आगरा। ब्लैक स्पॉट 44 से घटकर 33 हुए, सात महीने में सड़क हादसे 15.4 फीसदी घटे; ट्रैफिक कंजेशन में 37.1 प्रतिशत की कमी, नो हेलमेट नो फ्यूल और 50 से ज्यादा लंबित चालान वाले वाहनों पर भी शिकंजा
आगरा में सड़क सुरक्षा अभियान अब केवल हादसा होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। जिले की 208 क्रिटिकल क्रैश लोकेशन का डेटा गूगल के साथ साझा कर इन संवेदनशील स्थानों पर पहुंचने से पहले वाहन चालकों को संभावित खतरे का अलर्ट देने की पहल की गई है। करीब 500 मीटर पहले चेतावनी मिलने की व्यवस्था दुर्घटना की आशंका वाले स्थान पर गति नियंत्रित करने में मदद करेगी।
दूसरी ओर जनवरी से जुलाई 2026 के बीच सड़क हादसे 865 से घटकर 732 और ट्रैफिक कंजेशन 37.1 प्रतिशत कम हुआ है। ब्लैक स्पॉट भी 44 से घटकर 33 रह गए हैं। प्रशासन ने अब नो हेलमेट नो फ्यूल, 50 से अधिक लंबित चालान वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने, खराब सड़कों को 15 दिन में दुरुस्त कराने और अतिक्रमण-जाम नियंत्रण की जिम्मेदारी तय करने जैसे कदमों को भी अभियान में शामिल किया है।
आगरा में सड़क सुरक्षा की तस्वीर बदलने के लिए जिला प्रशासन ने अब डेटा, तकनीक और प्रवर्तन को एक साथ जोड़ दिया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की कार्ययोजना के तहत दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान से लेकर ब्लैक स्पॉट सुधार, यातायात प्रबंधन, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर लगातार काम किया जा रहा है। इसका असर हादसों और जाम के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण पहल 208 क्रिटिकल क्रैश लोकेशन को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की है। इन दुर्घटना संभावित स्थलों का डेटा गूगल के साथ साझा किया गया है, ताकि गूगल मैप के जरिए संवेदनशील स्थानों के करीब पहुंच रहे वाहन चालकों को पहले से सावधान किया जा सके। प्रस्तावित व्यवस्था में संभावित दुर्घटना स्थल से लगभग 500 मीटर पहले अलर्ट मिल सकता है।
वाहन चालक को स्क्रीन पर दृश्य संकेत के साथ आवाज के जरिए भी सावधान किए जाने की संभावना है। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि चालक खतरे वाले स्थान पर पहुंचने से पहले अपनी गति कम कर सके और अधिक सतर्कता बरते। सड़क सुरक्षा में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें हादसा होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय दुर्घटना की आशंका बनने से पहले ही वाहन चालक को चेतावनी देने का प्रयास किया जा रहा है।
जिले में पहले 44 ब्लैक स्पॉट और 208 क्रिटिकल क्रैश लोकेशन चिन्हित किए गए थे। संबंधित स्थानों पर सुधारात्मक कार्रवाई के बाद ब्लैक स्पॉट की संख्या घटकर 33 रह गई है। अब इन संवेदनशील स्थलों की डिजिटल मैपिंग से सड़क सुरक्षा व्यवस्था को एक और स्तर पर ले जाने की तैयारी है। प्रशासन का जोर ऐसे स्थानों की पहचान, सुधार और निगरानी को लगातार जारी रखने पर है, ताकि केवल आंकड़ों में कमी नहीं बल्कि जमीन पर दुर्घटनाओं की संभावना भी कम हो।
सड़क हादसों के आंकड़े भी अभियान के असर की तस्वीर पेश करते हैं। जनवरी से जुलाई 2025 की अवधि में जिले में 865 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जबकि जनवरी से जुलाई 2026 में इनकी संख्या घटकर 732 रह गई। यानी 133 हादसों की कमी दर्ज की गई और दुर्घटनाओं में 15.4 प्रतिशत की गिरावट आई। इसी अवधि में सड़क हादसों में मृतकों की संख्या 459 से घटकर 430 हुई। घायलों की संख्या भी 771 से कम होकर 617 रह गई। इस तरह मृतकों में 29 और घायलों में 154 की कमी दर्ज की गई है।
सड़क हादसों के साथ यातायात जाम को कम करने पर भी प्रशासन ने अलग रणनीति अपनाई है। प्रदेश में डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देशन में चलाए जा रहे रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन अभियान को आगरा की जिला सड़क सुरक्षा समिति की कार्ययोजना से जोड़ा गया है। जिले के आठ प्रमुख मार्ग चिन्हित कर वहां वाहनों के आवागमन, गति और जाम की स्थिति का अध्ययन किया गया। गूगल से प्राप्त ट्रैफिक डेटा को पुलिस बल की ड्यूटी की जरूरत तय करने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में इस्तेमाल किया गया। इसके परिणामस्वरूप ट्रैफिक कंजेशन में 37.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
अब प्रवर्तन व्यवस्था को भी सख्त करने की तैयारी है। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में नो हेलमेट नो फ्यूल नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन और पुलिस विभाग द्वारा किए गए चालानों की वसूली के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। 50 से अधिक लंबित चालान वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने के साथ उनके स्वामियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर धारा 53 और धारा 19 के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। इसका उद्देश्य बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन स्वामियों पर प्रभावी दबाव बनाना है।
आईटीएमएस के जरिए सामने आने वाले प्रवर्तन योग्य मामलों में भी कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया गया है। परिवहन विभाग को आवश्यक फोटो उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ऐसे मामलों में चालान की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके। इस व्यवस्था में डिजिटल साक्ष्य के आधार पर नियम तोड़ने वालों तक कार्रवाई पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
सड़क सुरक्षा में सड़क की खराब स्थिति को भी बड़ा कारण मानते हुए प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय की है। पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई और नगर निगम के माध्यम से सड़कों के रखरखाव की समीक्षा के दौरान निरीक्षण में चिन्हित पांच खराब सड़कों को अगले 15 दिनों में दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित सड़क निर्माण या अनुरक्षण एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही प्रत्येक सड़क की जिम्मेदार एजेंसी की स्पष्ट पहचान के लिए सड़क के शुरुआती बिंदु पर संबंधित विभाग या एजेंसी का नाम प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सड़क की खराब स्थिति सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने में आसानी होगी।
ब्लैक स्पॉट पर पहले कराए जा चुके सुधार कार्यों की भी दोबारा जांच होगी। पुलिस विभाग को इन स्थानों पर हुए सुधारों का पुनः परीक्षण और ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य जिला मार्गों पर दुर्घटनाओं तथा मृत्यु दर में बढ़ोतरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से मार्गवार दुर्घटना विश्लेषण रिपोर्ट अगली बैठक में प्रस्तुत करने को कहा गया है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन मार्गों पर किस प्रकार के हादसे अधिक हो रहे हैं और वहां किस तरह के सुधार की आवश्यकता है।
अतिक्रमण और यातायात जाम पर भी जिम्मेदारी सीधे थाना और चौकी प्रभारियों से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने और जाम नियंत्रण के अभियान केवल औपचारिक कार्रवाई बनकर नहीं रहेंगे। इन्हें नियमित और सतत प्रक्रिया के रूप में संचालित करना होगा। यातायात के दबाव वाले क्षेत्रों की निगरानी और स्थानीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई को इसी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा रहा है।
स्कूल वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। जिन स्कूल वाहनों का परमिट या फिटनेस समाप्त हो चुका है, उनका संचालन कराने वाले विद्यालयों को नोटिस जारी करने को कहा गया है। सभी विद्यालयों तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने के लिए व्हाट्सऐप समूह बनाने और उसके संचालन के लिए नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप ही सड़क पर संचालित हों।
आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी बैठक में जोर दिया गया। जनपद में 108 एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने तथा उनके रिस्पॉन्स टाइम में सुधार के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क हादसे के बाद घायल को जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना दुर्घटना में मृत्यु दर कम करने की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए दुर्घटना रोकथाम के साथ हादसे के बाद की प्रतिक्रिया व्यवस्था को भी सड़क सुरक्षा योजना से जोड़ा गया है।
ओवरलोड वाहनों की निगरानी को लेकर रायभा टोल प्लाजा और फतेहाबाद स्थित आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे टोल प्लाजा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। दोनों टोल प्लाजा द्वारा ओवरलोड वाहनों की सूचना समय से उपलब्ध न कराने पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने नाराजगी जताई। दोनों टोल प्लाजा के प्रबंधकों को अगली बैठक में आवश्यक आंकड़ों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। ओवरलोडिंग को दुर्घटना के जोखिम से जोड़ते हुए इसके नियंत्रण के लिए सूचना तंत्र को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
पूरे अभियान में परिवहन और पुलिस विभाग के बीच समन्वय को केंद्रीय भूमिका दी गई है। सड़क हादसों के आंकड़ों का विश्लेषण, क्रिटिकल क्रैश लोकेशन की पहचान, ब्लैक स्पॉट में सुधार, प्रवर्तन कार्रवाई, ओवरलोडिंग पर निगरानी, यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और संवेदनशील मार्गों की निगरानी को एकीकृत किया गया है। यानी सड़क सुरक्षा को अलग-अलग विभागों की अलग कार्रवाई के बजाय एक साझा कार्ययोजना के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
परिवहन विभाग की ओर से सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी आगरा आलोक कुमार अग्रवाल दुर्घटना संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण, क्रिटिकल क्रैश लोकेशन के डेटा के संकलन, संबंधित विभागों के साथ समन्वय और प्रवर्तन कार्रवाई में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सड़क सुरक्षा की कार्ययोजना को धरातल पर प्रभावी बनाने के साथ डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आंकड़ों से यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि हादसे कहां, किस परिस्थिति में और किन कारणों से अधिक हो रहे हैं।
आगरा की मौजूदा सड़क सुरक्षा रणनीति की खास बात यह है कि इसमें केवल चालान काटने या नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने को ही समाधान नहीं माना गया है। सड़क की खराब स्थिति से लेकर अतिक्रमण, जाम, स्कूल वाहनों, ओवरलोडिंग, ब्लैक स्पॉट, दुर्घटना के आंकड़ों और आपातकालीन सेवाओं तक अलग-अलग पहलुओं को एक ही व्यवस्था से जोड़ा गया है। इसके साथ गूगल मैप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दुर्घटना संभावित स्थलों की जानकारी वाहन चालकों तक पहले पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य अब दुर्घटनाओं के आंकड़ों में कमी तक सीमित नहीं है। कोशिश ऐसी व्यवस्था विकसित करने की है जिसमें संभावित खतरे की पहचान पहले हो, सड़क और यातायात से जुड़ी कमियां समय रहते दूर की जाएं, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई हो और वाहन चालकों को संवेदनशील स्थानों पर पहुंचने से पहले चेतावनी मिल सके। जिलाधिकारी मनीष बंसल के नेतृत्व में जिला सड़क सुरक्षा समिति, परिवहन विभाग और पुलिस के समन्वित प्रयासों के साथ तकनीक और डेटा को जोड़कर आगरा में सड़क हादसों की रोकथाम का एक समग्र मॉडल तैयार किया जा रहा है। अब सड़क सुरक्षा की दिशा हादसा होने के बाद कार्रवाई से आगे बढ़कर हादसा होने से पहले उसे रोकने की ओर है।
