आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने खंदारी परिसर में अत्याधुनिक शोध प्रयोगशाला स्थापित की है। विश्वविद्यालय में एक्स-रे विवर्तन और स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप आधारित आधुनिक उपकरणों की स्थापना के साथ अब शोधार्थियों और विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय वैज्ञानिक विश्लेषण की सुविधा परिसर में ही उपलब्ध हो सकेगी। अब तक जिन शोध कार्यों के लिए विद्यार्थियों को देश के बड़े संस्थानों का रुख करना पड़ता था, वे सुविधाएं अब विश्वविद्यालय परिसर में ही उपलब्ध होंगी। इससे शोध कार्य अधिक तेज, प्रभावी और सुविधाजनक होने के साथ-साथ समय और संसाधनों की भी बचत होगी।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में अत्याधुनिक शोध उपकरणों की सफल स्थापना की गई है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में आधुनिक शिक्षा और शोध संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उच्च स्तरीय अनुसंधान कार्य करने में नई संभावनाएं प्राप्त होंगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार कुलपति प्रोफेसर आशु रानी का उद्देश्य विश्वविद्यालय को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे राष्ट्रीय स्तर के आधुनिक शोध और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसी सोच और दूरदर्शी नेतृत्व के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की स्थापना संभव हो सकी है।

जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में एक्स-रे विवर्तन और स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के साथ ऊर्जा विवर्तन विश्लेषण जैसे अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए गए हैं। इन उपकरणों की स्थापना प्रक्रिया 19 मई से प्रारंभ हुई और 21 मई को सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई। स्थापना के अंतिम दिन विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के समक्ष इन उपकरणों की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन भी किया गया। इस दौरान उपस्थित विद्यार्थियों और शोधार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

अब तक विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को अपने शोध नमूनों के विश्लेषण के लिए देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में जाना पड़ता था। इसके लिए उन्हें लंबी प्रक्रिया और अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ता था। कई बार शोध कार्यों में देरी भी हो जाती थी। लेकिन अब विश्वविद्यालय परिसर में ही इन आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि शोध कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार एक्स-रे विवर्तन उपकरण पदार्थों की क्रिस्टलीय संरचना और उनके गुणों के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप आधारित प्रणाली सूक्ष्म स्तर पर पदार्थों की सतह और उनकी संरचना का सटीक विश्लेषण करने में सहायक होती है। इन तकनीकों का उपयोग नैनो प्रौद्योगिकी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, पदार्थ विज्ञान और अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन सुविधाओं की उपलब्धता से विश्वविद्यालय में शोध कार्यों की गुणवत्ता और स्तर में महत्वपूर्ण सुधार होगा। यह सुविधा केवल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के शोधार्थी भी इसका लाभ उठा सकेंगे। इससे विश्वविद्यालय के शोध और तकनीकी क्षेत्र में पहचान और मजबूत होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
इस स्थापना कार्य का समन्वय प्रोफेसर देवेंद्र कुमार द्वारा किया गया। एक्स-रे विवर्तन उपकरण की स्थापना प्रोफेसर बी.पी. सिंह के निर्देशन में तथा स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप आधारित उपकरण की स्थापना प्रोफेसर रजनीश अग्निहोत्री के निर्देशन में पूरी की गई। इंजीनियर अखिलेश कुमार और इंजीनियर कार्तिक ने तकनीकी स्थापना और प्रदर्शन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस अवसर पर डॉ. रवि शेखर शर्मा, डॉ. अंकुर गुप्ता, डॉ. सुरभि महाजन, राशि कुलश्रेष्ठ, डॉ. प्रियंका अग्रवाल, डॉ. अमित गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय में स्थापित यह आधुनिक प्रयोगशाला आने वाले समय में शोध और नवाचार की नई संभावनाओं का केंद्र बन सकती है।
