आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वास्थ्य सेवा यात्रा के तहत सेवा बस्तियों में निस्वार्थ भाव से स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों का सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में भव्य सम्मान किया गया। इस अभियान के तहत 20 बस्तियों में लगाए गए निःशुल्क चिकित्सा शिविरों के माध्यम से लगभग 1400 मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिला था। सम्मान समारोह में चिकित्सा सेवा को मानवता की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया गया।

आगरा में नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (एनएमओ) ब्रज प्रांत द्वारा सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में एक गरिमामयी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में 12 अप्रैल 2026 को आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वास्थ्य सेवा यात्रा के दौरान सेवा बस्तियों में स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले चिकित्सकों, रेजिडेंट्स और मेडिकल छात्रों के सम्मान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एस.एन. मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थियेटर-4 सभागार में किया गया, जहां चिकित्सा जगत से जुड़े अनेक वरिष्ठ चिकित्सक, विशेषज्ञ और छात्र मौजूद रहे।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी मनीष बंसल, मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र, एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और डीन प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता तथा अन्य अतिथियों ने कार्यक्रम की शुरुआत की।
समारोह के दौरान चिकित्सकों को सम्मानित करते हुए जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कहा कि चिकित्सक समाज का वह मजबूत आधार हैं जो बिना किसी स्वार्थ के मानवता की सेवा में निरंतर कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के जरूरतमंद और वंचित क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना केवल एक पेशेवर जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सेवा बस्तियों में जाकर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाले डॉक्टर समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही चिकित्सा क्षेत्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है। चिकित्सा क्षेत्र केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों से भी जुड़ा हुआ क्षेत्र है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना ही सच्चे अर्थों में चिकित्सा सेवा का उद्देश्य है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से जुड़े युवा डॉक्टरों और वरिष्ठ चिकित्सकों ने जिस समर्पण और निष्ठा के साथ सेवा बस्तियों में कार्य किया, वह राष्ट्र सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं देना सामाजिक दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम में बताया गया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वास्थ्य सेवा यात्रा के अंतर्गत आगरा की विभिन्न सेवा बस्तियों में 20 निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों के माध्यम से लगभग 1400 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श तथा दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इस अभियान में 200 से अधिक वरिष्ठ चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और चिकित्सा छात्र-छात्राओं ने अपनी सेवाएं दी थीं।
समारोह के आयोजक और एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि एक सच्चे चिकित्सक का दायित्व केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं होता बल्कि समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी उसकी जिम्मेदारी होती है जो मुख्यधारा से दूर है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा यात्रा का उद्देश्य भी यही था कि समाज के वंचित वर्गों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंच सकें।
समारोह के दौरान सेवा कार्य में योगदान देने वाले चिकित्सकों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. राकेश त्यागी, डॉ. टी.पी. सिंह, डॉ. प्रशांत लवानिया, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. मयंक अग्रवाल, डॉ. वरुण अग्रवाल, डॉ. मनीष बंसल, डॉ. विकास कुमार, डॉ. पुनीत भारद्वाज, डॉ. सुशील सिंघल, डॉ. पवन गुप्ता, डॉ. प्रदीप देब, डॉ. शिखा सिंह और डॉ. रेनू अग्रवाल सहित कई चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। सेवा भारती से वीरेंद्र वार्ष्णेय सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंकुर गोयल द्वारा किया गया। अंत में प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता ने मुख्य अतिथियों, चिकित्सकों, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में सेवा, समर्पण और मानवता की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिसने चिकित्सा पेशे की सामाजिक जिम्मेदारी को एक बार फिर मजबूत संदेश दिया।
