फतेहाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित पेपरलेस ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में फतेहाबाद के अधिवक्ताओं ने गुरुवार को तहसील परिसर में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार बबलेश कुमार को ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने इस व्यवस्था को रोजगार और आमजन के हितों के विपरीत बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही 15 जून से चल रही हड़ताल को जारी रखने का ऐलान भी किया।
तहसील फतेहाबाद में गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित पेपरलेस ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार बबलेश कुमार को सौंपकर सरकार से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने से न केवल अधिवक्ता समुदाय बल्कि स्टांप वेंडर, टाइपिस्ट और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों के रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान रजिस्ट्री व्यवस्था वर्षों से प्रभावी ढंग से संचालित हो रही है और इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। यदि पेपरलेस ई-रजिस्ट्री प्रणाली लागू की जाती है तो परंपरागत व्यवस्था से जुड़े अनेक लोगों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो जाएगा। उनका कहना है कि इस निर्णय का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिनकी आजीविका रजिस्ट्री प्रक्रिया पर निर्भर है।
अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था केवल रोजगार को प्रभावित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी कई व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकती है। उनका मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में लोगों को आवश्यक कानूनी परामर्श और प्रक्रिया संबंधी सहायता सहज रूप से उपलब्ध हो जाती है, जबकि पूरी प्रक्रिया के डिजिटल होने से ग्रामीण और तकनीकी जानकारी से वंचित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इस मुद्दे पर पूर्व में आयोजित अधिवक्ताओं की बैठक में सर्वसम्मति से विरोध का निर्णय लिया गया था। उसी निर्णय के क्रम में उपनिबंधक कार्यालय में कार्य बहिष्कार किया जा रहा है। अधिवक्ताओं ने बताया कि 15 जून से शुरू की गई हड़ताल लगातार जारी है और जब तक सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने सरकार से मांग की कि पेपरलेस ई-रजिस्ट्री लागू करने के निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना था कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उससे प्रभावित होने वाले सभी पक्षों से व्यापक संवाद किया जाना चाहिए, ताकि रोजगार, जनसुविधा और न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों का समुचित आकलन किया जा सके।
ज्ञापन सौंपने के बाद अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अधिवक्ताओं और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े अन्य वर्गों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए उचित निर्णय करेगी।
प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम में हरी सिंह अन्नौटिया, पंकज गुप्ता, धर्म सिंह राजपूत, अरविंद वर्मा, पुष्पेंद्र, जयपाल यादव, विष्णु गुर्जर, अनीश पेंगोरिया, दिनेश शर्मा, विष्णु वर्मा, अमरदीप कंसाना, राकेश यादव, अजय पेंगोरिया, हरीमोहन, अवधेश और मानपाल वर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया और सरकार से पेपरलेस ई-रजिस्ट्री व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग दोहराई।

