आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित होने वाली भव्य प्रदर्शनी विश्वविद्यालय की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध, नवाचार, सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक सरोकारों का जीवंत दस्तावेज बनेगी। प्रदर्शनी की तैयारियों को लेकर कुलपति प्रो. आशु रानी की अध्यक्षता में प्रदर्शनी समिति की दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न गैलरियों और स्टॉलों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। आम जनता के लिए खुली रहने वाली यह प्रदर्शनी विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत, वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं को एक मंच पर प्रस्तुत करेगी।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय अपने शताब्दी वर्ष समारोह को ऐतिहासिक और यादगार बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन, पालीवाल पार्क परिसर में शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाली भव्य प्रदर्शनी की तैयारियों को लेकर प्रदर्शनी समिति की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आशु रानी ने की। बैठक में प्रदर्शनी समिति के संयोजक प्रो. प्रदीप श्रीधर सहित विभिन्न गैलरी एवं स्टॉल समितियों के संयोजकों और सहयोगियों ने भाग लेते हुए तैयारियों की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।

बैठक के दौरान कुलपति प्रो. आशु रानी ने प्रदर्शनी से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित समितियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूर्ण होने का अवसर केवल एक उत्सव नहीं बल्कि संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा, शैक्षणिक उत्कृष्टता, सामाजिक प्रतिबद्धता और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को समाज के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी विश्वविद्यालय की पहचान को और अधिक सशक्त बनाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को प्रेरित करने का भी कार्य करेगी।

कुलपति ने सभी समितियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने स्टॉलों और गैलरियों को आकर्षक, तथ्यपरक, शोध आधारित और प्रेरणादायी स्वरूप में तैयार करें ताकि आने वाले विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक और आम नागरिक विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को बेहतर तरीके से समझ सकें। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा को क्रमबद्ध रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए, जिससे आगंतुकों को संस्थान के विकास और विस्तार की पूरी तस्वीर दिखाई दे सके।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा छात्र हित में किए गए नवाचारों, शोध उपलब्धियों, अकादमिक उत्कृष्टता, सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों तथा समाज और राष्ट्र के विकास में निभाई गई भूमिका को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए। कुलपति ने विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान प्रदेश और देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है। समय-समय पर इस विश्वविद्यालय से अनेक अन्य विश्वविद्यालयों का गठन हुआ है, जिसके कारण यह उच्च शिक्षा की एक सशक्त जननी के रूप में स्थापित हुआ है।
शताब्दी वर्ष प्रदर्शनी का आयोजन स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित दीक्षांत पार्क में किया जाएगा। यह प्रदर्शनी आम जनमानस के लिए खुली रहेगी, जिससे शहर और आसपास के क्षेत्रों के लोग विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और विरासत को करीब से देख सकेंगे। प्रदर्शनी में ऐतिहासिक दस्तावेजों, दुर्लभ अभिलेखों, सांस्कृतिक धरोहरों, शोध परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और सामाजिक सहभागिता से जुड़े विविध पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रदर्शनी के लिए विभिन्न विषयों पर आधारित विशेष गैलरियां और स्टॉल तैयार किए जा रहे हैं। इनमें कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी अभिलेख धरोहर संग्रहालय एवं शोध केंद्र, विजुअल आर्ट्स गैलरी, विश्वविद्यालय के 100 वर्षों के स्वर्णिम इतिहास को दर्शाने वाली विशेष गैलरी, केंद्रीय पुस्तकालय गैलरी, इन्क्यूबेशन सेंटर एवं स्टार्टअप गैलरी, हुनर गैलरी, यूनिवर्सिटी फूड एंड न्यूट्रिशन गैलरी, इतिहास एवं संस्कृति विभाग का संग्रहालय, यूनिवर्सिटी सोशल कनेक्ट, जी-20 समिट एवं विश्वविद्यालय विषयक प्रदर्शनी, टेक्नोलॉजी ट्री, खेलो इंडिया कॉर्नर, छात्र कल्याण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की गैलरी, इंटरनेशनल रिलेशन सेल, सामुदायिक रेडियो 90.4 तथा टाइम कैप्सूल जैसे विशेष आकर्षण शामिल होंगे।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने विभिन्न गैलरियों और स्टॉलों की तैयारियों की जानकारी साझा की। साथ ही आगामी दिनों में किए जाने वाले कार्यों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। प्रदर्शनी को तकनीकी रूप से आधुनिक, दृश्यात्मक रूप से आकर्षक और सूचनात्मक बनाने के लिए कई नवाचारों पर भी विचार-विमर्श किया गया। उद्देश्य यह है कि आगंतुक केवल प्रदर्शनी को देखें ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और योगदानों को अनुभव भी कर सकें।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि शताब्दी वर्ष प्रदर्शनी केवल अतीत का प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी रेखांकित करेगी। यह आयोजन विद्यार्थियों को नए अवसरों के प्रति जागरूक करेगा, शोधार्थियों को प्रेरित करेगा तथा समाज और शिक्षा जगत के बीच संवाद को मजबूत बनाने का कार्य करेगा। प्रदर्शनी के माध्यम से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक भूमिका को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
बैठक में यह भी बताया गया कि शताब्दी वर्ष समारोह से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की तैयारियों की नियमित समीक्षा की जा रही है। संबंधित अधिकारियों और समितियों द्वारा लगातार बैठकें आयोजित कर कार्यों की प्रगति का आकलन किया जा रहा है, ताकि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकें। प्रदर्शनी समिति की यह दूसरी समीक्षा बैठक थी और इसमें अब तक हुए कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए आगामी चरणों की रणनीति तय की गई।
बैठक में प्रो. संजय चौधरी, प्रो. बी. शुक्ला, प्रो. राजेश कुशवाहा, प्रो. अर्चना सिंह, पूजा सक्सेना सहित विभिन्न समितियों से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने शताब्दी वर्ष प्रदर्शनी को सफल बनाने के लिए समन्वित प्रयासों और सक्रिय सहभागिता का संकल्प व्यक्त किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि यह प्रदर्शनी शताब्दी वर्ष समारोह का प्रमुख आकर्षण बनेगी और विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत, वर्तमान उपलब्धियों तथा भविष्य के विजन को समाज के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए एक स्थायी छाप छोड़ेगी।
