आगरा। आगरा में जिलाधिकारी मनीष बंसल ने IGRS और CM हेल्पलाइन पर शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया। असंतोषजनक फीडबैक मिलने पर सदर तहसील के सब रजिस्ट्रार का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए, जबकि बाह, किरावली, फतेहाबाद और सदर के एसडीएम को कम रैंकिंग पर शो-कॉज नोटिस जारी करने के आदेश दिए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और वास्तविकता के अनुरूप निस्तारण अनिवार्य है, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।

जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में IGRS पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के फीडबैक की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में IGRS और CM हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता, शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि, विभागवार प्रदर्शन तथा अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समीक्षा के दौरान खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जबकि बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया।

बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी ने IGRS और CM हेल्पलाइन पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के टॉप-5 गुणवत्तापूर्ण निस्तारण और सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले टॉप-5 विभागों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की। उन्होंने पिछले तीन माह की विभागवार रैंकिंग, संतुष्टि प्रतिशत, शिकायतकर्ताओं से फोन पर संपर्क की स्थिति तथा मुख्यमंत्री कार्यालय से ‘सी’ श्रेणी प्राप्त संदर्भों का विवरण भी प्रस्तुत कराने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा हो जिससे शिकायतकर्ता वास्तव में संतुष्ट हो।
समीक्षा के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा अपलोड की गई आख्या की गुणवत्ता भी परखी गई। कई मामलों में आख्या अस्पष्ट, अधूरी और गुणवत्ताहीन मिलने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया। समाज कल्याण विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, विद्युत विभाग, लीड बैंक मैनेजर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, ग्राम्य विकास विभाग, अधिशासी अभियंता विद्युत तथा अधीक्षण अभियंता विद्युत समेत कई विभागों को भविष्य में स्पष्ट, तथ्यपरक और गुणवत्तापूर्ण आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि बिना वास्तविक जांच के रिपोर्ट अपलोड करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक में सबसे सख्त कार्रवाई सदर तहसील के सब रजिस्ट्रार के मामले में देखने को मिली। शिकायतकर्ता द्वारा असंतोषजनक फीडबैक दिए जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित सब रजिस्ट्रार का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी शिकायत का वास्तविक समाधान नहीं किया गया और केवल पोर्टल पर निस्तारण दर्शाया गया, तो ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि नाली, सड़क, खड़ंजा, पेयजल, विद्युत और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जनसमस्याएं यदि उपलब्ध बजट में दूर की जा सकती हैं तो उन्हें तत्काल पूरा कर शिकायतों का वास्तविक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतकर्ता को केवल जवाब भेजने के बजाय मौके पर समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
बैठक में विद्युत विभाग के प्रदर्शन पर भी गंभीर नाराजगी जताई गई। IGRS पोर्टल पर विद्युत संबंधी शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में कमी मिलने पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अगली समीक्षा बैठक में मुख्य अभियंता के साथ सभी अधिशासी अभियंता अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि लगातार खराब प्रदर्शन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि IGRS और CM हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों में कम से कम 80 प्रतिशत संतुष्टि स्तर सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक शिकायतकर्ता से शत-प्रतिशत दूरभाष पर संपर्क किया जाए तथा आवश्यक होने पर फील्ड विजिट कर मौके पर जाकर शिकायत का समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता से संवाद और वास्तविक सत्यापन के बिना शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी।
बैठक में जन्म प्रमाण पत्र के लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी एसीएम को आपसी समन्वय बनाकर लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों का शत-प्रतिशत निस्तारण समयबद्ध रूप से कराने पर भी जोर दिया गया।
प्रदर्शन के आधार पर अधिकारियों का मूल्यांकन करते हुए जिलाधिकारी ने जून माह में IGRS शिकायतों के निस्तारण में बेहतर कार्य करने पर एत्मादपुर और खेरागढ़ के एसडीएम को प्रशस्ति पत्र देने के निर्देश दिए। वहीं बाह, किरावली, फतेहाबाद और सदर के एसडीएम की रैंकिंग प्रतिशत कम मिलने पर उनके खिलाफ शो-कॉज नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
समीक्षा के दौरान जिन मामलों में शिकायतकर्ताओं ने असंतोष व्यक्त किया, उनमें जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि शिकायतों का निस्तारण वास्तविक तथ्यों के आधार पर किया जाए और किसी भी स्तर पर भ्रामक या औपचारिक रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में भी शिकायतों का सही और गुणवत्तापूर्ण समाधान नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस अधिकारी अथवा विभाग की लापरवाही से जनपद की IGRS रैंकिंग प्रभावित होगी, उसकी जवाबदेही तय करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही केवल प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि IGRS और CM हेल्पलाइन पर प्राप्त प्रत्येक शिकायत का निस्तारण पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और गुणवत्ता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि ही प्रशासन की सबसे बड़ी सफलता है। समयबद्ध, निष्पक्ष और वास्तविक कार्रवाई से ही जनता का विश्वास मजबूत होगा और जनपद की IGRS रैंकिंग में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) एवं IGRS नोडल अधिकारी पूजा यादव, डीडीओ भावना यादव, पीडी डीआरडीए रेनू, बीएसए राकेश कुमार सिंह, डीआईओएस रविन्द्रपाल, डीसी मनरेगा रामायन सिंह यादव, डीपीआरओ मनीष कुमार सहित जनपद के सभी विभागों के अधिकारी, उप जिलाधिकारी, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी मौजूद रहे।
