आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और IFTM विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के संयुक्त तत्वावधान में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर ‘स्वस्थ पीढ़ी निर्माण’ विषयक एक भव्य ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को रोकथाम आधारित स्वास्थ्य (Preventive Healthcare) के महत्व से अवगत कराना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान संस्थान और IFTM विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के सहयोग से विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन संगोष्ठी ने स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल का परिचय दिया। यह कार्यक्रम दोनों विश्वविद्यालयों के बीच हुए 5 वर्षीय शैक्षणिक अनुबंध के अंतर्गत आयोजित किया गया और इसमें छात्रों एवं फैकल्टी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

संगोष्ठी का विषय “Preventive Healthcare: Building a Healthy Generation” रखा गया। इसका उद्घाटन IFTM विश्वविद्यालय के डायरेक्टर डॉ. बी.के. सिंह ने किया। कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय गृह विज्ञान संस्थान की डीन प्रोफेसर अर्चना सिंह ने प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने संगोष्ठी के उद्देश्य और रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता डॉ. प्रीति यादव, गृह विज्ञान संस्थान, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने अपने व्याख्यान में रोकथाम आधारित स्वास्थ्य की अवधारणा को सरल एवं प्रभावी तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि आज के युग में बीमारियों के उपचार से अधिक महत्वपूर्ण उनकी रोकथाम है। जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल, व्यक्तिगत स्वच्छता, समय-समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच—ये सभी स्वस्थ जीवन के मूल स्तंभ हैं।
डॉ. प्रीति यादव ने डिजिटल युग में बच्चों और युवाओं को प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने अत्यधिक स्क्रीन टाइम, शारीरिक गतिविधियों में कमी और मानसिक तनाव जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया और समाधान सुझाए।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. तृप्ति पांडे, IFTM विश्वविद्यालय की हेड ऑफ डिपार्टमेंट ने कार्यक्रम का सुचारू संचालन किया। संगोष्ठी के अंत में डॉ. पायल सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
संगोष्ठी के प्रश्नोत्तर सत्र ने कार्यक्रम को और अधिक संवादात्मक बनाया। इसमें प्रतिभागियों ने अपने सवालों के जवाब प्राप्त किए और स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी शंकाओं को स्पष्ट किया। छात्रों ने विशेष रूप से उत्साहपूर्ण भागीदारी दिखाई और संगोष्ठी को सफलता दिलाई।
इस कार्यक्रम ने न केवल स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा दिया, बल्कि युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और रोगों से बचाव के महत्व को समझने के लिए भी प्रेरित किया। दोनों विश्वविद्यालयों की यह संयुक्त पहल शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में एक सशक्त संदेश है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस तरह की पहलें छात्रों में व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ एवं जागरूक समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। संगोष्ठी ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाना केवल व्यक्तिगत आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है।

