आगरा। मंडल स्तरीय कर-करेत्तर कार्यों, राजस्व वादों और जन शिकायतों से जुड़े मामलों की समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया। समीक्षा के दौरान कई विभाग मासिक लक्ष्यों से पीछे पाए गए, जबकि बड़ी संख्या में राजस्व वाद लंबित मिलने और शिकायतों पर असंतोषजनक फीडबैक सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को प्रगति में सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण, शिकायतकर्ताओं से शत-प्रतिशत संपर्क और लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।

आगरा में मंडल स्तरीय कर-करेत्तर कार्यों, राजस्व वादों और जन शिकायतों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के कार्यों की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। बैठक के दौरान विभागवार उपलब्धियों और लंबित मामलों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। समीक्षा में कई विभाग निर्धारित लक्ष्यों से पीछे पाए गए, जिस पर अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने और प्रगति में सुधार करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान सबसे पहले कर-करेत्तर कार्यों की समीक्षा की गई। समीक्षा में सामने आया कि वाणिज्य कर के क्षेत्र में मंडल के चारों जिलों की प्रगति निर्धारित मासिक लक्ष्य से पीछे रही। इसी प्रकार स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन विभाग में केवल मैनपुरी जनपद ने तय लक्ष्य हासिल किया, जबकि अन्य जिले लक्ष्य प्राप्त करने में पीछे रहे।
परिवहन और विद्युत मद में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां चारों जिलों ने मासिक लक्ष्य की प्राप्ति की। हालांकि खनिज विभाग में चारों जिलों की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। विधिक माप विभाग की समीक्षा में भी मथुरा को छोड़कर अन्य सभी जिले निर्धारित लक्ष्य से पीछे रहे। इसके अलावा विविध मद में मथुरा और मैनपुरी की वसूली प्रगति में भी अपेक्षित सुधार नहीं मिला। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी विभाग अपनी प्रगति में सुधार लाएं और निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करें।
इसके बाद बैठक में राजस्व वादों के निस्तारण की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई मामलों में समय सीमा समाप्त होने के बावजूद सैकड़ों वाद लंबित हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों की गति प्रभावित हो रही है। धारा 24 के मामलों में फिरोजाबाद और आगरा की स्थिति सबसे कमजोर पाई गई, जहां सबसे कम वादों का निस्तारण किया गया।
धारा 34 की समीक्षा में मथुरा और मैनपुरी की प्रगति कम पाई गई। वहीं धारा 67 में आगरा और मथुरा की स्थिति संतोषजनक नहीं रही। धारा 80 के मामलों में फिरोजाबाद, मथुरा और आगरा में वाद निस्तारण की गति धीमी पाई गई। इन आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाई जाए और समय सीमा से अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में वाद निस्तारण की स्थिति के आधार पर सबसे कमजोर पांच तहसीलों की जिलेवार समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित कर कमजोर प्रदर्शन करने वाली तहसीलों में सुधार की रणनीति तैयार करें। साथ ही यह भी कहा गया कि लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
बैठक में जन शिकायतों से संबंधित आईजीआरएस प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान अधिकारियों को विभागवार शिकायतों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। यह भी कहा गया कि प्रत्येक शिकायतकर्ता से शत-प्रतिशत संपर्क सुनिश्चित किया जाए ताकि समस्याओं का वास्तविक समाधान हो सके।
समीक्षा के दौरान कुछ विभागों में असंतोषजनक फीडबैक की संख्या अधिक पाई गई। इनमें अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग, उपनिदेशक उद्यान, उपश्रमायुक्त, सहायक शिक्षा निदेशक और संयुक्त निबंधक सहकारिता विभाग प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन विभागों में प्राप्त शिकायतों और उनके समाधान की गुणवत्ता पर सवाल उठे।
निर्देश दिए गए कि असंतोषजनक फीडबैक से जुड़े मामलों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।
बैठक में अपर आयुक्त प्रशासन राजेश कुमार, जिलाधिकारी मनीष बंसल, जिलाधिकारी सी.पी. सिंह, जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा, जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी वित्त संदीप कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी वित्त पंकज वर्मा, अपर जिलाधिकारी न्यायिक अरविंद द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
