आगरा। लगातार बदलते मौसम, भीषण गर्मी और बढ़ी हुई उमस का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार को एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 3,340 मरीज इलाज और परामर्श के लिए पहुंचे। सबसे अधिक मरीज मेडिसिन विभाग में पहुंचे, जहां उल्टी-दस्त, बुखार और पेट संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा रही। मरीजों की भीड़ के कारण घंटों इंतजार करना पड़ा और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी दबाव साफ दिखाई दिया।

मौसम में लगातार बदलाव, भीषण गर्मी और उमस के कारण मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इसका असर अब एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भी साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही पर्चा बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। मरीजों और उनके तीमारदारों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। भीड़ इतनी अधिक रही कि कई लोग फर्श पर बैठकर नंबर आने का इंतजार करते रहे। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ आए परिजनों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगलवार को एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में कुल 3,340 मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। इनमें 1,138 नए और 2,202 पुराने मरीज शामिल रहे। सभी मरीजों का विभिन्न विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने परीक्षण कर आवश्यक उपचार और परामर्श दिया। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण सुबह से ही अस्पताल परिसर में भीड़ का दबाव बना रहा। पंजीकरण काउंटर, ओपीडी कक्ष और दवा वितरण केंद्रों पर लंबी लाइनें लगी रहीं। कई मरीजों को अपनी बारी आने में घंटों का समय लग गया।

सबसे अधिक भीड़ मेडिसिन विभाग में देखने को मिली, जहां कुल 771 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इनमें 239 नए और 532 पुराने मरीज शामिल रहे। चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों उल्टी, दस्त, बुखार और पेट संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मौसम में लगातार बदलाव, अत्यधिक गर्मी और बढ़ी हुई उमस के कारण संक्रमण तेजी से फैल रहा है और लोग बीमार पड़ रहे हैं।
मेडिसिन विभाग के बाद स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में 318 मरीज पहुंचे। सामान्य सर्जरी विभाग में 258 मरीजों ने उपचार लिया। नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग में 215 मरीज, श्वास रोग विभाग में 207 मरीज, पेन क्लीनिक में 171 मरीज, हड्डी रोग विभाग में 165 मरीज तथा शिशु रोग विभाग में 135 मरीजों का परीक्षण कर उपचार दिया गया।

इसके अलावा प्लास्टिक सर्जरी विभाग में 123 मरीज, नेत्र रोग विभाग में 111 मरीज, किडनी रोग विभाग में 95 मरीज, मस्तिष्क एवं तंत्रिका शल्य विभाग (न्यूरोसर्जरी) में 85 मरीज, कैंसर रेडियोथेरेपी विभाग में 69 मरीज, हृदय रोग विभाग में 67 मरीज, पाचन तंत्र रोग विभाग में 66 मरीज तथा दंत रोग विभाग में भी 66 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। मूत्र रोग विभाग में 62 मरीज, हृदय शल्य विभाग में 46 मरीज, मेडिकल कैंसर विभाग में 27 मरीज, चर्म एवं यौन रोग विभाग में 27 मरीज, मनोरोग विभाग में 25 मरीज, पाचन तंत्र शल्य विभाग में 24 मरीज, एंटी रेबीज टीकाकरण क्लीनिक में 16 मरीज तथा सर्जरी कैजुअल्टी में 5 मरीजों का उपचार किया गया।
ओपीडी के अलावा इमरजेंसी सेवाओं में भी मरीजों की संख्या अधिक रही। मेडिसिन इमरजेंसी में 93 मरीजों का उपचार किया गया। शिशु रोग विभाग की इमरजेंसी में 25 मरीज, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की इमरजेंसी में 7 मरीज तथा हड्डी रोग विभाग की इमरजेंसी में 6 मरीजों का उपचार किया गया।
अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों ने इलाज की गुणवत्ता पर संतोष जताया, लेकिन भीड़ और सुविधाओं को लेकर कई समस्याएं भी सामने रखीं। रामबाग निवासी गौरी गुप्ता ने बताया कि अस्पताल से सभी दवाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। डॉक्टर जितनी दवाएं लिखते हैं, उनमें से कई दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदनी पड़ती हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
आंवलखेड़ा निवासी मीरा ने बताया कि वह पहली बार एसएन मेडिकल कॉलेज इलाज कराने आई हैं। अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें डॉक्टर तक पहुंचने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। भीड़ की वजह से पूरी प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय लेने वाली रही।
इरादतनगर निवासी विजयकांत अपने बच्चे का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि बच्चे के पेशाब में खून आने की शिकायत है, इसलिए उसे डॉक्टर को दिखाने आए हैं। काफी देर से इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को भीड़ बहुत अधिक रही, जबकि एक दिन पहले इससे भी ज्यादा मरीज थे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में इलाज अच्छा मिलता है, इसलिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं।
एत्माद्दौला निवासी आशिफ अपनी मां का इलाज कराने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पर्चा तो जल्दी बन गया, लेकिन ओपीडी में मरीजों की भीड़ के कारण डॉक्टर तक पहुंचने में काफी समय लग गया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर जितनी दवाएं लिखते हैं, उतनी अस्पताल से उपलब्ध नहीं हो पातीं, इसलिए बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
सादाबाद निवासी राम कपूर सुबह करीब 10 बजे अपनी पत्नी को दिखाने अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि चार घंटे बीत जाने के बाद भी नंबर नहीं आया। ओपीडी में लाइन बहुत लंबी थी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। हालांकि इलाज अच्छा मिलने के कारण लोग धैर्य के साथ अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
बैमन लोरिया निवासी ओमवती ने बताया कि वह करीब दो घंटे से लाइन में खड़ी थीं। लगातार खड़े रहने से थकान हो गई, इसलिए उन्हें फर्श पर बैठना पड़ा। उनका कहना था कि मरीजों की संख्या इतनी अधिक थी कि बैठने की जगह भी आसानी से नहीं मिल सकी।
मेडिसिन विभाग के आचार्य डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि मौसम में लगातार बदलाव के कारण शरीर के तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है। बढ़ी हुई उमस की वजह से उल्टी, दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि शरीर में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नियमित समय-अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। बाहर का भोजन करने से परहेज करें और खानपान में विशेष सावधानी बरतें। यदि किसी व्यक्ति को उल्टी, दस्त या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी चिकित्सक से परामर्श लें, ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके और बीमारी गंभीर रूप न ले।

