डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में प्लास्टिक अवशिष्ट प्रबंधन पर जागरूकता अभियान
विद्यार्थियों ने प्लास्टिक प्रदूषण के खतरों और समाधान पर दी विस्तृत जानकारी
सिंगल-यूज प्लास्टिक कम करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील
आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के पर्यावरण अध्ययन विभाग के विद्यार्थियों ने “प्लास्टिक अवशिष्ट प्रबंधन” विषय पर एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अभियान के माध्यम से छात्रों ने बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों, इसके प्रबंधन के नियमों और समाधान के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न संस्थानों में जाकर लोगों को जागरूक किया और सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की अपील की।

डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना था। पर्यावरण अध्ययन विभाग के विद्यार्थियों ने अपने प्रस्तुतिकरण और संवाद के माध्यम से प्लास्टिक कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और उसके समाधान के उपायों को सरल भाषा में समझाया।

कार्यक्रम के दौरान वैष्णवी बघेल ने प्लास्टिक प्रदूषण के कारणों और उसके गंभीर दुष्प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक का अनियंत्रित उपयोग न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि यह मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण का भी बड़ा कारण बन रहा है। उन्होंने लोगों से प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील की।

पूर्वी कौशिक ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि इन नियमों को सही तरीके से लागू किया जाए तो प्लास्टिक कचरे की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को कचरे के पृथक्करण और जिम्मेदार तरीके से प्लास्टिक के निपटान के बारे में भी जागरूक किया।
देविका रघुवंशी ने हाल ही में प्लास्टिक प्रबंधन से जुड़े अपडेट्स और नई नीतियों के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि समय-समय पर सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए नई पहलें की जा रही हैं और समाज को इन पहलों का समर्थन करना चाहिए। टीना भारद्वाज ने अपने वक्तव्य में प्लास्टिक अवशिष्ट प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि हम अभी से जागरूक नहीं हुए तो आने वाले समय में पर्यावरण पर इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
पूजा यादव ने प्लास्टिक प्रदूषण के पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के सूक्ष्म कण जल स्रोतों और खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहे हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। उन्होंने लोगों से प्लास्टिक के विकल्पों को अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
इस जागरूकता अभियान को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसकी श्रृंखला विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों में भी आयोजित की गई। इनमें होम साइंस इंस्टिट्यूट, सेठ पदमचंद जैन प्रबंधन संस्थान, आईटी विभाग, दीनदयाल ग्राम विकास संस्थान, कन्हैयालाल मानिकलाल मुंशीलाल इंस्टिट्यूट और यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल शामिल रहे। इन संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से बड़ी संख्या में छात्रों और आमजन को प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों और अधिकारियों की उपस्थिति भी रही। सेठ पदमचंद जैन संस्थान में सह-अधिष्ठाता डॉ. रुचिरा प्रसाद, डॉ. स्वाति माथुर, डॉ. रूचि और डॉ. श्वेता मौजूद रहीं। दीनदयाल ग्राम विकास संस्थान में निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. आयुष मंगल और डॉ. नीरज की उपस्थिति रही। कन्हैयालाल मानिकलाल मुंशीलाल इंस्टिट्यूट में डॉ. नीलम यादव ने कार्यक्रम में भाग लिया। यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल सौरभ शर्मा और वनस्पति विभाग की डॉ. पूर्ति सहित कई अन्य शिक्षाविद और गणमान्य लोग भी इस अभियान में शामिल हुए।
यह संपूर्ण अभियान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. भूपेंद्र स्वरुप शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान का समन्वय छात्र कल्याण विभाग के कार्यक्रम समन्वयक पुरुषोत्तम मयूरा द्वारा किया गया, जिनके निर्देशन में विद्यार्थियों ने विभिन्न संस्थानों में जाकर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने समाज से अपील की कि सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम किया जाए और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से ही इसे सफल बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों ने यह भी संदेश दिया कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े परिवर्तन ला सकते हैं और यदि समाज सामूहिक रूप से प्रयास करे तो प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

