. स्वास्थ्य सेवाओं और स्क्रीनिंग में जिले का बेहतर प्रदर्शन
. 47 ग्राम पंचायतें हो चुकी हैं टीबी मुक्त
. जनभागीदारी और जागरूकता से टीबी उन्मूलन पर जोर
आगरा। टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। टीबी नोटिफिकेशन के मामले में भी आगरा प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। जनपद में अब तक 47 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्क्रीनिंग, जागरूकता, उपचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देकर टीबी उन्मूलन की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर जिले में विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करना और अधिक से अधिक मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।

टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आगरा जनपद ने उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही टीबी नोटिफिकेशन के मामलों में भी आगरा प्रदेश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जो जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता के अनुसार वर्ष 2025 में आगरा में कुल 30518 टीबी मरीजों को नोटिफाई किया गया, जिनमें 17085 पुरुष और 13421 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा जनपद में कुल 47 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं, जो टीबी उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च) के अवसर पर जनपद में टीबी उन्मूलन को लेकर व्यापक स्तर पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस वर्ष की थीम “हाँ! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं” जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में 30356, वर्ष 2024 में 29837 और वर्ष 2023 में 25531 क्षय रोगियों की पहचान की गई थी। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 6481 से अधिक मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं। मरीजों की पहचान के लिए जिले में उच्च जोखिम समूहों में स्क्रीनिंग, एक्स-रे जांच, घर-घर संपर्क और जनजागरूकता कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने यह भी बताया कि जनपद में 3068 निक्षय मित्रों के माध्यम से टीबी मरीजों को भावनात्मक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। जनवरी 2026 से अब तक कुल 4381 पोषण पोटली का वितरण किया जा चुका है, जिससे मरीजों के पोषण स्तर में सुधार हो सके और उपचार प्रक्रिया को मजबूती मिले।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन के मार्ग में अभी भी जागरूकता की कमी, सामाजिक झिझक और अधूरा उपचार जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, जिनसे निपटने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जनपद में 215 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 53 डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर, 26 टीबी यूनिट, 44 प्राइमरी हेल्थ इंस्टीट्यूट और 30 अर्बन पीएचसी संचालित हैं, जहां हर माह की 15 तारीख को निक्षय दिवस मनाया जाता है। इस दिन टीबी के लक्षणों वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है, नए मरीजों का उपचार शुरू किया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों की भी जांच की जाती है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और पूर्ण उपचार के माध्यम से टीबी को हराया जा सकता है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट विभाग द्वारा विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें टीबी मरीजों और उनके तीमारदारों सहित लगभग 500 लोगों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम में टीबी क्या है, इसका उपचार और सोशल स्टिग्मा जैसे विषयों पर जानकारी दी गई ताकि लोग समय पर जांच और उपचार के प्रति सजग हो सकें।
श्वसन चिकित्सा विभाग, एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से फैलता है। टीबी दो प्रकार की होती है—पल्मोनरी टीबी (फेफड़ों की टीबी) और एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी, जो शरीर के अन्य अंगों में हो सकती है। उन्होंने बताया कि केवल फेफड़ों की टीबी संक्रामक होती है, जबकि अन्य प्रकार सामान्यतः संक्रमण नहीं फैलाती। उन्होंने कहा कि टीबी का उपचार पूरी तरह संभव है और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इसका निःशुल्क इलाज उपलब्ध है।
उन्होंने जनता से अपील की कि टीबी मरीजों के साथ भेदभाव न करें और बीमारी के लक्षण दिखने पर उसे छुपाएं नहीं। समय पर जांच और उपचार आवश्यक है। मरीजों को मास्क पहनने और खांसते या छींकते समय रुमाल या गमछे का उपयोग करने की सलाह दी गई, जिससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। समाज में टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और मरीजों का सहयोग करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है, जिससे टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
