• सेमिनार और पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया
• हेल्पलाइन नंबर 14446 और नशा मुक्ति सेवाओं की जानकारी दी गई, विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई
• नशा के सामाजिक, कानूनी एवं मानसिक प्रभावों पर चर्चा, समापन पर सामूहिक संकल्प लिया गया
आगरा: आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्र कल्याण विभाग और एनएसएस प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सेठ पदमचंद प्रबन्ध संस्थान में नशा उन्मूलन सेमिनार और ललित कला संस्थान में पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सजग किया गया। कार्यक्रमों में छात्रों ने सक्रिय सहभागिता दिखाई और नशा मुक्त समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प लिया।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार को ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत विविध जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सजग करना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देना था। कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में सेठ पदमचंद प्रबन्ध संस्थान और ललित कला संस्थान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

सेठ पदमचंद प्रबन्ध संस्थान में आयोजित नशा उन्मूलन सेमिनार का सफल संचालन विश्वविद्यालय एनएसएस समन्वयक डॉ. पूनम तिवारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सह-अधिष्ठाता डॉ. रुचिरा प्रसाद ने प्रस्तुत किया। संस्थान निदेशक प्रो. बृजेश रावत और अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. भूपेन्द्र स्वरूप शर्मा के उचित निर्देशन में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
मुख्य वक्ता मद निषेध विभाग के विमल साहू ने नशा मुक्ति की व्यापक अवधारणा प्रस्तुत करते हुए बताया कि नशा केवल मादक पदार्थों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इंटरनेट और मोबाइल का अत्यधिक उपयोग भी एक प्रकार का नशा बन गया है, जो युवाओं के मानसिक, सामाजिक एवं व्यवहारिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने हेल्पलाइन नंबर 14446 के माध्यम से नशा मुक्ति सेवाओं की जानकारी भी दी।
विशिष्ट वक्ता हरिपर्वत थाना, आगरा की निरीक्षक वैषाली चौधरी ने नशे के सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अधिकतर परिवारों के विघटन का एक प्रमुख कारण नशा है। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में भी नशा एक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभर रहा है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के प्रश्नोत्तर सत्र में मोइन संदली, अनुराग सहित अन्य विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिवम सारस्वत, अमन सिकरवार, कुर्बान एवं उत्कर्ष ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। समापन पर सभी प्रतिभागियों ने नशा मुक्त समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर निशांत चौहान, डॉ. के.के. पचौरी, डॉ. प्रवीण कुमार, अर्पिता दूबे एवं श्वेता गुप्ता सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
इसी अभियान के तहत ललित कला संस्थान में नशा मुक्त भारत विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। यह प्रतियोगिता कुलपति प्रो. आशु रानी की प्रेरणा से संस्थान के निदेशक प्रो. संजय चौधरी के निर्देशन तथा पेंटिंग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शीतल शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुई।
प्रतियोगिता में लगभग 55 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और नशा मुक्ति का संदेश रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए पोस्टरों में सामाजिक चेतना, जागरूकता एवं सशक्त संदेशों की स्पष्ट झलक दिखाई दी। उपनिदेशक डॉ. मनोज कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की और समस्त शिक्षकों के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
विश्वविद्यालय ने इन कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल छात्रों में जागरूकता का संचार किया बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में भी मजबूत संदेश दिया। इस तरह की पहलें युवाओं को स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इस अभियान से यह स्पष्ट संदेश गया कि नशा मुक्ति केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह प्रयास विद्यार्थियों के जीवन में चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के साथ-साथ नशा मुक्त भारत की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो रहा है।

