आगरा। बिचपुरी में आयोजित “खेत बचाओ अभियान”, तिलहन मेला और कृषक संवाद कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों को कम वर्षा और सुपर अल नीनो की चुनौती से निपटने के लिए कम पानी, कम लागत और कम उर्वरक वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सभी सहकारी केंद्रों पर यूरिया, डीएपी, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों की समस्याएं सुनकर उनके समाधान का भरोसा दिलाया और सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ भी वितरित किया।

उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में गुरुवार को बिचपुरी स्थित आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज सभागार में “खेत बचाओ अभियान”, सुपर अल नीनो एवं सूखे के प्रभाव पर कृषक संवाद तथा जनपद स्तरीय तिलहन मेला आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और खेती से जुड़ी समस्याओं पर सीधे कृषि मंत्री से संवाद किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक रानी पक्षालिका सिंह, चौ. बाबूलाल और एमएलसी मानवेंद्र सिंह गुरुजी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम से पहले कृषि मंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्र, बिचपुरी परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण किया। इसके साथ ही वृक्षारोपण महायज्ञ अभियान में सहभागिता निभाई और निर्माणाधीन किसान छात्रावास का निरीक्षण भी किया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी वितरित किया गया। कृषि यंत्रों के लिए ट्रैक्टर की चाबियां, प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सोलर पंप, बीज मिनी किट, किसान क्रेडिट कार्ड के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित तिल के बीज तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए।
कृषक संवाद सत्र में किसानों ने मक्का और मूंग के खरीद केंद्र खोलने, आलू उत्पादकों की समस्याओं तथा डीएपी की उपलब्धता सहित कई मुद्दे उठाए। कृषि मंत्री ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश में सामान्य से लगभग 55 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज होने के कारण जल संकट की स्थिति बन सकती है। ऐसे हालात में किसानों को धान जैसी अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों पर निर्भर रहने के बजाय ज्वार, बाजरा, मक्का, उड़द, मूंग, कोदो, सांवा और मड़ुवा जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों की खेती अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन फसलों में पानी, उर्वरक और लागत तीनों कम लगते हैं, जबकि किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।

उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए खेती की रणनीति में बदलाव समय की जरूरत है। सरकार किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए लगातार जागरूक कर रही है, ताकि कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।

राजा बलवंत सिंह महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने संस्थान के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय ने देश को अनेक उत्कृष्ट कृषि वैज्ञानिक दिए हैं। संस्थापक राजा बलवंत सिंह की दूरदर्शिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले ही उन्होंने वैज्ञानिक कृषि शिक्षा की आवश्यकता को समझते हुए कृषि महाविद्यालय की स्थापना की थी।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार नई योजनाएं संचालित कर रही है। “खेत बचाओ अभियान”, “किसान पाठशाला” और “विकसित कृषि अभियान” के माध्यम से आधुनिक कृषि तकनीक गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही है। उन्होंने बताया कि अब धान और गेहूं के साथ सरसों, अरहर, मक्का और बाजरा सहित कई फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की जा रही है तथा किसानों को भुगतान सात से दस दिन के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन की विभिन्न फसलों का एमएसपी पहले ही घोषित किया जा चुका है, जिससे किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सके। इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कुसुम योजना, कृषि यंत्र अनुदान और बीज अनुदान जैसी योजनाओं का लाभ डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। सोलर पंपों पर 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलने से सिंचाई की लागत में भी कमी आएगी।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर सभी सहकारी समितियों और केंद्रों पर यूरिया, डीएपी, बीज तथा अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। यदि किसी केंद्र पर खाद की कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की अपील करते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने गोबर की खाद, जीवामृत, घनजीवामृत और हरी खाद के अधिकाधिक उपयोग की सलाह दी तथा गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि अल नीनो के कारण वर्षा में कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में जल संरक्षण और बड़े स्तर पर पौधारोपण बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 12 जुलाई को पूरे प्रदेश में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है और सभी किसानों से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम स्थल पर लीड बैंक, इफको, उद्यान विभाग, आलू अनुसंधान केंद्र, कृषि विभाग और पशुपालन विभाग सहित विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर किसानों को योजनाओं की जानकारी दी तथा लाभार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
इस अवसर पर संयुक्त कृषि निदेशक हरेन्द्र मिश्रा, संयुक्त कृषि निदेशक विनोद यादव, उप निदेशक कृषि मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी आर.एस. चौहान, एलडीएम ऋषिकेश बनर्जी, सीवीओ डॉ. डी.के. पांडे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
