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Agra News : जमीन या इंसाफ? आयुक्त आवास पर डटे किसानों ने सरकार से मांगा जवाब

Farmers staging a protest outside the Commissioner’s residence in Agra, demanding land return or compensation at current market rates for acquired land.
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आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) द्वारा अधिग्रहित भूमि के बदले उचित मुआवजा अथवा जमीन वापसी की मांग को लेकर सैकड़ों किसान किसान नेता श्याम सिंह चाहर के नेतृत्व में पहले एडीए कार्यालय और बाद में आयुक्त आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। किसानों ने एडीए और विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के अधिकारियों पर मनमानी और किसानों के साथ अन्याय करने के आरोप लगाए। कई दौर की वार्ता के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को सात दिन के भीतर मामले के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना स्थगित किया गया।

भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों और प्रशासन के बीच मंगलवार को दिनभर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इनर रिंग रोड लैंड पार्सल तृतीय चरण से प्रभावित किसानों ने अपनी मांगों को लेकर पहले आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) कार्यालय का घेराव किया और बाद में आयुक्त आवास पहुंचकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों की मुख्य मांग अधिग्रहित भूमि की वापसी अथवा वर्तमान बाजार दर के अनुसार मुआवजा देने की रही।

किसान नेता श्याम सिंह चाहर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एडीए कार्यालय पहुंचे। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा था कि यदि किसानों की जमीन ली जाए तो उन्हें वर्तमान दरों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए अथवा जमीन वापस की जाए, लेकिन संबंधित अधिकारी सरकार की मंशा के विपरीत कार्य कर रहे हैं। किसानों का आरोप था कि अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली से सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

धरने के दौरान किसानों ने लगभग एक घंटे तक एडीए के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। इस दौरान न तो किसी अधिकारी को बाहर जाने दिया गया और न ही किसी अन्य व्यक्ति को अंदर प्रवेश करने दिया गया। स्थिति को देखते हुए एडीए सचिव संजय सिंह ने थाना लोहामंडी प्रभारी निरीक्षक इंद्रजीत सिंह सहित कई थानों का पुलिस बल मौके पर बुला लिया।

इसके बाद किसानों और अधिकारियों के बीच वार्ता आयोजित की गई। किसानों का कहना है कि बैठक के दौरान एडीए सचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न तो जमीन वापस की जा सकती है और न ही अतिरिक्त मुआवजा दिया जा सकता है। इस जवाब से नाराज किसान वार्ता छोड़कर सीधे आयुक्त आवास पहुंच गए और वहां मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। भीषण गर्मी और धूप के बावजूद किसान लगभग एक घंटे तक डटे रहे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस उपायुक्त सदर रामप्रवेश गुप्ता, थाना प्रभारी विजय विक्रम सिंह, अपर जिलाधिकारी नगर, नगर मजिस्ट्रेट तथा अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उन्हें आयुक्त कार्यालय में वार्ता के लिए राजी किया। इसके बाद आयुक्त कार्यालय में एक और बैठक आयोजित की गई, जिसमें अपर आयुक्त प्रशासन राजेश कुमार, अपर जिलाधिकारी नगर, नगर मजिस्ट्रेट, एडीए सचिव संजय सिंह सहित एक दर्जन से अधिक अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सात दिन का समय दिया जाए। अधिकारियों ने कहा कि किसानों की भूमि वापसी अथवा प्रथम चरण के समान मुआवजा दिलाने के संबंध में हर संभव प्रयास किया जाएगा और उनके साथ न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश होगी। साथ ही अधिकारियों ने यह भी बताया कि इनर रिंग रोड लैंड पार्सल तृतीय चरण क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा।

किसानों ने बैठक के दौरान एडीए सचिव पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि किसानों और अधिकारियों की बैठक पहले से निर्धारित थी, लेकिन किसानों के पहुंचने से पहले ही एडीए परिसर के गेट बंद करा दिए गए और कहा गया कि कोई किसान अंदर नहीं आएगा। किसानों ने सवाल उठाया कि जब बैठक के लिए बुलाया गया था तो प्रवेश पर रोक क्यों लगाई गई।

किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि उनके गांव के किसानों को अब तक केवल छह प्रतिशत मुआवजा ही दिया गया है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि अधिकांश किसानों से सहमति नहीं बनी तो अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी कर ली गई। उन्होंने कहा कि किसानों को उनका वैधानिक अधिकार मिलना चाहिए।

किसान नेता लाखन सिंह त्यागी ने आरोप लगाया कि इनर रिंग रोड लैंड पार्सल तृतीय चरण के भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण और किसानों के हितों के विरुद्ध रही है। उन्होंने कहा कि किसान शासन और प्रशासन से केवल अपना अधिकार मांग रहे हैं। उनका आरोप था कि कुछ अधिकारी किसानों की जमीन को भू-माफियाओं के हित में उपयोग करना चाहते हैं, जिसे किसान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

किसान नेता सोमवीर यादव ने कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लगभग 16 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी किसान अपनी भूमि पर भौतिक कब्जा बनाए हुए हैं। ऐसे में भूमि वापसी की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। वहीं प्लॉट धारक नागेंद्र फौजी ने कहा कि किसानों और प्लॉट धारकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ताज सिटी आलू उत्पादक समिति के प्रदेश सचिव लक्ष्मी नारायण बघेल ने कहा कि किसानों की समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों के साथ अन्याय जारी रहा तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

किसान नेता मुकेश पाठक ने कहा कि अब किसान चुप बैठने वाले नहीं हैं। यदि 9 जून 2026 तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो किसान बड़े स्तर पर आंदोलन और अनशन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर किसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय तक पहुंचकर अपनी आवाज उठाएंगे।

किसान राम चौधरी ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और जमीन वापसी अथवा वर्तमान दर से मुआवजे की मांग जारी रहेगी।

धरना और वार्ता के दौरान प्रदीप कुमार, कल्ला यादव, विनोद कुमार, सत्यप्रकाश सिंह, महावीर सिंह चाहर, वेदों पंडित, रविंद्र सिंह, चेतन स्वरूप, शिव गणेश, मुकेश रावत, चुन्नू बघेल, वासुदेव कुशवाहा, अशोक कुमार, धर्मेंद्र सिंह, नीरतम शर्मा, भगवान शर्मा, नरेंद्र शर्मा, पप्पू शर्मा, शैलेंद्र सिंह, जगदीश, सत्यवीर, अजय, दयाकिशन, घनश्याम, गौतम शर्मा, धर्मजीत, राधे, हरि सिंह, विष्णु, वासुदेव फौजदार, रामबाबू वर्मा, देवी सिंह तथा अन्य सैकड़ों किसान मौजूद रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि सात दिन में समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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