटी से सिकंदरा के बीच प्रथम मेट्रो कॉरिडोर के शेष एलिवेटेड हिस्से में निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। सिकंदरा मेट्रो स्टेशन के कॉन्कोर्स तल का निर्माण पूरा हो गया है। इस हिस्से में सभी पियर तैयार हो चुके हैं और बड़ी संख्या में यू-गर्डर भी स्थापित किए जा चुके हैं। इससे सिकंदरा तक मेट्रो पहुंचने की राह आसान हुई है। मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद इस क्षेत्र के यात्रियों को शहर के प्रमुख हिस्सों तक पहुंचने के लिए तेज और सुगम सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के संयुक्त महाप्रबंधक डॉ. पंचानन मिश्रा ने बताया कि प्रथम कॉरिडोर के आईएसबीटी से सिकंदरा के बीच निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। सिकंदरा मेट्रो स्टेशन के कॉन्कोर्स तल का निर्माण पूरा हो चुका है। इस हिस्से में गुरु का ताल और सिकंदरा मेट्रो स्टेशन का निर्माण सिंगल पिलर तकनीक से किया जा रहा है। कॉरिडोर के इस हिस्से में सभी पियर का निर्माण भी पूरा हो गया है। इसके साथ ही यू-गर्डर की कास्टिंग का काम भी पूरा किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि मेट्रो के निर्माण में यू-गर्डर तकनीक का इस्तेमाल यात्रियों और सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद है। पारंपरिक बॉक्स गर्डर की तुलना में यू-गर्डर के इस्तेमाल से निर्माण में समय और लागत दोनों की बचत होती है। यू-गर्डर अंग्रेजी के अक्षर ‘यू’ के आकार का होता है। इसके दोनों छोर पर पर्याप्त जगह होती है, जहां सिग्नलिंग उपकरण आसानी से लगाए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यू-गर्डर का निर्माण प्री-कास्ट तकनीक से कास्टिंग यार्ड में किया जाता है। तैयार होने के बाद इसे ट्रक के जरिए निर्माण स्थल तक लाया जाता है। इसके बाद क्रेन की मदद से दो पिलर के बीच यू-गर्डर को स्थापित किया जाता है। इससे निर्माण स्थल पर लंबे समय तक भारी निर्माण गतिविधियां नहीं करनी पड़तीं। इसका सीधा फायदा यह है कि मेट्रो निर्माण के दौरान सड़क से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों को अपेक्षाकृत कम परेशानी होती है।
स्टेशन भी तेजी से हो रहा तैयार
स्टेशन के कॉन्कोर्स निर्माण के लिए भी पारंपरिक शटरिंग और लेंटर की जगह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। आगरा मेट्रो स्टेशनों में डबल टी गर्डर और पाई गर्डर के जरिए कॉन्कोर्स तैयार किया जा रहा है। पाई गर्डर गणित में इस्तेमाल होने वाले पाई सिंबल की तरह दिखाई देता है। इस तकनीक से स्टेशन का कॉन्कोर्स कम समय में तैयार किया जा सकता है। साथ ही स्टेशन के नीचे चलने वाले यातायात पर भी कम से कम असर पड़ता है।
आईएसबीटी से सिकंदरा के बीच बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर में करीब 272 यू-गर्डर का इस्तेमाल किया जाना है। इनमें से अब तक करीब 230 यू-गर्डर का इरेक्शन सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। वहीं, इस हिस्से में कुल 52 आई-गर्डर में से 36 का परिनिर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा 131 में से 121 पियरकैप भी तैयार किए जा चुके हैं। यानी एलिवेटेड हिस्से में ढांचागत निर्माण का बड़ा हिस्सा पूरा होने की स्थिति में पहुंच चुका है।
दो कॉरिडोर, 27 स्टेशनों से जुड़ेगा शहर
ताजनगरी में कुल 29.4 किलोमीटर लंबे दो मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। दोनों कॉरिडोर में कुल 27 स्टेशन होंगे। प्रथम कॉरिडोर 14 किलोमीटर लंबा है, जो ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच बनाया जा रहा है। इसमें कुल 13 स्टेशन हैं। इनमें छह एलिवेटेड और सात भूमिगत स्टेशन शामिल हैं।
प्रथम कॉरिडोर के छह किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी सेक्शन में मेट्रो का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। अब शेष एलिवेटेड हिस्से में निर्माण पूरा होने के साथ मेट्रो नेटवर्क को सिकंदरा तक विस्तार देने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है।
वहीं, दूसरा कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार के बीच करीब 16 किलोमीटर लंबा है। इसमें 14 एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है।
सिकंदरा तक मेट्रो पहुंचने के बाद इस क्षेत्र के यात्रियों को शहर के अन्य प्रमुख हिस्सों तक आने-जाने के लिए एक तेज सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा। खासतौर पर सड़क मार्ग पर निर्भर यात्रियों को मेट्रो की सुविधा मिलने से सफर अधिक सुगम होने की उम्मीद है। निर्माण में अपनाई जा रही प्री-कास्ट और आधुनिक गर्डर तकनीक से काम को गति देने के साथ सड़क यातायात पर निर्माण का दबाव भी कम रखने में मदद मिल रही है।
ये खबर भी पढ़ें
आगरा कैंट से एयरपोर्ट तक मेट्रो, सफर होगा आसान: 80.79 किमी के नए नेटवर्क से जाम से राहत और यात्रियों को सीधा कनेक्शन
नौ नए कॉरिडोर का प्रस्ताव, शहर के साथ बाहरी इलाकों और धनौली सिविल एन्क्लेव को जोड़ने की तैयारी; 74.19 किमी एलिवेटेड और 6.60 किमी भूमिगत ट्रैक होगा
आगरा। शहर में मेट्रो नेटवर्क को मौजूदा दायरे से आगे बढ़ाकर एयरपोर्ट, बाहरी क्षेत्रों और प्रमुख परिवहन केंद्रों से जोड़ने की योजना तैयार की गई है। प्रस्तावित नौ कॉरिडोर की कुल लंबाई 80.79 किलोमीटर होगी। इनमें 74.19 किलोमीटर एलिवेटेड और 6.60 किलोमीटर भूमिगत मार्ग प्रस्तावित है। खास तौर पर आगरा कैंट से धनौली सिविल एन्क्लेव एयरपोर्ट को जोड़ने से यात्रियों को सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने और जाम से बचते हुए एयरपोर्ट पहुंचने का विकल्प मिल सकेगा।

यूपीएमआरसी के संयुक्त महाप्रबंधक पंचानन मिश्र के अनुसार, राज्य सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद प्रस्तावित कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। योजना में शहर के आवासीय, व्यावसायिक और पर्यटन क्षेत्रों के साथ बाहरी इलाकों को भी मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव है।
यात्रियों को कहां-कहां मिलेगा फायदा
आगरा कैंट से धनौली सिविल एन्क्लेव: एयरपोर्ट तक मेट्रो कनेक्टिविटी मिलने से यात्रियों को सड़क के जाम से बचने का विकल्प मिलेगा। सामान लेकर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ेगी।
बिचपुरी रेलवे स्टेशन से दयालबाग-कमला नगर: 15.40 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से रेलवे स्टेशन और शहर के बड़े आवासीय क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसमें 6.60 किलोमीटर भूमिगत मार्ग प्रस्तावित है।
सदर बाजार से आगरा कैंट पावर ग्रिड: 6.70 किलोमीटर के इस कॉरिडोर से सदर, कैंट और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को आवागमन का नया विकल्प मिलेगा। रोजाना नौकरी और कारोबार के लिए आने-जाने वालों को सुविधा होगी।
सदर बाजार से एयरपोर्ट: 7.50 किलोमीटर के इस कॉरिडोर का सीधा लाभ एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को मिलेगा। शहर के प्रमुख हिस्से से एयरपोर्ट तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच आसान होगी।
सिकंदरा से रुनकता: 8.92 किलोमीटर के प्रस्तावित मार्ग से पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्थानीय यात्रियों को रोजमर्रा के सफर में सड़क परिवहन का विकल्प मिलेगा।
बमरौली से ताज ईस्ट गेट: 6.31 किलोमीटर का यह कॉरिडोर पर्यटन क्षेत्र को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगा। ताजमहल जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों को सड़क यातायात के दबाव से राहत मिल सकती है।
रामबाग से यमुना एक्सप्रेसवे: 7.90 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर से यमुना एक्सप्रेसवे की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा। बाहरी क्षेत्रों से शहर की कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी।
अरतौनी से रोहता: 19.50 किलोमीटर का यह सबसे लंबा प्रस्तावित कॉरिडोर बाहरी इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगा। नौकरी, कारोबार और शिक्षा के लिए रोज शहर आने-जाने वाले यात्रियों को लंबी सड़क यात्रा के मुकाबले नया विकल्प मिलेगा।
एयरपोर्ट से मलपुरा: 6.20 किलोमीटर के इस कॉरिडोर से एयरपोर्ट और दक्षिणी क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों के साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी लाभ मिलेगा।
कालिंदी विहार से छलेसर: 2.36 किलोमीटर के इस कॉरिडोर से कालिंदी विहार और छलेसर क्षेत्र के बीच आवागमन आसान होगा। स्थानीय यात्रियों को प्रमुख मेट्रो नेटवर्क तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है।
जाम से राहत, सफर का विकल्प बढ़ेगा
मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से शहर के उन हिस्सों को भी सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने का विकल्प तैयार होगा, जहां फिलहाल यात्रियों को सड़क मार्ग पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी मजबूत होने पर निजी वाहनों और टैक्सी पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा। पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से बाहर से आने वाले यात्रियों को भी सुविधा होगी।
नौ कॉरिडोर विकसित होने पर मेट्रो नेटवर्क शहर के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहरी क्षेत्रों और प्रमुख परिवहन केंद्रों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा। इससे रोजाना सफर करने वाले कर्मचारियों, छात्रों, कारोबारियों और पर्यटकों के लिए आवागमन के विकल्प बढ़ेंगे। सड़क पर वाहनों का दबाव घटने से जाम कम करने में भी मदद मिल सकती है।

