आगरा/लखनऊ। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले छह दिनों में दो बड़े हादसों में नौ लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए। इसी पृष्ठभूमि में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के.सी. जैन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजकर एक्सप्रेसवे पर पहले से स्वीकृत सुरक्षा उपायों को तत्काल लागू कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि जब यूपी एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) स्वयं दुर्घटनाओं के कारणों और जोखिमों को स्वीकार कर चुका है, तब भी सुरक्षा संबंधी निर्णय धरातल पर नहीं उतर पाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 26 मई को उन्नाव जिले के औरास थाना क्षेत्र में दिल्ली से बिहार जा रही डबल डेकर एसी बस अनियंत्रित होकर पलट गई थी। इस दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई थी और 21 यात्री घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच में चालक के वाहन चलाते समय झपकी आने को हादसे का प्रमुख कारण माना गया। मृतकों में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर और एक बंदी भी शामिल थे, जिन्हें बिहार ले जाया जा रहा था।
इसके बाद 1 जून की रात फतेहाबाद क्षेत्र में एक और भीषण हादसा हुआ। बिहार से राजस्थान लौट रहे यात्रियों की कार आगे चल रहे कंटेनर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि एक छह वर्षीय बालक समेत पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। राहत एवं बचाव कार्य के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद कंटेनर चालक मौके से फरार हो गया।
के.सी. जैन ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। इस संबंध में दाखिल आवेदन पर न्यायालय ने मामले को सड़क सुरक्षा समिति के पास भेजा था। समिति की कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। इस बीच दुर्घटनाओं का सिलसिला लगातार जारी है।
पत्र में नवंबर 2025 में लखनऊ स्थित यूपीडा मुख्यालय में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक का भी उल्लेख किया गया है। इस बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच एक्सप्रेसवे पर 7,024 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 54.7 प्रतिशत हादसों का कारण चालक की थकान या झपकी पाया गया। लगभग 70 प्रतिशत दुर्घटनाएं रात 12 बजे से सुबह 8 बजे के बीच हुईं। बैठक में यह भी माना गया था कि रात के समय 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा जोखिमपूर्ण है और इसे कम किए जाने की आवश्यकता है।
बैठक में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों पर सहमति बनी थी। इनमें रात्रिकालीन गति सीमा को कम करना, ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करना, स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट कराना, दुर्घटना डेटा के वैज्ञानिक विश्लेषण की व्यवस्था बनाना, क्रैश बैरियर और ड्राइवर वेलनेस जोन विकसित करना तथा प्रत्येक 40 से 50 किलोमीटर पर चालक विश्राम केंद्र स्थापित करना शामिल था। इसके अलावा रात्रि में चालकों के लिए सस्ती भोजन और विश्राम सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने पर भी सहमति बनी थी।
जैन ने सवाल उठाया है कि जब दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण और उनके समाधान पहले से चिन्हित हैं तो इन निर्णयों का क्रियान्वयन अब तक क्यों नहीं हो सका। उन्होंने विशेष रूप से रात में 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई है। उनका कहना है कि यदि अन्य एक्सप्रेसवे पर परिस्थितियों के अनुसार गति सीमा घटाई जा सकती है तो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भी ऐसा किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में यूपीडा से सभी स्वीकृत सुरक्षा उपायों की स्थिति सार्वजनिक करने, रात में गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित करने, नए रोड सेफ्टी ऑडिट की प्रक्रिया शुरू करने और व्यापक एआई आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने की मांग की गई है। साथ ही चालक विश्राम केंद्रों और डॉरमिटरी की स्थापना के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का भी अनुरोध किया गया है।
के.सी. जैन का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर सबसे बड़ी चुनौती चालक थकान है, जिस पर अपेक्षित गंभीरता से काम नहीं हुआ। उनके अनुसार केवल तेज गति को नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है। जब तक लंबी दूरी तय करने वाले चालकों को सुरक्षित और सम्मानजनक विश्राम सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी, तब तक दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि किसी एक्सप्रेसवे की सफलता वाहनों की गति से नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षित घर वापसी से आंकी जानी चाहिए। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को अब स्पीड कॉरिडोर नहीं, बल्कि सेफ्टी कॉरिडोर बनाने की जरूरत है।
