आगरा। पंचामृत महाअभिषेक से मध्यरात्रि प्राकट्य तक जन्माष्टमी का उल्लास, शृंगार दर्शन और महाआरती में उमड़ा वैष्णवजनों का सैलाब; शनिवार शाम दधिखांदो नंदोत्सव
नाई की मंडी स्थित प्राचीन वैष्णव पीठ श्री प्रेमनिधि मंदिर में शुक्रवार को ठाकुर श्री श्याम बिहारी जी महाराज का दिव्य जन्मोत्सव पुष्टिमार्गीय सेवा-मर्यादा, वात्सल्य और भक्ति के बीच मनाया गया। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सुबह वेद-मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत महाअभिषेक, शृंगार और आरती के बाद शाम को अलौकिक काली घटा मनोरथ के दर्शन कराए गए। श्याम आभा में सजे मंदिर में पद-कीर्तन और विशेष साज-शृंगार ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया।
मध्यरात्रि में प्रभु के पावन प्राकट्य के समय शंखनाद, घंटा-घड़ियाल और जयकारों के बीच जन्मोत्सव महाआरती हुई और पूरा परिसर ‘जय श्री कृष्ण’ तथा ‘नंद के आनंद भयो’ के उद्घोष से गूंज उठा। दर्शन के लिए दिनभर बड़ी संख्या में वैष्णवजन पहुंचे। मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं संभालीं। अब शनिवार 5 सितंबर को शाम 6 से रात 9:30 बजे तक पारंपरिक नंदोत्सव (दधिखांदो) मनाया जाएगा।

मंदिर के मुख्य सेवा अधिकारी हरि मोहन गोस्वामी एवं प्रभु के सेवा अधिकारी सुनीत गोस्वामी ने पुष्टिमार्ग में जन्माष्टमी के तात्विक स्वरूप की जानकारी देते हुए बताया कि इस परंपरा में जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के ऐतिहासिक अवतार का प्रसंग नहीं है, बल्कि साक्षात् पूर्ण पुरुषोत्तम परब्रह्म के ‘स्वरूपात्मक प्राकट्य’ का महापर्व है। श्रीमद्वल्लभाचार्य महाप्रभुजी ने श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध की सुबोधिनी टीका में इसका निरूपण करते हुए बताया है कि पुष्टि जीवों पर अहैतुक अनुग्रह कर उन्हें ‘स्वरूपानंद’ का दान कराने के लिए प्रभु का आविर्भाव हुआ है।
उन्होंने बताया कि पुष्टिमार्ग में सेवा ऐश्वर्य के भय से नहीं, बल्कि अनन्य वात्सल्य और प्रेमभाव से की जाती है। यहां ठाकुर को नवजात सुकुमार लालन के रूप में मानकर उनकी सेवा और लाड़ किया जाता है। जन्माष्टमी के आयोजन में इसी भाव को केंद्र में रखते हुए उपवास, पंचामृत स्नान, शृंगार और जागरण के मनोरथ संपन्न किए गए।
प्रातःकाल वेद-मंत्रोच्चार और पुष्टिमार्गीय विधि-विधान के साथ ठाकुर श्री श्याम बिहारी जी महाराज का पंचामृत महाअभिषेक हुआ। इसके बाद मनोहारी शृंगार कराया गया और श्रद्धालुओं को शृंगार दर्शन प्राप्त हुए। शृंगार आरती के साथ सुबह का धार्मिक क्रम पूरा हुआ। मंदिर पहुंचने वाले वैष्णवजनों ने आराध्य के दर्शन कर जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
शाम को मंदिर में अलौकिक काली घटा मनोरथ के दर्शन खुले। ठाकुर जी को श्याम आभा के अनुरूप विशेष साज-शृंगार कराया गया। मंदिर परिसर की सज्जा और घटा के पद-कीर्तन के बीच ऐसा वातावरण बना कि दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए। काली घटा मनोरथ के दौरान पुष्टिमार्गीय सेवा परंपरा, संगीत और भक्ति का विशेष संगम देखने को मिला। श्याम स्वरूप की विशेष सज्जा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।
जन्माष्टमी का मुख्य उत्सव मध्यरात्रि में प्रभु के पावन प्राकट्य के साथ चरम पर पहुंचा। निर्धारित समय पर मंदिर में शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की मंगल ध्वनि के बीच जन्मोत्सव महाआरती संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ प्राकट्य उत्सव मनाया। ‘जय श्री कृष्ण’ और ‘नंद के आनंद भयो’ के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंजता रहा। इस दौरान उपस्थित वैष्णवजनों के बीच उत्साह और भाव-विभोर करने वाला वातावरण बना रहा।
मंदिर प्रबंधक दिनेश पचौरी ने बताया कि जन्मोत्सव और काली घटा मनोरथ के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुसार व्यवस्थाएं की गई थीं। दूर-दराज से आने वाले वैष्णवजनों को सुगमता से दर्शन मिल सकें और आयोजन के दौरान व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए सेवा मंडल से जुड़े लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं।
आयोजन के दौरान आशीष पचौरी, रानू, विशाल, राजेश धाकड़, राहुल, हर्षुल और सागर शिवहरे आदि ने व्यवस्था संभाली। सुरेश पचौरी, महेश, मनीष अग्रवाल सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
जन्माष्टमी के बाद अब श्री प्रेमनिधि मंदिर में शनिवार को नंदोत्सव का आयोजन होगा। मंदिर सेवा मंडल के अनुसार 5 सितंबर, शनिवार को शाम 6 बजे से रात 9:30 बजे तक पारंपरिक नंदोत्सव (दधिखांदो) मनाया जाएगा। पुष्टिमार्गीय परंपरा में जन्म के आनंद को नंदोत्सव के रूप में मनाने की विशेष परंपरा है। जन्मोत्सव की आध्यात्मिक अनुभूति के बाद दधिखांदो में उसी आनंद को उत्सव और उल्लास के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
शुक्रवार को सुबह पंचामृत महाअभिषेक से शुरू हुआ जन्माष्टमी का क्रम शृंगार दर्शन, काली घटा मनोरथ, पद-कीर्तन और मध्यरात्रि महाआरती तक पहुंचा। प्रभु के प्राकट्य के क्षण में उमड़ा भक्तिभाव इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। अब शनिवार को होने वाला नंदोत्सव जन्मोत्सव की इसी आनंदधारा को आगे बढ़ाएगा।
