आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों ने नवाचार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मात्र 10 दिनों में सौर ऊर्जा आधारित ई-साइकिल तैयार की है। यह विशेष साइकिल बिना पेट्रोल और बाहरी बिजली के संचालित हो सकती है तथा एक बार चार्ज होने पर लगभग 30 किलोमीटर तक चलने की क्षमता रखती है। छात्रों ने इसे बढ़ती ईंधन कीमतों, ऊर्जा संरक्षण और प्रदूषण जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है। यह नवाचार न केवल आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करता है, बल्कि हरित ऊर्जा और विकसित भारत की दिशा में युवाओं की सकारात्मक सोच का भी उदाहरण बनकर सामने आया है।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के दो छात्रों ने अपने नवाचार और तकनीकी सोच से एक नई उपलब्धि हासिल की है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के चौथे वर्ष के छात्र अभिषेक सविता और उनके साथी विशाल ने सौर ऊर्जा आधारित ई-साइकिल तैयार कर तकनीकी क्षेत्र में अपनी रचनात्मक क्षमता का परिचय दिया है।

विशेष बात यह है कि इस मॉडल को तैयार करने में छात्रों ने मात्र 10 दिनों का समय लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों छात्रों ने ऐसा मॉडल विकसित किया, जो आने वाले समय में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह ई-साइकिल बिना पेट्रोल और बाहरी बिजली के संचालित हो सकती है, जिससे यह पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को कम करने की दिशा में भी एक उपयोगी पहल मानी जा रही है।

छात्रों ने बताया कि देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम लोगों के लिए चुनौती बन रही हैं। इसके साथ ही ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार करने का निर्णय लिया जो कम खर्चीला होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी लाभदायक हो।

छात्र अभिषेक सविता, जो बांदा जनपद के निवासी हैं, ने बताया कि यह परियोजना केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज को ऊर्जा संरक्षण और प्रदूषण मुक्त वातावरण का संदेश देना भी है। उन्होंने कहा कि यदि इसमें अधिक क्षमता वाली बैटरी और उन्नत सौर पैनल लगाए जाएं तो इसकी कार्यक्षमता और दूरी को और अधिक बढ़ाया जा सकता है। भविष्य में इसे और बेहतर तकनीक के साथ विकसित कर बाजार तक पहुंचाने की भी योजना बनाई जा रही है।
इस सौर ई-साइकिल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे धूप में खड़ा करके चार्ज किया जा सकता है। एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद यह लगभग 30 किलोमीटर तक चल सकती है। यदि किसी स्थिति में बैटरी समाप्त हो जाए तो इसे सामान्य साइकिल की तरह पैडल के माध्यम से भी चलाया जा सकता है। पैडल चलाने के दौरान बैटरी पुनः चार्ज होने लगती है, जिससे इसका उपयोग और अधिक सुविधाजनक हो जाता है। छात्रों ने इसमें धूप और बारिश से सुरक्षा के लिए विशेष शेड की भी व्यवस्था की है।
दोनों छात्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी विद्यार्थियों को लगातार नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करती रही हैं। विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों की सोच और कार्यशैली में दिखाई दे रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय और संस्थान का सहयोगात्मक वातावरण इस सफलता की महत्वपूर्ण कड़ी रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर मनु प्रताप के मार्गदर्शन और प्रेरणा ने उन्हें लगातार नई तकनीकों पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।
मैकेनिकल विभाग के शिक्षक महेश दीक्षित और राघवेंद्र ने भी छात्रों को विशेष सहयोग प्रदान किया। उन्होंने बताया कि अंतिम वर्ष की परियोजना के अंतर्गत छात्रों को सौर ऊर्जा आधारित ई-साइकिल विकसित करने का सुझाव दिया गया था। लगभग 20 हजार रुपये की लागत से तैयार यह मॉडल अब तकनीकी मूल्यांकन और वाइवा की प्रक्रिया से गुजरेगा। यदि उचित संसाधन और तकनीकी सहयोग मिलता है तो भविष्य में इसे बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है। यह परियोजना युवाओं की प्रतिभा और नवाचार क्षमता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।
