आगरा। ताजमहल की पहचान केवल उसकी खूबसूरती नहीं, बल्कि यमुना नदी और आगरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी है। यदि यमुना का संरक्षण नहीं हुआ और विरासत स्थलों को समुचित संरक्षण नहीं मिला, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए आगरा की ऐतिहासिक पहचान पर खतरा बढ़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर रिवर कनेक्ट कैंपेन ने प्रदेश सरकार के समक्ष बड़ा प्रस्ताव रखा है।

रिवर कनेक्ट कैंपेन के प्रतिनिधियों ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर आगरा को आधिकारिक रूप से “विरासत नगर” घोषित करने, यूनेस्को विश्व धरोहर शहर का दर्जा दिलाने तथा यमुना नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात ने ज्ञापन को गंभीर विषय बताते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही।
लखनऊ में शुक्रवार को रिवर कनेक्ट कैंपेन के प्रतिनिधि एवं पर्यावरणविद् डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर आगरा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए आगरा को “विरासत नगर” घोषित करने और यूनेस्को विश्व धरोहर शहर का दर्जा दिलाने की दिशा में राज्य सरकार से प्रभावी पहल करने का आग्रह किया।
ज्ञापन में कहा गया कि आगरा केवल ताजमहल का शहर नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। शहर में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे तीन विश्व धरोहर स्मारक मौजूद होने के बावजूद इसे अब तक विश्व धरोहर शहर का दर्जा नहीं मिल सका है। इसके साथ ही अनियोजित शहरीकरण, बढ़ते अतिक्रमण, प्रदूषण और विरासत स्थलों की उपेक्षा जैसी समस्याएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं।
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने इस विषय को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। जब उन्हें बताया गया कि यह मामला लंबे समय से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार अपनी प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी और हर विषय में केवल न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करना उचित नहीं है।
बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने महानिदेशक पर्यटन वेदपति मिश्र को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगरा को यूनेस्को विश्व धरोहर शहर का दर्जा दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जाएं और मुख्यमंत्री के माध्यम से इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाए, ताकि राज्य सरकार इस दिशा में शीघ्र पहल कर सके।
बैठक में यमुना नदी की लगातार बिगड़ती स्थिति भी प्रमुख मुद्दा रही। डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि आगरा की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। यदि नदी का संरक्षण और पुनर्जीवन नहीं किया गया तो इसका सीधा प्रभाव ताजमहल सहित पूरे विरासत क्षेत्र पर पड़ेगा।
उन्होंने आगरा में यमुना पर बैराज निर्माण, नदी में पर्याप्त पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित करने, प्रदूषण नियंत्रण, सीवर प्रबंधन और दीर्घकालिक पुनर्जीवन योजना लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि यमुना के संरक्षण के बिना आगरा की विरासत को सुरक्षित रखना संभव नहीं होगा।
ज्ञापन में राज्य सरकार से आगरा को विरासत नगर घोषित करने के साथ-साथ यूनेस्को विश्व धरोहर शहर के लिए केंद्र सरकार के माध्यम से प्रस्ताव भेजने, समग्र विरासत संरक्षण नीति लागू करने, ऐतिहासिक क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने, यमुना संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने तथा जनभागीदारी आधारित संरक्षण अभियान शुरू करने की मांग भी की गई।
रिवर कनेक्ट कैंपेन ने उम्मीद जताई कि उत्तर प्रदेश सरकार आगरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए इस दिशा में शीघ्र निर्णय लेगी। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए तो आगरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और शहर की सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ यमुना नदी का भी संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा।
ज्ञापन देने वालों में ये रहे शामिल
बृज खंडेलवाल, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, महंत नंदन श्रोत्रिय, चतुर्भुज तिवारी, विशाल झा, डॉ. ज्योति खंडेलवाल, पद्मिनी अय्यर, दीपक राजपूत, राहुल राज, पंडित जुगल, अभिनव लाला, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, दिनेश शर्मा, डॉ. मुकुल पांड्या, राज कुमार माहेश्वरी, मुकेश चौधरी आदि शामिल रहे।

