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up News :घायल की जान बचाने पर 25 हजार, आगरा में नहीं मिला एक भी दावेदार

A symbolic road accident awareness image showing a bystander helping an injured victim on a highway under the Rahveer Yojana, highlighting emergency assistance and road safety awareness in Agra, Uttar Pradesh.
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योजना से ज्यादा प्रचार की जरूरत

समाजशास्त्र विभाग, आगरा कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरविंद गुप्ता भी मानते हैं कि लोगों में पुलिस और प्रशासन के प्रति भरोसे की कमी बनी हुई है। उनके अनुसार, पहले प्रशासन को समाज के बीच विश्वास का माहौल तैयार करना होगा। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और अधिकारियों को आगे आकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। साथ ही यह भरोसा भी दिलाना होगा कि सड़क हादसे में घायल की मदद करने वाले व्यक्ति को किसी तरह से परेशान नहीं किया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि वर्तमान समय में सामाजिक जिम्मेदारी का भाव भी पहले की तुलना में कमजोर हुआ है, जिसे दोबारा मजबूत करने की आवश्यकता है।

आंकड़े बताते हैं कि आगरा में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। वर्ष 2024 में जिले में 1,223 सड़क दुर्घटनाओं में 586 लोगों की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़कर 1,456 और मृतकों का आंकड़ा 748 तक पहुंच गया। वर्ष 2023 में सड़क हादसों में 499 लोगों की जान गई थी। यानी दो वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि दर्ज हुई है और एक वर्ष के भीतर ही 87 अतिरिक्त मौतें सामने आईं। सड़क हादसों में मौत के मामलों में वर्ष 2023 में आगरा प्रदेश में 11वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2024 में यह छठे स्थान पर पहुंच गया।

बीते दो वर्षों में कई बड़े हादसों ने पूरे जिले को झकझोर दिया। 8 दिसंबर 2024 को यमुना एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार निजी बस डिवाइडर से टकरा गई, जिसमें दो लोगों की मौत हुई और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए। 20 मई 2025 को आगरा-ग्वालियर हाईवे पर कैंटर और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई और ट्रक चालक की जिंदा जलकर मौत हो गई। 25 अक्टूबर 2025 को न्यू आगरा क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े लोगों को कुचल दिया, जिसमें पांच लोगों की मौत और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 16 दिसंबर 2025 को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे में स्लीपर बस ट्रक से टकरा गई, जिससे चार लोगों की मौत और करीब दस यात्री गंभीर रूप से घायल हुए। 31 जनवरी को जलेसर रोड पर तेज रफ्तार डंपर ने दो ऑटो को टक्कर मार दी, जिसमें पांच लोगों की जान चली गई। उसी दिन इनर रिंग रोड पर घने कोहरे और सड़क पर बिना चेतावनी छोड़े गए मिट्टी के ढेर के कारण कई वाहन आपस में टकरा गए। वहीं 20 मार्च को चित्राहाट में मां कैला देवी के दर्शन कर लौट रहे एक परिवार की बोलेरो कार चालक को झपकी आने के कारण पेड़ से टकरा गई, जिसमें एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई।

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