पोइया घाट पर 85 एमएलडी इंटेक वेल और 55 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का डीएम मनीष बंसल ने किया निरीक्षण
231 किलोमीटर पाइपलाइन से यमुनापार के 100 से अधिक गली-मोहल्लों में पहुंचेगा शुद्ध पेयजल
आगामी 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बन रही पेयजल व्यवस्था
आगरा। यमुनापार क्षेत्र के करीब 55 हजार परिवारों के लिए पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में पोइया घाट पर बन रही वृहद पेयजल परियोजना अहम साबित होगी। यमुना नदी पर तैयार हो रहे 85 एमएलडी क्षमता के इंटेक वेल और 55 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए नदी के पानी का शोधन कर करीब 231 किलोमीटर लंबे पाइपलाइन नेटवर्क से ट्रांस यमुना कॉलोनी समेत 100 से अधिक गली-मोहल्लों और कॉलोनियों तक पहुंचाया जाएगा। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने रविवार को परियोजना का निरीक्षण कर निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने परियोजना को केवल वर्तमान जरूरत के लिए नहीं बल्कि आगामी 100 वर्षों की संभावित आबादी और पानी की मांग को ध्यान में रखकर विकसित करने तथा निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए।

आगरा। पोइया घाट क्षेत्र में यमुना नदी पर उत्तर प्रदेश जल निगम की ओर से पेयजल मिशन के तहत इस परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने मौके पर पहुंचकर निर्माणाधीन इंटेक वेल, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, पाइपलाइन नेटवर्क और एप्रोच रोड समेत विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से परियोजना की तकनीकी संरचना, वर्तमान प्रगति, निर्माण की गुणवत्ता, पेयजल वितरण व्यवस्था और कार्य पूरा होने की समयसीमा के बारे में जानकारी ली।
अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में यमुना नदी पर लगभग 85 एमएलडी क्षमता का इंटेक वेल बनाया जा रहा है। इसके जरिए नदी से कच्चा पानी लिया जाएगा। इसके बाद करीब 55 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी का शोधन किया जाएगा। उपचारित पानी को पाइपलाइन के माध्यम से यमुना पार क्षेत्र की विभिन्न बस्तियों तक पहुंचाने की व्यवस्था होगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य क्षेत्र में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति को मजबूत करना है।
परियोजना के तहत लगभग 231 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइपलाइन बिछाई जा रही है। विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू पेयजल कनेक्शन देने का काम भी शुरू किया जा चुका है। परियोजना पूरी होने के बाद ट्रांस यमुना कॉलोनी, कालिंदी विहार, फाउंड्री नगर, शाहदरा, राज नगर, सीता नगर, नगला रामदास और कछपुरा सहित यमुना पार क्षेत्र के 100 से अधिक गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में पानी की आपूर्ति को मजबूत करने का लक्ष्य है। इससे करीब 55 हजार परिवारों को लाभ मिलेगा।

लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहा यमुनापार
यमुनापार क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। गर्मी के दौरान कई इलाकों में कम दबाव, आपूर्ति बाधित होने और गंदे पानी की शिकायतें सामने आती रही हैं। अप्रैल 2026 में कालिंदी विहार, इस्लाम नगर, नगला किशनलाल, श्याम नगर, ट्रांस यमुना कॉलोनी फेस-1 और टेढ़ी बगिया समेत कई क्षेत्रों में पानी की किल्लत और गंदे पानी की शिकायतें सामने आई थीं। कुछ इलाकों में लोगों ने पानी के टैंकर मंगाकर जरूरत पूरी करने की बात भी कही थी।
अगस्त 2026 में रामबाग चौराहे के पास 28 इंच व्यास की मुख्य पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से ट्रांस यमुना क्षेत्र में जलापूर्ति प्रभावित हुई थी। इससे यह भी सामने आया कि मौजूदा व्यवस्था में किसी लाइन के बाधित होने पर बड़े क्षेत्र की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
जुलाई में पाइपलाइन शिफ्टिंग के कारण ट्रांस यमुना कॉलोनी सहित शहर के कई क्षेत्रों में दो दिन तक जलापूर्ति प्रभावित होने की सूचना भी सामने आई थी। उस दौरान पानी की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए टैंकरों की जरूरत पड़ी थी।
जिले की मौजूदा पेयजल व्यवस्था की बात करें तो जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार आगरा शहर में दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से औसतन 381 एमएलडी पानी करीब 12 लाख आबादी को उपलब्ध कराया जाता है। इसमें 309 एमएलडी गंगाजल और 72 एमएलडी यमुना जल शामिल है। शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए 30 जोनल पंपिंग स्टेशन, 30 ओवरहेड टैंक और 29 अंडरग्राउंड रिजर्वायर का नेटवर्क भी है।
ऐसे में यमुनापार के लिए अलग क्षमता वाली इस परियोजना को क्षेत्र की मौजूदा जरूरत के साथ भविष्य की बढ़ती आबादी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल नई पाइपलाइन बिछाना नहीं बल्कि पानी लेने, शोधन करने और घरों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था को मजबूत करना है।
डीएम ने जांची जलशोधन और पंपिंग व्यवस्था
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जल शोधन प्रक्रिया, इंटेक वेल की संरचना, पंपिंग व्यवस्था, पाइपलाइन नेटवर्क, आरसीसी निर्माण और एमबीआर आधारित उपचार व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी प्रक्रिया की भी जानकारी मांगी।

मनीष बंसल ने निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्माण चरण में निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए। इसके साथ ही थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन के माध्यम से निर्माण की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच भी कराई जाए, ताकि किसी भी स्तर पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर समझौते की स्थिति न बने।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना में निर्धारित मानकों और तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का ही इस्तेमाल किया जाए। महत्वपूर्ण निर्माण चरणों में आवश्यक परीक्षण कराए जाएं और गुणवत्ता की नियमित निगरानी की व्यवस्था रखी जाए।
बाढ़ से सुरक्षा के भी होंगे इंतजाम
यमुना किनारे बन रही परियोजना को देखते हुए जिलाधिकारी ने बाढ़ की स्थिति में संरचनाओं की सुरक्षा की जानकारी भी ली। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना की डिजाइन तैयार करते समय उच्चतम बाढ़ स्तर यानी एचएफएल को ध्यान में रखा गया है। सभी प्रमुख संरचनाओं को निर्धारित सुरक्षित स्तर पर विकसित किया जा रहा है।
मनीष बंसल ने निर्देश दिए कि संभावित बाढ़ की स्थिति में जल निकासी की व्यवस्था प्रभावी रहे। बैकफ्लो से बचाव, संरचनाओं की स्थायित्व क्षमता और बिजली से जुड़े संवेदनशील उपकरणों की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा कि यमुना के जलस्तर में असामान्य वृद्धि की स्थिति में भी परियोजना की महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं सुरक्षित रहनी चाहिए।
100 साल की जरूरत को ध्यान में रखकर बनेगा प्रोजेक्ट
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना की क्षमता वर्तमान मांग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आगामी 100 वर्षों में संभावित आबादी, पेयजल मांग और क्षेत्र के विस्तार को ध्यान में रखकर इसका विकास करने को कहा।
उन्होंने भविष्य में क्षमता बढ़ाने की संभावनाओं को अभी से परियोजना की योजना में शामिल करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अतिरिक्त भूमि और आधारभूत ढांचे के विस्तार के लिए आवश्यक प्रावधान पहले से रखने को कहा, ताकि आने वाले वर्षों में जरूरत बढ़ने पर पूरी व्यवस्था को आसानी से विस्तारित किया जा सके।
इसका सीधा लाभ यह होगा कि भविष्य में नई आबादी बसने या मौजूदा कॉलोनियों के विस्तार के साथ पेयजल व्यवस्था पर अचानक अतिरिक्त दबाव न पड़े। परियोजना को दीर्घकालिक आधार पर तैयार करने से आगे चलकर नई सुविधाएं जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर दोबारा निर्माण की जरूरत कम की जा सकेगी।
एप्रोच रोड भी दुरुस्त कराने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परियोजना स्थल तक पहुंचने वाली एप्रोच रोड की स्थिति भी देखी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मार्ग को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। निर्माण सामग्री और भारी वाहनों की आवाजाही को देखते हुए सड़क को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने पर जोर दिया गया।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा, ताकि परियोजना के किसी एक हिस्से का काम दूसरे चरण में बाधा न बने। तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर समस्या आने पर उसका तत्काल समाधान करने के निर्देश भी दिए गए।
समयसीमा में पूरा करना जरूरी
जिलाधिकारी ने परियोजना की समयसीमा की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित अवधि में पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारी नियमित रूप से स्थल का निरीक्षण करें और काम की प्रगति की निगरानी करते रहें।
परियोजना पूरी होने के बाद यमुना पार क्षेत्र के हजारों परिवारों को नियमित पेयजल आपूर्ति मिलने की उम्मीद है। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जिन्हें वर्तमान में पानी की कमी, कम दबाव या आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। घरों तक पाइपलाइन से शुद्ध पानी पहुंचने पर टैंकर या अन्य वैकल्पिक साधनों पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ करीब 55 हजार परिवारों को मिलेगा। ट्रांस यमुना कॉलोनी, कालिंदी विहार, फाउंड्री नगर, शाहदरा, राज नगर, सीता नगर, नगला रामदास और कछपुरा सहित 100 से अधिक गली-मोहल्लों में पेयजल व्यवस्था मजबूत होने का लक्ष्य है।
पाइपलाइन नेटवर्क और घरेलू कनेक्शन के विस्तार से लोगों को पानी के लिए दूर जाने या वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। नियमित आपूर्ति मिलने से घरेलू कामकाज, बच्चों की दिनचर्या और बुजुर्गों की जरूरतों को पूरा करना भी आसान होगा।
परियोजना से केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि शोधन के बाद पाइपलाइन से आपूर्ति होने के कारण गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मजबूत होगी। इससे क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में मदद मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हेमंत कुमार, एडीएम नमामि गंगे जुहैर बेग सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट किया कि परियोजना को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करते हुए निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और समयसीमा का पालन हर स्तर पर सुनिश्चित किया जाए।
आगरा की पेयजल व्यवस्था : महत्वपूर्ण आंकड़े
जीवनी मंडी वाटर वर्क्स
कुल प्लांट : 03
पहला प्लांट : 45 एमएलडी
दूसरा प्लांट : 90 एमएलडी
तीसरा प्लांट : 90 एमएलडी
कुल क्षमता/आपूर्ति : 225 एमएलडी
आवश्यक पेयजल आपूर्ति : 180 एमएलडी
स्थिति : पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती
सिकंदरा वाटर वर्क्स
कुल दो प्लांटों की क्षमता : 288 एमएलडी
वर्तमान पेयजल आपूर्ति : 144 एमएलडी
एक अतिरिक्त प्लांट का निर्माण : जारी
आगरा को ऐसे मिलता है गंगाजल
पालड़ा, बुलंदशहर से आगरा को गंगाजल : 150 क्यूसेक
पालड़ा में हरिद्वार अपर कैनाल और बिजनौर मध्य कैनाल से गंगाजल पहुंचता है।
पालड़ा में गंगाजल के लिए टैंक बना हुआ है।
इसी व्यवस्था से आगरा को गंगाजल की आपूर्ति होती है।
150 क्यूसेक में से 10 क्यूसेक गंगाजल मथुरा को दिया जाता है।
आगरा नगर निगम और आबादी
नगर निगम के कुल वार्ड : 100
100 वार्डों की कुल आबादी : 20 लाख
55 वार्डों में आंशिक जलापूर्ति
अंडरग्राउंड टैंक
कुल अंडरग्राउंड टैंक : 24
सिकंदरा वाटर वर्क्स से संचालित : 10
जीवनी मंडी वाटर वर्क्स से संचालित : 6
जलकल विभाग के संसाधन
जलकल के पास कुल टैंकर : 34
कई टैंकर खराब
जलकल के पास ट्रैक्टर : 8
यमुनापार में जलापूर्ति के लिए टैंकर : 11
स्थिति : 11 टैंकरों से यमुनापार में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पाती थी।

