आगरा। इनर रिंग रोड स्थित 1084 एकड़ में विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने शनिवार को निर्माणाधीन परियोजना का निरीक्षण कर काम की प्रगति देखी और संबंधित अधिकारियों से योजना की जानकारी ली। उन्होंने सभी प्रस्तावित कार्य समय से पूरा कराने और निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद क्षेत्र में उद्योगों के लिए नए अवसर तैयार होंगे। निवेश बढ़ने के साथ स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी गति मिलने की उम्मीद है।

इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को पर्यावरण के अनुकूल आधुनिक औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाना और एक ऐसे औद्योगिक क्षेत्र का विकास करना है, जहां कारोबार से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों। इनर रिंग रोड पर इसकी स्थिति परियोजना को यातायात और माल ढुलाई की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने जिलाधिकारी को परियोजना की प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि 1084 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले क्लस्टर के विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों के लिए शासन ने 96.88 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। इसी राशि से प्रस्तावित निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें सड़कों का निर्माण, सर्विस लेन का फोरलेन चौड़ीकरण, एप्रोच मार्गों का निर्माण और क्षेत्र के सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्य शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित इंडस्ट्रियल एरिया का ले-आउट प्लान देखा। उन्होंने अधिकारियों से परियोजना के अलग-अलग हिस्सों और निर्माण की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि सड़क निर्माण सहित बुनियादी ढांचे के कई काम प्रगति पर हैं। जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि निर्धारित मानकों के अनुसार काम कराया जाए।

इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में केवल औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित क्षेत्र में पार्क, ग्रीन बेल्ट, पार्किंग, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। इसके साथ मशीनरी और उपकरणों से जुड़ी सुविधाएं, सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं और ड्रेनेज व्यवस्था भी तैयार की जाएगी। क्षेत्र को आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस करने के साथ प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि उद्योगों को जरूरी आधारभूत सुविधाओं के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।

अधिकारियों के अनुसार क्लस्टर में अलग-अलग आकार के औद्योगिक प्लॉट विकसित किए जाएंगे। इससे बड़े उद्योगों के साथ अलग-अलग स्तर पर कारोबार करने वाले स्थानीय उद्यमियों को भी अपनी जरूरत के अनुसार जगह मिल सकेगी। स्थानीय कारोबारियों के लिए यह अपने व्यवसाय का विस्तार करने और नई औद्योगिक इकाई स्थापित करने का अवसर बन सकता है। औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से इससे जुड़े परिवहन, लॉजिस्टिक, सेवा और अन्य कारोबारों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
परियोजना की रणनीतिक स्थिति भी इसे महत्वपूर्ण बनाती है। इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली-एनसीआर के नजदीक स्थित है। माल परिवहन के लिए इन प्रमुख क्षेत्रों से इसकी कनेक्टिविटी उद्योगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इससे तैयार माल और कच्चे माल की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। बेहतर परिवहन संपर्क औद्योगिक निवेश के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस परियोजना को केंद्र के नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एंड इम्प्लीमेंटेशन ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीसीडा) की ओर से विकसित किया जाएगा। परियोजना के माध्यम से आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र तैयार करने की योजना है। यहां उद्योगों के लिए जरूरी सुविधाओं को एकीकृत तरीके से विकसित किया जाना है, जिससे कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में सुविधा मिल सके।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं करने को कहा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से लगातार निगरानी रखने और निर्माण की गति बनाए रखने के निर्देश भी दिए, ताकि परियोजना का लाभ तय समय में उद्योगों और स्थानीय लोगों तक पहुंच सके।
इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के विकसित होने से जिले के औद्योगिक परिदृश्य में बदलाव की उम्मीद है। नए उद्योग आने पर निवेश बढ़ सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। उद्योगों के साथ वेयरहाउस, लॉजिस्टिक, परिवहन और अन्य सहायक सेवाओं की मांग बढ़ने से छोटे कारोबारियों को भी काम मिल सकता है। इससे जिले की आर्थिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलने की संभावना है।

निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जीके वार्ष्णेय, उपायुक्त उद्योग शैलेंद्र कुमार सिंह और यूपीसीडा के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को परियोजना से संबंधित कार्यों और आगे की योजना की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने मौके पर निर्माण की स्थिति देखने के बाद सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
1084 एकड़ में विकसित होने वाला यह औद्योगिक क्लस्टर आने वाले समय में उद्योगों, कारोबारियों और रोजगार की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना बन सकता है। 96.88 करोड़ रुपये की स्वीकृति से चल रहे सड़क और बुनियादी ढांचे के कार्यों को गति मिलने के बाद परियोजना के अगले चरणों को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन का जोर समय पर और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर है, ताकि तैयार होने के बाद क्लस्टर में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ावा दिया जा सके।
