आगरा। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आगरा ने पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर नई उपलब्धि दर्ज की है। सेंट्रल टीबी डिवीजन, नई दिल्ली और स्टेट टीबी सेल, लखनऊ द्वारा जारी रैंकिंग में जनपद ने छहों प्रमुख प्रदर्शन मानकों पर शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए। स्वास्थ्य विभाग ने इस सफलता का श्रेय समय पर मरीजों की पहचान, आधुनिक जांच, प्रभावी उपचार, टीबी निवारक उपचार, पोषण सहायता और टीमवर्क को दिया है। अधिकारियों ने लोगों से टीबी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में निःशुल्क जांच कराने की अपील भी की है।
टीबी उन्मूलन की दिशा में आगरा ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने पूरे उत्तर प्रदेश में जनपद को नई पहचान दिलाई है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित टीबी मुक्त भारत अभियान में उत्कृष्ट कार्य करते हुए आगरा ने प्रदेशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। सेंट्रल टीबी डिवीजन, नई दिल्ली और स्टेट टीबी सेल, लखनऊ द्वारा 24 मार्च 2026 से 7 जून 2026 की अवधि के प्रदर्शन के आधार पर जारी जनपदवार रैंकिंग में आगरा सभी जिलों से आगे रहा। सबसे खास बात यह रही कि जनपद ने मूल्यांकन के लिए निर्धारित सभी छह प्रमुख प्रदर्शन सूचकांकों पर शत-प्रतिशत सफलता हासिल करते हुए कुल 18 में से 18 अंक प्राप्त किए।
यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि जिले में टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान, गुणवत्तापूर्ण जांच और प्रभावी उपचार की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के दौरान मरीजों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, आधुनिक जांच तकनीकों का उपयोग करने और उपचार की निरंतर निगरानी रखने का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता के नेतृत्व में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, चिकित्सकों, लैब टेक्नीशियनों, आशा कार्यकर्ताओं, निक्षय मित्रों तथा सहयोगी संस्थाओं ने समन्वित रूप से कार्य किया, जिसके चलते आगरा प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त करने में सफल रहा।
उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों की समय पर पहचान, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जांच, समय रहते उपचार शुरू करना, टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) का प्रभावी क्रियान्वयन, मरीजों को निक्षय पोषण सहायता उपलब्ध कराना और नियमित फॉलो-अप व्यवस्था जैसी गतिविधियों को पूरी गंभीरता के साथ लागू किया गया। यही कारण है कि अभियान के सभी निर्धारित मानकों पर जनपद ने उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज किया।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि प्रदेश स्तरीय रैंकिंग छह प्रमुख प्रदर्शन सूचकांकों के आधार पर तैयार की गई थी। इनमें एक्स-रे एलिमिनेशन रेट, नाट टेस्ट, डिफरेंसिएटेड टीबी केयर, टीपीटी हाउस होल्ड कॉन्टेक्ट, टीबी मरीजों को न्यूट्रिशन किट की उपलब्धता तथा डीएसटीबी की सफलता दर को शामिल किया गया था। आगरा ने इन सभी छह इंडिकेटर्स में निर्धारित अधिकतम तीन-तीन अंक प्राप्त किए। इस प्रकार जनपद को कुल 18 में से 18 अंक मिले और वह पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभियान के दौरान प्रत्येक स्तर पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की गई। संभावित मरीजों की समय पर स्क्रीनिंग की गई, संदिग्ध मरीजों की आधुनिक तकनीकों से जांच कराई गई और पुष्टि होने पर बिना विलंब उपचार शुरू कराया गया। साथ ही मरीजों को नियमित रूप से दवाएं उपलब्ध कराने, पोषण सहायता देने और उपचार के दौरान उनकी लगातार निगरानी रखने की व्यवस्था भी प्रभावी ढंग से संचालित की गई।
अधिकारियों के अनुसार टीबी जैसी संक्रामक बीमारी पर नियंत्रण केवल अस्पतालों के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें समाज की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से आशा कार्यकर्ताओं, निक्षय मित्रों और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया तथा मरीजों और उनके परिवारों को समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित किया। सामुदायिक सहयोग के कारण अधिक से अधिक संभावित मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकीं।
अभियान के दौरान टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। मरीजों के परिवार के सदस्यों और निकट संपर्क में रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें आवश्यक परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया गया। इससे संक्रमण की श्रृंखला को रोकने में मदद मिली और टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया जा सका।
टीबी मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराने की योजना भी इस सफलता का महत्वपूर्ण आधार रही। निक्षय पोषण सहायता और न्यूट्रिशन किट के माध्यम से मरीजों को उपचार के दौरान आवश्यक पोषण उपलब्ध कराया गया, जिससे उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और उपचार पूरा करने की सफलता दर भी बेहतर रही।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि आधुनिक नाट टेस्ट के व्यापक उपयोग से टीबी की शीघ्र और सटीक पहचान संभव हुई। इससे मरीजों का इलाज समय पर शुरू किया जा सका और संक्रमण फैलने की संभावना को कम करने में मदद मिली। साथ ही डिफरेंसिएटेड टीबी केयर मॉडल के तहत मरीजों की व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार उपचार और निगरानी की व्यवस्था की गई, जिससे उपचार की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
इस उपलब्धि के साथ स्वास्थ्य विभाग ने जनपदवासियों से अपील भी की है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहे, बुखार बना रहे, वजन कम हो रहा हो, भूख न लग रही हो या बलगम में खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य बीमारी मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसे सभी लोग अपने निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर निःशुल्क टीबी जांच अवश्य कराएं। समय पर पहचान और उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी योजनाओं से नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। समय पर जांच, नियमित उपचार, जागरूकता और सामाजिक सहयोग के माध्यम से ही टीबी मुक्त आगरा और टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य इस प्रदर्शन को लगातार बनाए रखना और आगामी चरणों में भी उत्कृष्ट परिणाम देना है, ताकि आगरा न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश में भी टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में एक मॉडल जनपद के रूप में अपनी पहचान कायम रख सके।
