आगरा। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने और युवाओं को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराने के उद्देश्य से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण, जागरूकता रैली और संरक्षण अभियानों की श्रृंखला आयोजित की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता से आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, हरित विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया गया।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी की प्रेरणा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता के तहत आयोजित कार्यक्रमों में परिसर को अधिक हरित बनाने के साथ-साथ समाज में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान वृक्षारोपण, जनजागरूकता गतिविधियों और संरक्षण संबंधी अभियानों के माध्यम से प्रकृति के प्रति सामूहिक दायित्व निभाने का आह्वान किया गया।

स्कूल ऑफ लाइफ साइंस के पर्यावरण अध्ययन विभाग की ओर से स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित दीक्षांत समारोह पार्क में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। औद्योगिक संस्था लार्सन एंड टूब्रो (एल एंड टी) के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम के दौरान लगभग 150 पौधे लगाए गए। इनमें सिंदूर, चंपा, गुड़हल और अशोक जैसी पर्यावरणीय, औषधीय तथा सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल रहीं। पौधारोपण के साथ उनके संरक्षण और नियमित देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित करने का संकल्प भी लिया गया, ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में हरित विरासत का आधार बन सकें।

इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सावित्रीबाई फुले भवन महिला छात्रावास में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत छात्राओं ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। कार्यक्रम में पारिजात इको फाउंडेशन की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति सिंह ने सीड बॉम्ब तकनीक की उपयोगिता और वृक्षों की भूमिका पर प्रकाश डाला। छात्रावास अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण आवश्यक है। वार्डन डॉ. रत्ना पाण्डेय ने छात्राओं को पौधों की देखभाल और परिसर को हराभरा बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर समाज विज्ञान संस्थान के समाज कार्य विभाग तथा इतिहास एवं संस्कृति विभाग की ओर से भी पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन गतिविधियों में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए पर्यावरणीय जिम्मेदारी का परिचय दिया तथा हरित वातावरण के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए स्वामी विवेकानंद परिसर, खंदारी में “Inspired by Nature: For Climate, For Our Future” विषय पर जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने हाथों में संदेश लिखी तख्तियां लेकर लोगों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया। “प्रकृति हमारी धरोहर है”, “स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित भविष्य” और “हरित जीवन ही स्वस्थ जीवन” जैसे नारों के माध्यम से जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए प्रकृति के साथ संतुलित संबंध स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव अजय मिश्रा ने अपने संदेश में सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए पृथ्वी को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और हरित बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यक्रमों में प्रो. बी.एस. शर्मा, प्रो. रजनीश (आर.के.) अग्निहोत्री, प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. एस.के. जैन, डॉ. राजीव वर्मा, कैलाश बिन्द, डॉ. मोनिका अस्थाना, डॉ. सुरभि महाजन, डॉ. उदिता तिवारी, डॉ. नीलू सिन्हा, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. प्रवीन कुमार, डॉ. अंकुर, डॉ. नंदिनी, डॉ. शिवानी, आस्था तोमर और प्रिया यादव सहित अनेक शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। एल एंड टी की ओर से नितिन तिवारी, प्रत्युष बागची, रम्या रंजन भुइयां और अतहर अंसारी ने सहभागिता की। यूपीएमआरसीएल से नरेंद्र मिश्रा, प्रखर जैन, नीरज शकुंत और अभिनव सिंह मौजूद रहे, जबकि TYPSA-Italferr (GC) की ओर से राकेश कुमार, डॉ. धीरज कुमार, रत्नेश तिवारी तथा शुभम गंगवार ने कार्यक्रमों में सहयोग दिया। विद्यार्थियों में दिव्या भल्ला, देविका और तनया सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा और शोध का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सतत विकास के मूल्यों को व्यवहार में उतारने वाला एक जागरूक संस्थान भी है
