आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में दीक्षोत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित “स्वस्थ बेटी, खुशहाल परिवार : माँ-बेटी स्वास्थ्य चर्चा” कार्यक्रम में महिला स्वास्थ्य और सर्वाइकल कैंसर से बचाव को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में एचपीवी (HPV) वैक्सीन, मासिक धर्म स्वच्छता और माँ-बेटी के बीच संवाद को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। कुलपति प्रो. आशु रानी ने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की 9 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बेटियों के लिए प्रतिवर्ष निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू करने की घोषणा की। साथ ही 22 जुलाई को महिला स्वास्थ्य परीक्षण शिविर और एचपीवी वैक्सीनेशन तथा 3 अगस्त को “माँ-बेटी सम्मेलन” आयोजित करने की जानकारी भी दी गई।

‘महिलाओं और किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित जे.पी. सभागार में शनिवार को दीक्षोत्सव-2026 के अंतर्गत “स्वस्थ बेटी, खुशहाल परिवार : माँ-बेटी स्वास्थ्य चर्चा” विषय पर जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एचपीवी वैक्सीन के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि महिला स्वास्थ्य, मासिक धर्म स्वच्छता और माँ-बेटी के बीच खुले संवाद की संस्कृति को भी मजबूत करना था।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की महिला शिक्षिकाओं, महिला कर्मचारियों, मॉडल स्कूल की शिक्षिकाओं तथा उनकी किशोरी बेटियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ चिकित्सकों से महिला स्वास्थ्य, किशोरावस्था, टीकाकरण और मासिक धर्म से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका विस्तार से उत्तर दिया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बबीता चौहान रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. संदीप अग्रवाल और एस.एन. मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या यादव ने महिला स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की।
वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान होने पर हजारों जीवन बचाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण है और इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका एचपीवी वैक्सीन है। उन्होंने सलाह दी कि यह टीका संक्रमण से पहले, आदर्श रूप से 12 से 14 वर्ष की आयु तथा विवाह से पहले लगवाना सबसे अधिक लाभकारी होता है। उन्होंने चिंता जताई कि भारत में अधिकांश कैंसर के मामले तब सामने आते हैं, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। इसलिए नियमित जांच, समय पर टीकाकरण और शुरुआती पहचान को सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. आशु रानी ने कहा कि महिलाएं अक्सर परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपने स्वास्थ्य को सबसे पीछे रख देती हैं, जबकि स्वस्थ परिवार की शुरुआत एक स्वस्थ महिला से होती है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि किसी भी बीमारी को नजरअंदाज न करें और समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने सरकार और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का भी आह्वान किया।
इस अवसर पर उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि सरकार के सहयोग से विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों की 9 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बेटियों के लिए प्रतिवर्ष निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने इसे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में विश्वविद्यालय की एक बड़ी सामाजिक पहल बताया।
अपने संबोधन में बबीता चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं और किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक करने तथा एचपीवी वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न अस्पतालों और संस्थानों में नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक बालिकाओं तक इस जीवनरक्षक वैक्सीन की जानकारी पहुंच सके।
उन्होंने माँ-बेटी के रिश्ते पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि आज कई परिवारों में संवाद की कमी के कारण बेटियां अपनी शारीरिक और मानसिक समस्याएं खुलकर साझा नहीं कर पातीं। यह “चुप्पी की दीवार” उनके स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे अपनी बेटियों की पहली मित्र बनें, ताकि हर विषय पर खुलकर बातचीत हो सके और समय रहते स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान मिल सके।
डॉ. दिव्या यादव ने मासिक धर्म स्वच्छता को महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य का आधार बताते हुए कहा कि यह एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, जिसे लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है। उन्होंने सैनिटरी पैड, मेंस्ट्रुअल कप और अन्य स्वच्छता उत्पादों के सुरक्षित उपयोग, उनकी उपयोगिता और सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही किशोरियों को अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही विकल्प चुनने की सलाह भी दी।
कार्यक्रम के दौरान “माँ-बेटी सम्मेलन” के पोस्टर का विमोचन किया गया। यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में 3 अगस्त को विश्वविद्यालय में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा 22 जुलाई को स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित आरोग्य केंद्र में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक महिला स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया जाएगा। इसी दौरान 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं के लिए निःशुल्क एचपीवी वैक्सीनेशन भी किया जाएगा।
कार्यक्रम का संयोजन प्रो. अचला गक्खर ने किया, जबकि संचालन पूजा सक्सेना ने किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. मोनिका अस्थाना, डॉ. रत्ना पांडे, डॉ. मीनाक्षी चौधरी और प्राचार्य सौरभ निषाद का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर प्रो. अर्चना सिंह, डॉ. रेखा शर्मा, डॉ. पूनम तिवारी, डॉ. स्वेतलाना, डॉ. नीरज, राधिका, रेखा, अनुपमा, दीप्ति, प्रिया सहित विश्वविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि महिलाओं और किशोरियों के बेहतर स्वास्थ्य, समय पर टीकाकरण और परिवारों में स्वास्थ्य संबंधी संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल बनकर सामने आया। इससे यह संदेश भी गया कि सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ जागरूकता, समय पर जांच और एचपीवी वैक्सीन ही सबसे प्रभावी बचाव का माध्यम हैं।

