आगरा। भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी कार्यालय में जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अंतर्गत महिला समिति की ओर से हरियाली तीज उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सीता मैया की सखियों ने सावन की मल्हार और तीज के पारंपरिक गीतों से माहौल को उल्लासमय बना दिया। महिलाओं ने झूलों का आनंद लिया और हरियाली तीज के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को भी जाना। कार्यक्रम का शुभारंभ रानी सुनैना के स्वरूप लता गोयल और महिला समिति की अध्यक्ष अमृता पोरवाल ने सीताराम जी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

सावन की रिमझिम फुहारों, हरियाली और तीज के पारंपरिक उल्लास के बीच जनकपुरी महिला समिति की ओर से हरियाली तीज उत्सव का आयोजन किया गया। भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक गीतों, सावन की मल्हार और झूलों के साथ तीज के पर्व का आनंद लिया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और पारंपरिक लोकाचार की झलक भी देखने को मिली। महिलाओं ने उत्साह के साथ आयोजन में सहभागिता की और सावन के मौसम से जुड़े गीतों और तीज की परंपराओं को जीवंत किया।
हरियाली तीज का यह आयोजन जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अंतर्गत महिला समिति की ओर से किया गया। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने सीता मैया की सखियों के रूप में सावन के पारंपरिक गीत गाए। तीज के गीतों और मल्हार से कार्यक्रम स्थल का वातावरण उत्सवमय हो गया। महिलाओं ने सावन के झूलों का आनंद लिया और तीज के उल्लास को एक-दूसरे के साथ साझा किया। पारंपरिक परिवेश में आयोजित इस कार्यक्रम ने महिलाओं को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रानी सुनैना के स्वरूप लता गोयल और जनकपुरी महिला समिति की अध्यक्ष अमृता पोरवाल ने सीताराम जी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। इस दौरान सीताराम जी के समक्ष श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की गई और हरियाली तीज के पर्व की परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। आयोजन में धार्मिक भावनाओं के साथ महिलाओं की सांस्कृतिक सहभागिता भी प्रमुख रही।
कार्यक्रम के दौरान रजनी गुप्ता और मनोरमा बघेल ने हरियाली तीज के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने तीज पर्व से जुड़ी परंपराओं और भारतीय संस्कृति में इसके महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हरियाली तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सावन की हरियाली, लोक संस्कृति, पारिवारिक भावनाओं और महिलाओं के उत्सव से जुड़ी परंपरा का हिस्सा है। तीज के अवसर पर गीत-संगीत और झूले जैसी परंपराएं लंबे समय से भारतीय लोकजीवन का हिस्सा रही हैं और ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
आयोजन में महिलाओं ने सावन की मल्हार और तीज के पारंपरिक गीतों का आनंद लिया। गीतों के बीच महिलाओं में उत्साह दिखाई दिया। सावन के झूलों ने कार्यक्रम में पारंपरिक रंग भर दिया। महिलाओं ने झूले का आनंद लेते हुए तीज के उत्सव को यादगार बनाया। आयोजन का माहौल पूरी तरह सावन और तीज की पारंपरिक रंगत में नजर आया। धार्मिक आयोजन के साथ लोक संस्कृति और महिला सहभागिता के मेल ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
कार्यक्रम संयोजक शीतल अग्रवाल ने आयोजन में शामिल सभी अतिथियों और महिला समिति की सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम में सहभागिता करने वाली महिलाओं का अभिनंदन करते हुए आयोजन को सफल बनाने में उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उनके स्वागत के बाद कार्यक्रम में महिलाओं की सहभागिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का क्रम आगे बढ़ा। महिला समिति की सदस्यों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया और तीज के पारंपरिक उत्सव को जीवंत बनाने में अपनी भूमिका निभाई।
हरियाली तीज उत्सव के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सावन के गीतों के साथ कार्यक्रम में उल्लास और अपनापन दिखाई दिया। जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति से जुड़ी महिला सदस्यों के लिए यह आयोजन आपसी मेलजोल और सांस्कृतिक परंपराओं को साझा करने का अवसर भी बना। आयोजन में मौजूद महिलाओं ने तीज के पर्व की परंपराओं को उत्साह के साथ निभाया।
कार्यक्रम में स्वीटी बंसल, स्मृति गोयल, अनुप्रिया गोयल, रिनी गोयल, शुभी खंडेलवाल, एकता बंसल, वंदना पोरवाल, दीप्ति अग्रवाल, मिष्टी यादव, शालिनी पोरवाल, सीमा सिंह, अनुराधा आदि ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता की और हरियाली तीज के उत्सव को उल्लास के साथ मनाया। महिला समिति की सदस्यों की सक्रिय सहभागिता के कारण आयोजन में लगातार उत्साह बना रहा।
जनकपुरी महिला समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का सुंदर मेल देखने को मिला। सीताराम जी के समक्ष दीप प्रज्वलन से शुरू हुए कार्यक्रम में सीता मैया की सखियों के रूप में महिलाओं की सहभागिता, सावन की मल्हार, तीज के गीत और झूलों का आनंद प्रमुख आकर्षण रहे। हरियाली तीज के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा ने आयोजन को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि पर्व की परंपराओं और उसके सांस्कृतिक पक्ष से भी जोड़ा।
आयोजन की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जनकपुरी आयोजन समिति के मार्गदर्शक अशोक कुमार गुप्ता और मीडिया प्रभारी राणा सुशील सिंह ने संभाली। दोनों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में सहयोग किया। आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण कार्यक्रम में शामिल महिलाओं को गतिविधियों में सहजता से भाग लेने का अवसर मिला।
हरियाली तीज उत्सव में सावन की पारंपरिक रंगत और महिला सहभागिता ने पूरे कार्यक्रम को उत्सव का रूप दे दिया। जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं ने तीज की परंपराओं को उत्साह के साथ मनाया। सावन के गीतों और मल्हार के बीच झूलों का आनंद लेते हुए महिलाओं ने पर्व की खुशियां साझा कीं। आयोजन में भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव भी दिखाई दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर समापन तक महिलाओं में उत्साह बना रहा। सीताराम जी के समक्ष दीप प्रज्वलन के बाद तीज के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी गई और इसके बाद सावन के गीतों तथा झूलों के माध्यम से उत्सव का आनंद लिया गया। जनकपुरी महिला समिति की सदस्यों ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाया। आयोजन ने सावन और हरियाली तीज से जुड़ी लोक परंपराओं को महिला सहभागिता के माध्यम से जीवंत किया।
भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी कार्यालय में आयोजित इस उत्सव ने महिलाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और तीज के पारंपरिक उल्लास को साझा करने का अवसर दिया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सावन की मल्हार, तीज के गीत और झूलों का आनंद एक साथ दिखाई दिया। महिला समिति की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को उत्सवपूर्ण माहौल दिया। जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल सभी महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर हरियाली तीज के पर्व को यादगार बनाया।
