लाल किले के सामने गूंजा ‘जय भवानी-जय शिवाजी’
आगरा। छत्रपति संभाजी महाराज की 369वीं जयंती पर भव्य आयोजन किया गया। लाल किले के सामने स्थित हनुमान मंदिर परिसर में राष्ट्रीय गौरव यात्रा का स्वागत हुआ। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल समेत कई जनप्रतिनिधियों ने संभाजी महाराज के शौर्य, पराक्रम और स्वाभिमान को नमन किया। महाराष्ट्र से आई 13 फीट ऊंची घुड़सवारी वाली प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रही।

गुरुवार को छत्रपति संभाजी महाराज की 369वीं जयंती पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। लाल किले के सामने स्थित हनुमान मंदिर परिसर में हुए इस आयोजन में इतिहास, शौर्य और स्वाभिमान की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में जय भवानी, जय शिवाजी और हर हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, भाजपा नेता डॉ. आलोकिक उपाध्याय, छावा भारत क्रांति मिशन के चीफ कोऑर्डिनेटर विजय काकड़े पाटिल और नासिक से आए यात्रा संयोजकों ने छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया।

राष्ट्रीय गौरव यात्रा का हुआ स्वागत
महाराष्ट्र के नासिक से चलकर आगरा पहुंची राष्ट्रीय गौरव यात्रा का शहर में जोरदार स्वागत किया गया। यात्रा के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों को भगवा अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इस साल संभाजी महाराज जयंती समारोह छावा भारत क्रांति मिशन के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. विलास पंगारकर के नेतृत्व में आयोजित किया गया। यात्रा के साथ नासिक के सिन्नर तहसील के पांगरी से लाई गई 13 फीट ऊंची घुड़सवारी वाली संभाजी महाराज की प्रतिमा भी आगरा पहुंची, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लाल किले के सामने छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक पर पूजा-अर्चना कर उन्हें नमन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने शिवाजी और संभाजी महाराज के शौर्य को याद किया।

संभाजी महाराज का जीवन आज भी प्रेरणा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि संभाजी महाराज मराठा साम्राज्य के दूसरे शासक थे। उन्होंने अपने पिता छत्रपति शिवाजी महाराज के सपनों को पूरा करने के लिए कई युद्ध लड़े। उन्होंने कहा कि संभाजी महाराज का जीवन संघर्ष, साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उनकी जयंती केवल एक आयोजन नहीं बल्कि उनके शौर्य, वीरता और पराक्रम को याद करने का अवसर है।

एसपी सिंह बघेल ने कहा कि संभाजी महाराज का जीवन आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है और राष्ट्र व धर्म के लिए समर्पण की सीख देता है।
स्वधर्म और स्वराज की मशाल कभी बुझने नहीं दी
भाजपा नेता डॉ. आलोकिक उपाध्याय ने संभाजी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मात्र 9 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पिता छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ औरंगजेब की कैद से निकलकर अद्भुत साहस का परिचय दिया था। उन्होंने कहा कि संभाजी महाराज ने अपने जीवन में स्वधर्म, स्वभाषा और स्वराज की मशाल को कभी बुझने नहीं दिया। उनका जीवन संघर्ष और आत्मसम्मान की मिसाल है। डॉ. आलोकिक उपाध्याय ने कहा कि आगरा की धरती ऐतिहासिक रूप से शिवाजी महाराज के साहस की गवाह रही है और आज उसी स्थान पर संभाजी महाराज के जयकारों का गूंजना गौरव का विषय है।
जय भवानी-जय शिवाजी के नारों से गूंजा इलाका
लाल किले के सामने स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज और नासिक से आई संभाजी महाराज की प्रतिमाओं पर अतिथियों और आयोजकों ने माल्यार्पण किया। इस दौरान सैकड़ों लोगों ने “जय भवानी, जय शिवाजी और हर हर महादेव के जयघोष लगाए। भगवा ध्वजों और पारंपरिक वेशभूषा में शामिल लोगों ने पूरे माहौल को शिवमय बना दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि यह आयोजन केवल जयंती समारोह नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और मराठा वीरता को याद करने का अवसर है।
मुंबई राजमार्ग का नाम बदलने की उठी मांग
राष्ट्रीय गौरव यात्रा में शामिल महाराष्ट्र से आए लोगों ने केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र और प्रदेश सरकार से मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज मार्ग किए जाने की मांग उठाई गई। महाराष्ट्र से आए लोगों ने कहा कि शिवाजी महाराज देश के गौरव हैं और उनके नाम पर राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम होना चाहिए।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे लोग
संभाजी महाराज जयंती महोत्सव के दौरान आयोजित कार्यक्रम में महेर से जिजाऊ के वंशज शिवाजीराजे जाधव भी मौजूद रहे। इसके अलावा भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, पार्षद सुनील कर्मचंदानी, महेश शर्मा, पार्षद जगदीश सोनकर, ललित शर्मा, दीप विनायक पटेल समेत कई गणमान्य लोगों ने रथ यात्रा का स्वागत किया। कार्यक्रम के संचालन में छावा भारत क्रांति मिशन के चीफ कोऑर्डिनेटर विजय काकड़े पाटिल, ऑर्गेनाइजर परमेश्वर नलावड़े पाटिल, रामनारायण मराठा, शशिकांत पवार, अमोल सोनवणे, निवृत्ति मुरडनर और अतुल पंगारकर की अहम भूमिका रही। रथ यात्रा के साथ संपत पगार, चंद्रभान दलवी, उत्तम खाड़े और दादा पाटिल भी आगरा पहुंचे।
