आगरा। जयपुर हाउस के आलोक नगर में प्रस्तावित शराब ठेके के विरोध में धरने पर बैठीं महिलाओं की मांग पर कैबिनेट मंत्री एवं दक्षिण विधानसभा के विधायक योगेंद्र उपाध्याय मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं को आश्वस्त करते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और स्पष्ट कहा कि मंदिरों व रिहायशी क्षेत्र के बीच शराब का ठेका किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के जयपुर हाउस स्थित आलोक नगर में प्रस्तावित शराब ठेके को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध सोमवार को और तेज हो गया। क्षेत्र की महिलाओं ने रिहायशी इलाके में शराब का ठेका खोले जाने के विरोध में धरना शुरू किया। सूचना मिलने पर कैबिनेट मंत्री एवं दक्षिण विधानसभा के विधायक योगेंद्र उपाध्याय स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और महिलाओं से बातचीत की। भीड़ अधिक होने के कारण उन्होंने महिलाओं को पास स्थित एक आवास पर बुलाकर विस्तार से उनकी समस्याएं सुनीं और शीघ्र समाधान का भरोसा दिया।

महिलाओं ने मंत्री के सामने अपनी चिंता रखते हुए कहा कि जिस स्थान पर शराब का ठेका प्रस्तावित है, वह पूरी तरह रिहायशी इलाका है। यहां बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं और आसपास मंदिर, पार्क तथा सार्वजनिक स्थान हैं, जहां प्रतिदिन महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग आते-जाते हैं। उनका कहना था कि यदि यहां शराब का ठेका खुलता है तो क्षेत्र का सामाजिक वातावरण प्रभावित होगा और महिलाओं तथा बेटियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ेगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए योगेंद्र उपाध्याय ने मौके से ही जिला आबकारी अधिकारी से फोन पर बात की। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि प्रस्तावित ठेके के 500 मीटर के दायरे में पांच मंदिर स्थित हैं। इसके अलावा कई पार्क भी हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पहुंचते हैं। ऐसे स्थान पर शराब का ठेका खोला जाना जनभावनाओं के विपरीत है और इससे क्षेत्र की शांति तथा सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रिहायशी क्षेत्र के बीच इस प्रकार की गतिविधि किसी भी स्थिति में उचित नहीं मानी जा सकती। धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक उपयोग वाले स्थानों के निकट शराब का ठेका खोलने से स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत होती हैं और समाज में अनावश्यक तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए इस मामले में संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
धरने पर बैठी महिलाओं को संबोधित करते हुए योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में किसी भी प्रकार का अनैतिक, गैर-कानूनी अथवा समाज विरोधी कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे किसी प्रकार की चिंता न करें। प्रदेश में कानून का शासन है और यदि किसी कार्य से जनहित प्रभावित होता है तो कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि क्षेत्रवासियों की भावनाओं की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।
कैबिनेट मंत्री ने मौके से ही जिलाधिकारी और जिला आबकारी अधिकारी को भी निर्देश दिए कि पूरे मामले की तत्काल समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि निर्णय लेते समय स्थानीय लोगों की भावनाओं, महिलाओं की सुरक्षा, धार्मिक स्थलों की मौजूदगी और जनहित के सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि नियमों और जनभावनाओं के प्रतिकूल स्थिति बनती है तो प्रस्तावित शराब ठेके को किसी भी सूरत में शुरू न होने दिया जाए तथा आवश्यक विधिक कार्रवाई तत्काल सुनिश्चित की जाए।
योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास के साथ-साथ सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी है। किसी भी ऐसी व्यवस्था को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता जिससे आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को असुविधा या असुरक्षा का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
मंत्री के हस्तक्षेप के बाद धरने पर बैठी महिलाओं ने राहत की सांस ली। उन्होंने कहा कि लंबे समय से क्षेत्रवासी इस मुद्दे को लेकर चिंतित थे। मंत्री के स्वयं मौके पर पहुंचकर उनकी बात सुनने और अधिकारियों को तत्काल निर्देश देने से उन्हें उम्मीद जगी है कि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय होगा।
महिलाओं ने कहा कि रिहायशी इलाके में शराब का ठेका खुलने से बेटियों और महिलाओं का घर से निकलना कठिन हो जाता। इससे क्षेत्र का सामाजिक माहौल भी प्रभावित होता। उन्होंने मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि का जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनना और तत्काल कार्रवाई करना विश्वास को मजबूत करता है।
घटना के दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, स्थानीय निवासी और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। सभी ने एक स्वर में मांग की कि क्षेत्र की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शराब ठेके को अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। लोगों का कहना था कि रिहायशी क्षेत्र, मंदिरों और पार्कों के बीच शराब का ठेका खोला जाना स्थानीय वातावरण के अनुकूल नहीं है।
पूरा घटनाक्रम इस बात का संकेत भी देता है कि स्थानीय स्तर पर जनभावनाओं से जुड़े मामलों में संवाद और त्वरित प्रशासनिक हस्तक्षेप कितना महत्वपूर्ण है। क्षेत्रवासियों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि अधिकारियों द्वारा जनहित, महिलाओं की सुरक्षा, धार्मिक आस्था और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ऐसा निर्णय लिया जाएगा, जिससे क्षेत्र की शांति और सामाजिक सौहार्द कायम रहे।

