आगरा। 12 जुलाई को होने वाले वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 के लिए प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिले के 5,178 चिन्हित स्थलों पर वन विभाग और 27 से अधिक विभागों की भागीदारी से कुल 53.94 लाख पौधे लगाए जाएंगे। अभियान का लक्ष्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्येक पौधे की सुरक्षा, सिंचाई, जियो टैगिंग, निगरानी और जीवितता सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं और आमजन की भागीदारी से अलग-अलग समितियां भी बनाई जाएंगी।

जनपद में 12 जुलाई को आयोजित होने वाले वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 को सफल बनाने के लिए सर्किट हाउस में जिला वृक्षारोपण समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता जनपद के लिए नामित नोडल अधिकारी एवं प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास तथा उद्यमशीलता डॉ. हरिओम (आईएएस) ने की। उन्होंने अभियान की तैयारियों का विभागवार परीक्षण करते हुए स्पष्ट किया कि इस बार अभियान का उद्देश्य केवल निर्धारित लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे की सुरक्षा और उसके जीवित रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
बैठक में बताया गया कि जनपद में कुल 53 लाख 94 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। इनमें वन विभाग 19 लाख पौधे लगाएगा, जबकि 27 से अधिक अन्य विभागों द्वारा 34 लाख 94 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए जिले में 5,178 स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पौधारोपण अभियान संचालित होगा।
बैठक के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत जनपद की कार्ययोजना, विभागवार लक्ष्य, पौधारोपण स्थलों तथा अब तक की तैयारियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों को लक्ष्य आवंटित कर पौधों की उपलब्धता और वितरण की व्यवस्था पूरी कर ली गई है।

डॉ. हरिओम ने वन विभाग द्वारा संचालित सभी नर्सरियों का विस्तृत विवरण तलब किया। उन्होंने प्रत्येक नर्सरी में उपलब्ध पौधों की संख्या, प्रजातिवार तैयार पौधों का ब्यौरा, किस विभाग को कितने पौधे आवंटित किए गए, कितने पौधों का उठान हो चुका है और शेष उठान की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों से तत्काल नर्सरी प्रभारियों से दूरभाष पर संपर्क कर पौधों का समय पर उठान सुनिश्चित कराया, ताकि अभियान के दौरान किसी भी स्थान पर पौधों की कमी न रहे।
उन्होंने ब्लॉकवार चिन्हित पौधारोपण स्थलों, अग्रिम मृदा कार्य, सिंचाई व्यवस्था, पौधों की सुरक्षा, अनुरक्षण, फेंसिंग, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए तैयार माइक्रो प्लान, रियल टाइम जियो टैगिंग तथा सामाजिक संगठनों और आमजन की भागीदारी की तैयारियों की भी विस्तार से जानकारी ली।
डॉ. हरिओम ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना एक जिम्मेदार अधिकारी नामित करे, जो पूरे अभियान के दौरान ग्राउंड लेवल पर पौधारोपण, निगरानी और अनुरक्षण की व्यवस्था पर लगातार नजर रखे। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। यदि पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित नहीं किया गया तो अभियान का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
उन्होंने माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, प्राविधिक तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थियों की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। उनका कहना था कि युवाओं की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचेगा और पौधों की सुरक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी भी मजबूत होगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि पौधारोपण के बाद प्रत्येक स्थल पर संबंधित विभाग के नामित अधिकारी, सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि तथा स्थानीय नागरिकों की भागीदारी वाली समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों को पौधों की सुरक्षा, सिंचाई, संरक्षण और जीवितता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में सौंपी जाएगी। प्रत्येक स्थल के लिए अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी ताकि लगाए गए पौधे लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें।
बैठक में विभागवार पौधारोपण लक्ष्य का भी विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। पर्यावरण विभाग को 1 लाख 98 हजार, ग्राम्य विकास विभाग को 18 लाख 92 हजार, राजस्व विभाग को 1 लाख 54 हजार, पंचायतीराज विभाग को 1 लाख 87 हजार, आवास विकास विभाग को 12 हजार 100, औद्योगिक विकास विभाग को 14 हजार 200, नगर विकास विभाग को 3 लाख 34 हजार 600 पौधों का लक्ष्य दिया गया है। नगर विकास विभाग के अंतर्गत नगर निगम आगरा 2 लाख 37 हजार 600 तथा अन्य नगरीय निकाय 97 हजार पौधे लगाएंगे।
इसी प्रकार लोक निर्माण विभाग को 23 हजार 800, जल शक्ति विभाग को 30 हजार पौधों का लक्ष्य दिया गया है। इसके अंतर्गत सिंचाई एवं जल संसाधन विकास विभाग 26 हजार तथा नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग 12 हजार 900 पौधे लगाएगा। रेशम विभाग को 23 हजार, कृषि विभाग को 5 लाख 6 हजार, पशुपालन विभाग को 19 हजार, सहकारिता विभाग को 8 हजार 900, उद्योग विभाग को 21 हजार 400, विद्युत ऊर्जा विभाग को 8 हजार 900, माध्यमिक शिक्षा विभाग को 17 हजार 300, बेसिक शिक्षा विभाग को 19 हजार, प्राविधिक शिक्षा विभाग को 8 हजार, उच्च शिक्षा विभाग को 34 हजार 500, श्रम विभाग को 8 हजार 300, स्वास्थ्य विभाग को 22 हजार, परिवहन विभाग को 6 हजार 300, रेलवे विभाग को 16 हजार, रक्षा विभाग को 13 हजार, उद्यान विभाग को 2 लाख 31 हजार तथा गृह विभाग को 17 हजार 800 पौधे लगाने का लक्ष्य सौंपा गया है।
बैठक में अभियान के प्रभावी संचालन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. हरिओम ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने पौधारोपण अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करे। साथ ही सभी विभाग पौधारोपण के जीपीएसयुक्त फोटो और गतिविधियों की रिपोर्ट निर्धारित समय पर कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराएं, ताकि पूरे अभियान की वास्तविक समय में निगरानी की जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त जल की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। जहां आवश्यकता हो वहां ट्री गार्ड लगाए जाएं तथा अन्य सुरक्षा उपाय अपनाए जाएं। सभी विभागों को आवंटित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत पौधारोपण सुनिश्चित करने के साथ-साथ पौधों की जीवितता पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया।
डॉ. हरिओम ने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानते हुए जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना होगा। पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है जब सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन, शिक्षण संस्थान और आम नागरिक पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण के निर्माण के लिए यह अभियान आने वाली पीढ़ियों के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक बने।
बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल, मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) आजाद भगत सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव, जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार सिंह, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक शैलेन्द्र कुमार सिंह, उपायुक्त मनरेगा रामायन सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
