आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के ललित कला संस्थान में आयोजित मॉन्यूमेंटल स्कल्प्चर क्ले मॉडलिंग कार्यशाला का सफल समापन हो गया। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने शिक्षकों के मार्गदर्शन में 8 फीट ऊंची प्रतिमा की क्ले मॉडलिंग पूरी की। इस पहल ने विद्यार्थियों को मूर्तिकला, क्ले मॉडलिंग और एनाटॉमी अध्ययन का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के ललित कला संस्थान में आयोजित मॉन्यूमेंटल स्कल्प्चर क्ले मॉडलिंग कार्यशाला का 3 जून को सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यशाला के दौरान 8 फीट ऊंची प्रतिमा की क्ले मॉडलिंग का कार्य पूर्ण किया गया। प्रतिमा निर्माण में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, समर्पण और टीम भावना के साथ भागीदारी निभाई तथा अपनी रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया।
माननीय कुलपति प्रोफेसर आशुरानी के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यशाला में तैयार की गई प्रतिमा का निर्माण ललित कला संस्थान के निदेशक प्रोफेसर संजय चौधरी के नेतृत्व में किया गया। मूर्तिकला विभाग के शिक्षक डॉ. गणेश कुशवाह ने प्रतिमा निर्माण की पूरी प्रक्रिया का निर्देशन किया और विद्यार्थियों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यशाला में छात्र शिवकुमार, रोहित, आग्या, विशाल, शिवानी, वंदना सिंह, रागिनी, रिया भारती तथा निकिता सिंह ने स्वेच्छा से प्रेरित होकर प्रतिमा निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से कार्य करते हुए क्ले मॉडलिंग के विभिन्न चरणों को समझा और उन्हें व्यवहारिक रूप से लागू किया। कार्यशाला के दौरान सभी प्रतिभागियों ने मूर्तिकला की बारीकियों को सीखने के साथ-साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति को भी नया आयाम दिया।
इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को क्ले मॉडलिंग, एनाटॉमी स्टडी और स्कल्प्चर निर्माण की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रतिमा निर्माण की तकनीकों, संरचना, अनुपात और कलात्मक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिला। इससे विद्यार्थियों के कौशल विकास और सृजनात्मक सोच को बढ़ावा मिला।
कार्यशाला में तैयार की गई 8 फीट ऊंची प्रतिमा अब आगे की मोल्डिंग एवं कास्टिंग प्रक्रिया के लिए तैयार है। संस्थान के अनुसार यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए सीखने, रचनात्मकता विकसित करने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुई। साथ ही इस पहल ने कला शिक्षा को व्यवहारिक रूप से समझने और बड़े स्तर की मूर्तिकला परियोजनाओं में सहभागिता का अवसर भी प्रदान किया।

