आगरा। रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर चल रहे विवाद में अब बेदखली की कार्रवाई से पहले रेलवे और रक्षा संपदा विभाग संयुक्त सर्वे करेंगे। सर्वे के बाद रेलवे की भूमि का सीमांकन किया जाएगा और न्यायालय के आदेश के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी। रेलवे 62 दुकानदारों को पहले ही नोटिस जारी कर चुका है, जबकि व्यापारी जमीन पर अपना दावा जताते हुए निष्पक्ष सर्वे और दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आगरा फोर्ट क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में अब प्रशासनिक प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बेदखली की कार्रवाई से पहले रेलवे और रक्षा संपदा विभाग संयुक्त रूप से सर्वे करेंगे। इस सर्वे का उद्देश्य संबंधित भूमि का सही सीमांकन करना है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस हिस्से पर रेलवे का अधिकार है और किस हिस्से का संबंध रक्षा संपदा विभाग से है। संयुक्त सर्वे की रिपोर्ट तैयार होने के बाद न्यायालय के आदेश के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह पूरा मामला आगरा फोर्ट क्षेत्र स्थित दरेसी नंबर-2 और दरेसी नंबर-3 की दुकानों एवं उससे जुड़ी भूमि को लेकर है। रेलवे का कहना है कि संबंधित भूमि उसकी संपत्ति है और उस पर अतिक्रमण किया गया है। दूसरी ओर, वर्षों से यहां व्यापार कर रहे दुकानदार रेलवे के दावे से सहमत नहीं हैं और उनका कहना है कि संबंधित भूमि रेलवे की नहीं, बल्कि छावनी क्षेत्र की है। इसी विवाद के कारण अब संयुक्त सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की कार्रवाई तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर की जा सके।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार सर्वे के दौरान रेलवे और रक्षा संपदा विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे। दोनों विभाग अपने-अपने अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर भूमि का सीमांकन करेंगे। चूंकि विवादित क्षेत्र रक्षा संपदा विभाग की सीमा से सटा हुआ है, इसलिए पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोनों विभागों की वास्तविक सीमा क्या है। सीमांकन पूरा होने के बाद केवल रेलवे की भूमि को ही अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे प्रशासन इस मामले में पहले ही कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। संबंधित क्षेत्र के 62 दुकानदारों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नोटिस में सभी दुकानदारों को 15 दिन के भीतर कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की जा रही है और निर्धारित समयसीमा पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि यह कार्रवाई शिव नारायण कुलदीप व अन्य बनाम भारत संघ, वाद संख्या 829/1992 में दिए गए न्यायालय के आदेश के आधार पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने 23 अक्तूबर 2015 को इस मामले में रेलवे के पक्ष में निर्णय दिया था। वर्तमान में उसी न्यायिक आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया चल रही है और रेलवे उसी के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि संयुक्त निरीक्षण के लिए रक्षा संपदा विभाग ने अपनी सहमति दे दी है। अब दोनों विभाग मिलकर मौके का निरीक्षण करेंगे और सर्वे रिपोर्ट तैयार करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि रेलवे की वास्तविक भूमि कितनी है और किस हिस्से को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना है। इसके बाद ही आगे की बेदखली की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
दूसरी ओर, इस कार्रवाई का स्थानीय व्यापारियों ने विरोध किया है। व्यापारियों का कहना है कि वे पिछले करीब 50 वर्षों से इस क्षेत्र में कारोबार कर रहे हैं और उनके पास पुराने अभिलेख एवं दस्तावेज मौजूद हैं। उनका दावा है कि जिस भूमि को रेलवे अपनी बता रहा है, वह वास्तव में छावनी क्षेत्र की भूमि है। ऐसे में केवल रेलवे के दावे के आधार पर बेदखली करना उचित नहीं होगा।
व्यापारियों का कहना है कि यदि संयुक्त सर्वे निष्पक्ष तरीके से कराया जाता है और सभी सरकारी अभिलेखों का मिलान किया जाता है, तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। उनका कहना है कि वे किसी भी कानूनी प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन बिना पूरी जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बेदखली की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
व्यापारियों ने मांग की है कि संयुक्त सर्वे के दौरान सभी संबंधित विभागों के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए और पुराने दस्तावेजों को भी जांच में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि वर्षों से व्यापार कर रहे लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न उठाना पड़े।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना है। इसलिए सर्वे के बाद जिस हिस्से पर रेलवे का वैधानिक अधिकार सिद्ध होगा, उसी क्षेत्र में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएगी।
आगरा फोर्ट क्षेत्र शहर का एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक इलाका माना जाता है। यहां वर्षों से बड़ी संख्या में दुकानें संचालित हो रही हैं। ऐसे में संयुक्त सर्वे और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर स्थानीय व्यापारियों, प्रशासन और आम लोगों की नजर बनी हुई है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित भूमि का वास्तविक स्वामित्व किस विभाग के पास है और न्यायालय के आदेश के अनुरूप आगे की बेदखली की कार्रवाई किस प्रकार की जाएगी।
फिलहाल रेलवे और रक्षा संपदा विभाग के संयुक्त सर्वे को इस पूरे विवाद का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। सर्वे के निष्कर्ष ही आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई का आधार बनेंगे। वहीं, व्यापारी भी निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही किसी निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला संयुक्त सर्वे रिपोर्ट के बाद नई दिशा ले सकता है।
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आगरा। ताज डिपो की एक रोडवेज बस में चेकिंग के दौरान 39 यात्रियों में से 18 यात्री बिना टिकट यात्रा करते मिले। मुख्यालय स्क्वाड की कार्रवाई के बाद फरह थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। रोडवेज प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित परिचालक की सेवा समाप्त कर विभागीय जांच भी शुरू कर दी है। इससे पहले भी आगरा क्षेत्र के डिपो में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिससे परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के आगरा क्षेत्र में एक बार फिर बिना टिकट यात्रियों का मामला सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। ताज डिपो की एक बस में चेकिंग के दौरान बड़ी संख्या में यात्री बिना टिकट यात्रा करते मिले। मामले को गंभीर मानते हुए निरीक्षक दल ने संबंधित परिचालक के खिलाफ फरह थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। साथ ही पूरे प्रकरण की जानकारी विभागीय अधिकारियों को भेज दी गई है। रोडवेज प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित परिचालक की सेवा समाप्त कर दी है और विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार आगरा क्षेत्र के ताज डिपो की बस संख्या यूपी 80 ईटी 3632 मंगलवार सुबह करीब 5 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। बस पर परिचालक के रूप में राजेश सिंह की ड्यूटी लगी थी। निर्धारित मार्ग पर बस सामान्य रूप से चल रही थी। इसी दौरान मुख्यालय स्क्वाड के सहायक यातायात निरीक्षक दल ने नियमित जांच अभियान के तहत बस को फरह, मथुरा के पास रोक लिया।
निरीक्षक दल ने बस में सवार यात्रियों के टिकटों की जांच शुरू की। जांच के दौरान पाया गया कि बस में कुल 39 यात्री यात्रा कर रहे थे, जिनमें से 18 यात्री बिना टिकट सफर कर रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में बिना टिकट यात्रियों के मिलने पर निरीक्षक दल ने पूरे मामले को गंभीर अनियमितता मानते हुए तत्काल कार्रवाई की।
चेकिंग पूरी होने के बाद सहायक यातायात निरीक्षक दल ने संबंधित मामले में फरह थाने में एफआईआर दर्ज कराई। साथ ही घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभागीय अधिकारियों को भेजी गई, ताकि प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक कार्रवाई की जा सके। विभागीय अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित परिचालक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी।
रोडवेज प्रशासन के अनुसार बिना टिकट यात्रियों का सफर कराना सरकारी राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचाने की श्रेणी में आता है। परिवहन निगम लगातार टिकट व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए अभियान चला रहा है। ऐसे में चेकिंग के दौरान एक ही बस में 18 यात्रियों का बिना टिकट मिलना विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
यह पहला मामला नहीं है जब आगरा क्षेत्र के किसी डिपो की बस में बिना टिकट यात्रियों के मिलने की घटना सामने आई हो। इससे पहले पिछले माह ईदगाह डिपो की बस में भी चेकिंग के दौरान बिना टिकट यात्री पकड़े गए थे। उस प्रकरण की विभागीय जांच अभी पूरी भी नहीं हो सकी थी कि अब ताज डिपो की बस में इसी प्रकार की अनियमितता सामने आने से परिवहन निगम की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों को लेकर परिवहन विभाग के अंदर भी चर्चा तेज है। विभागीय जानकारों का कहना है कि यदि नियमित निगरानी और प्रभावी निरीक्षण व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय रहे तो इस प्रकार की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। उनका मानना है कि मार्गों पर तैनात निरीक्षकों तथा संबंधित अधिकारियों की लापरवाही अथवा संभावित मिलीभगत के कारण कई बार बिना टिकट यात्रा जैसे मामले सामने आते हैं, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रोडवेज की आय का प्रमुख स्रोत यात्रियों से मिलने वाला किराया है। यदि बिना टिकट यात्रा की घटनाएं लगातार बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर निगम की आय पर पड़ता है। यही कारण है कि परिवहन निगम समय-समय पर विशेष चेकिंग अभियान चलाकर ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने का प्रयास करता है। मुख्यालय स्क्वाड द्वारा की गई कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।
मामले में रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया कि घटना को गंभीर अनियमितता मानते हुए संबंधित परिचालक के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि परिचालक के सभी देयक जब्त कर लिए गए हैं तथा एआरएम की रिपोर्ट के आधार पर उसकी सेवा समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि बिना टिकट यात्रा की स्थिति किन परिस्थितियों में बनी और इसमें किसी अन्य स्तर पर लापरवाही या भूमिका रही है अथवा नहीं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परिवहन निगम का उद्देश्य यात्रियों को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसलिए बिना टिकट यात्रा या राजस्व हानि से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
परिवहन विभाग के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय से आगरा क्षेत्र के विभिन्न डिपो में इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार दो मामलों के सामने आने के बाद अब विभाग की निगरानी व्यवस्था और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में विभागीय जांच की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।
मुख्यालय स्क्वाड की कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि परिवहन निगम बिना टिकट यात्रा और राजस्व हानि के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। वहीं, विभागीय कार्रवाई के तहत परिचालक की सेवा समाप्त किए जाने और एफआईआर दर्ज होने के बाद अन्य कर्मचारियों के लिए भी यह मामला एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अब जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे प्रकरण में केवल परिचालक की जिम्मेदारी थी या फिर किसी अन्य स्तर पर भी लापरवाही अथवा अनियमितता हुई थी।
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आगरा। रेलवे स्टेशन पर चलाए गए विशेष किलाबंदी टिकट जांच अभियान में रेलवे ने बिना टिकट और अनियमित यात्रा करने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। अभियान के दौरान 419 मामलों में कुल 3,57,535 रुपये का जुर्माना वसूला गया। बिना टिकट यात्रा, अनियमित टिकट और रेल परिसर में गंदगी फैलाने वालों पर अलग-अलग कार्रवाई की गई।
आगरा रेल मंडल ने बिना टिकट और अनियमित यात्रा पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से मंगलवार को आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर विशेष किलाबंदी टिकट जांच अभियान चलाया। अभियान के दौरान टिकट जांच टीम ने स्टेशन परिसर और ट्रेनों में व्यापक जांच करते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई की। इस दौरान बिना टिकट यात्रा करने, अनियमित टिकट पर सफर करने और रेल परिसर में गंदगी फैलाने वाले यात्रियों से जुर्माना वसूला गया।
आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि अभियान के दौरान प्लेटफॉर्म और विभिन्न ट्रेनों में यात्रियों के टिकटों की गहन जांच की गई। जांच के दौरान 173 यात्री बिना टिकट यात्रा करते मिले, जिनसे 1.82 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
इसी अभियान में 210 यात्री अनियमित टिकट पर यात्रा करते पाए गए। इन यात्रियों के खिलाफ भी रेलवे नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई और उनसे 1.71 लाख रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए।
इसके अलावा रेल परिसर में स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान 36 यात्रियों को रेल परिसर में गंदगी फैलाते हुए पकड़ा गया, जिनसे 3,600 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
विशेष अभियान के दौरान कुल 419 मामलों में कार्रवाई करते हुए रेलवे ने 3,57,535 रुपये का जुर्माना वसूल किया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस तरह के अभियान का उद्देश्य यात्रियों में टिकट लेकर यात्रा करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना, अनियमित यात्रा पर रोक लगाना तथा रेलवे परिसर में स्वच्छता बनाए रखना है।
रेलवे का कहना है कि बिना टिकट यात्रा और अनियमित टिकट पर सफर करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह विशेष अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही यात्रियों से अपील की गई है कि वे वैध टिकट लेकर ही यात्रा करें तथा रेलवे परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें, ताकि कार्रवाई से बचा जा सके।
