आगरा। रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर पालीवाल पार्क में हुआ पौधारोपण कार्यक्रम। विश्वविद्यालय और महामना मालवीय मिशन की पहल पर फलदार पुष्पीय और औषधीय पौधों का रोपण किया गया। लोगों को घरों में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के महिला प्रकोष्ठ और महामना मालवीय मिशन आगरा संभाग के संयुक्त तत्वावधान में पालीवाल पार्क परिसर में वृक्षारोपण एवं पौधा वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 600 से अधिक पौधे उपलब्ध कराए गए। इनमें अधिकांश पौधों का पालीवाल पार्क परिसर में रोपण किया गया जबकि कुछ पौधे लोगों को अपने घरों में लगाने के लिए वितरित किए गए। आयोजन के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण और हरित एवं स्वच्छ आगरा के निर्माण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशू रानी ने अपने आवास पर सहजन का पौधा लगाकर की। इसके बाद विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां महिला प्रकोष्ठ की प्रमुख प्रो. अर्चना सिंह और प्रो. नीलम यादव ने पौधे लगाए। महामना मालवीय मिशन आगरा संभाग के महासचिव राकेश चन्द्र शुक्ला और सांस्कृतिक प्रकोष्ठ प्रमुख श्रुति सिंहा ने भी पौधारोपण किया।
कार्यक्रम में लगाए और वितरित किए गए पौधों में कई प्रकार की प्रजातियां शामिल रहीं। सहजन के अलावा करौंदा शहतूत अनार आम अमरूद और नींबू के पौधे लगाए गए। पुष्पीय प्रजातियों में कनेर चंपा चमेली गुड़हल और गुलमोहर शामिल रहे। बोतल पाम और अशोक के पौधे भी लगाए गए। फलदार पुष्पीय और औषधीय पौधों की अलग-अलग प्रजातियों को शामिल करने का उद्देश्य लोगों को उपयोगी पौधों के प्रति जागरूक करना रहा।

महिला प्रकोष्ठ की प्रमुख प्रो. अर्चना सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्य समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद लाभकारी हैं। वर्तमान मौसम पौधारोपण के लिए अनुकूल है। ऐसे समय में पौधे लगाना सुखद और संतोषदायक अनुभव है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित देखभाल भी जरूरी है।
महामना मालवीय मिशन आगरा संभाग के महासचिव राकेश चन्द्र शुक्ला ने रक्षाबंधन और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए कहा कि इस पर्व पर लोग अपने प्रियजनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। इसी तरह पौधे लगाकर धरती माता की रक्षा का संकल्प भी लिया जा सकता है। उन्होंने पौधारोपण को पुनीत और सार्थक कार्य बताया। उन्होंने कहा कि जहां भी पौधों की आवश्यकता होगी वहां महामना मालवीय मिशन की ओर से यथासंभव पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
मिशन की सांस्कृतिक प्रकोष्ठ प्रमुख श्रुति सिंहा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाना जरूरी है। वातावरण को स्वच्छ और स्वस्थ बनाए रखने के लिए हरियाली बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने पौधारोपण को जन अभियान बनाने का आह्वान किया।

महिला प्रकोष्ठ की कोऑर्डिनेटर और महामना मालवीय मिशन की उपाध्यक्ष प्रो. नीलम यादव ने सहजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सहजन अत्यंत उपयोगी पौधा है और इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसे घरों में लगाया जाना चाहिए ताकि परिवार इसके विभिन्न लाभ प्राप्त कर सके। उन्होंने उपयोगी और औषधीय पौधों को अधिक से अधिक घरों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शोधार्थी विद्यार्थी प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। महामना मालवीय मिशन के सदस्यों ने भी कार्यक्रम में भागीदारी की। प्रमुख रूप से प्रो. बृजेश रावत मौजूद रहे जो सेठ पद्म चंद संस्थान के निदेशक हैं। प्रो. रणवीर सिंह भी उपस्थित रहे जो समाज कार्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष हैं। आरके त्रिपाठी असिस्टेंट रजिस्ट्रार भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
कार्यक्रम में चतुर्भुज तिवारी और डॉ. राजकुमार शामिल हुए। डॉ. मनोज गौड़ डॉ. ममता बंसल डॉ. राजेश कुशवाह और डॉ. रत्ना पांडे ने भी सहभागिता की। डॉ. पूनम वाष्णेय नीलम शर्मा हरि कुमारी और डीके पांडे भी मौजूद रहे। संध्या बघेल पुरुषोत्तम सूर्यमणि त्रिपाठी कांत अजय उपेंद्र पचौरी प्रशांत और प्रिया सहित अनेक शोधार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। विश्वविद्यालय स्टाफ की ओर से माली गौरी भी उपस्थित रहीं। मिशन के अन्य सदस्य भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।
प्रो. बृजेश रावत और प्रो. रणवीर सिंह सहित उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण की इस पहल की सराहना की। उन्होंने महामना मालवीय मिशन के प्रयास को सराहनीय और अनुकरणीय बताया। उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया। लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने की जिम्मेदारी भी लोगों ने स्वीकार की।
आयोजन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पौधारोपण केवल एक दिन की गतिविधि बनकर न रह जाए। पौधा लगाने के बाद उसकी सुरक्षा और देखभाल करना जरूरी है। यदि पौधों को नियमित पानी मिलता रहे और उन्हें नुकसान से बचाया जाए तो वे भविष्य में बड़े पेड़ बनकर पर्यावरण को लाभ पहुंचा सकते हैं। इसी उद्देश्य से लोगों को अपने घरों और आसपास के स्थानों पर पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम ने रक्षाबंधन की भावना को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का संदेश दिया। रक्षाबंधन पर भाई और बहन एक दूसरे की सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। इसी भावना को प्रकृति तक विस्तार देने की पहल कार्यक्रम में दिखाई दी। पौधे को धरती की सुरक्षा से जोड़ते हुए लोगों को यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण की रक्षा भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आयोजकों ने कहा कि त्योहारों और विशेष अवसरों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने से लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। परिवार यदि अपने किसी खास दिन पर एक पौधा लगाने की परंपरा शुरू करें तो आने वाले वर्षों में इसका बड़ा असर दिखाई दे सकता है। फलदार पौधे भविष्य में उपयोगी फल दे सकते हैं। पुष्पीय पौधे आसपास की सुंदरता बढ़ा सकते हैं। औषधीय प्रजातियां घरेलू स्तर पर उपयोगी साबित हो सकती हैं।
पालीवाल पार्क परिसर में हुए कार्यक्रम के दौरान लोगों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझी। पौधों का वितरण कर इस अभियान को घरों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। इससे यह संदेश गया कि हरियाली बढ़ाने के लिए केवल पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। घरों और निजी परिसरों में भी उपयुक्त स्थानों पर पौधे लगाए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों शोधार्थियों विद्यार्थियों कर्मचारियों और मिशन के सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि पौधारोपण को लगातार आगे बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ना जरूरी है। बच्चों और युवाओं को भी ऐसे अभियानों में शामिल करने से उनमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इसमें योगदान दे सकता है। एक पौधा लगाना इस दिशा में पहला कदम है। उसकी देखभाल करना उस कदम को सार्थक बनाता है। जब बड़ी संख्या में लोग पौधे लगाने और उन्हें बचाने की जिम्मेदारी लेते हैं तो शहर में हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण को भी लाभ मिलता है।
रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम ने सामाजिक परंपरा को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया। आयोजन के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि वे त्योहारों और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधा लगाएं। साथ ही लगाए गए पौधे की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी मानें।
कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। लोगों को प्रेरित किया गया कि वे एक पौधा लगाएं उसकी रक्षा करें और उसे बड़ा होने तक लगातार देखभाल दें। आयोजकों ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को हरित स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण देना आज की जिम्मेदारी है। रक्षाबंधन के अवसर पर धरती की रक्षा का यह संदेश शहर में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया।
