आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के आगामी 92वें दीक्षांत समारोह से पहले आयोजित ‘दीक्षोत्सव’ के अंतर्गत भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विकसित भारत, उत्तर प्रदेश की भूमिका और मानसिक स्वास्थ्य जैसे समसामयिक विषयों पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के 65 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जबकि विजेताओं की घोषणा के साथ आगामी दिनों में निबंध और काव्य लेखन प्रतियोगिताओं के आयोजन की भी जानकारी दी गई।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में आगामी 92वें दीक्षांत समारोह से पूर्व आयोजित किए जा रहे ‘दीक्षोत्सव’ कार्यक्रमों की श्रृंखला में सोमवार को भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता कुलाधिपति की प्रेरणा और कुलपति के निर्देशन में सेठ पदम चंद जैन प्रबंध संस्थान के प्रेक्षागृह में संपन्न हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय महत्व और समसामयिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर उपलब्ध कराना तथा उनमें तार्किक चिंतन, अभिव्यक्ति कौशल और सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
प्रतियोगिता के लिए तीन विषय निर्धारित किए गए थे, जिनमें पहला विषय ‘विकसित भारत 2047 में उत्तर प्रदेश का योगदान : स्वच्छ, सुरक्षित एवं समृद्ध उत्तर प्रदेश’ था। इस विषय पर प्रतिभागियों ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक, औद्योगिक, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन तथा आधारभूत संरचना के क्षेत्र में हो रहे विकास को विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बताया। वक्ताओं ने कहा कि स्वच्छता, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, डिजिटल सुशासन, रोजगार सृजन और जनभागीदारी जैसे पहलू राज्य को समृद्ध बनाने के साथ-साथ देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
दूसरा विषय ‘विकसित भारत की आधारशिला’ रहा। इस विषय पर विद्यार्थियों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार, कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरण संरक्षण, नैतिक मूल्यों, सुशासन और युवा शक्ति को विकसित भारत के प्रमुख स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों का कहना था कि सशक्त नागरिक, उत्तरदायी समाज और आधुनिक तकनीक का समन्वय ही भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने युवाओं की भूमिका को इस परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।
तीसरा विषय ‘मानसिक स्वास्थ्य : सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र का आधार’ था। इस विषय पर प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक सोच, पारिवारिक सहयोग और सामाजिक संवेदनशीलता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ नागरिक ही उत्पादक, रचनात्मक और उत्तरदायी समाज का निर्माण करते हैं, जो किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
भाषण प्रतियोगिता का आयोजन ‘दीक्षोत्सव’ कार्यक्रम के सह-नोडल अधिकारी प्रो. बृजेश रावत की देखरेख में किया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को केवल मंच ही नहीं देतीं, बल्कि उनमें नेतृत्व क्षमता, तार्किक सोच और प्रभावी संवाद कौशल का भी विकास करती हैं। राष्ट्रीय और समसामयिक विषयों पर खुलकर अपने विचार रखने का अवसर युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है।
प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों तथा संबद्ध महाविद्यालयों के कुल 65 छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने निर्धारित विषयों पर अपने विचार तथ्यों, तर्कों और उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, विषय की समझ और प्रस्तुति शैली की निर्णायकों ने भी सराहना की।
प्रतियोगिता के परिणामों में फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के रोहित कुमार प्रजापति ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। के.आर. पी.जी. कॉलेज की कृष्णा अग्रवाल द्वितीय स्थान पर रहीं। तृतीय स्थान संयुक्त रूप से के.एम.आई. के अनुप तुवारु तथा फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के मोहित प्रजापति को मिला।
कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में डॉ. सीमा सिंह और डॉ. श्वेता चौधरी ने प्रतिभागियों के भाषणों का मूल्यांकन किया। उन्होंने विषय-वस्तु, प्रस्तुति, तर्क क्षमता, भाषा शैली और समयबद्ध अभिव्यक्ति के आधार पर प्रतिभागियों का आकलन किया।
कार्यक्रम का समन्वय प्रो. एस.के. जैन, डॉ. रूचिरा प्रसाद और डॉ. मीनाक्षी चौधरी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में संस्थान के डॉ. स्वाति माथुर, डॉ. श्वेता गुप्ता, डॉ. जागृति असीजा, प्रेरणा कत्याल और पूजा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारु एवं अनुशासित बनाए रखने में छात्र आयोजन टीम के स्वयंसेवकों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। अबीर शर्मा, अर्चित, वृद्धि, गौरी बंसल, गौरी पराशर, बंशी बिंदल और सोनाक्षी ने विभिन्न व्यवस्थाओं का संचालन करते हुए कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि ‘दीक्षोत्सव’ के अंतर्गत विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आगामी दिनों में निबंध लेखन और काव्य लेखन प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को साहित्य, चिंतन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक, राष्ट्रीय और वैश्विक मुद्दों के प्रति अधिक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

