फतेहाबाद। तहसील फतेहाबाद के गांव पारोली सिकरवार में शनिवार को विद्युत विभाग की टीम स्मार्ट मीटर लगाने के लिए पहुंची, लेकिन ग्रामीणों के कड़े विरोध के कारण टीम को वापस लौटना पड़ा। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए और भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के पदाधिकारियों ने भी हस्तक्षेप किया। इस विरोध के बाद विद्युत विभाग ने सोमवार को ग्रामीणों और भाकियू पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाया है।
विद्युत विभाग की टीम दोपहर के समय गांव में स्मार्ट मीटर लगाने पहुँची थी। जैसे ही मीटर लगाने का काम शुरू हुआ, ग्रामीणों ने इसके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और काम रोक दिया। इस दौरान टीम और ग्रामीणों के बीच नोंकझोंक भी देखने को मिली। विरोध की सूचना मिलते ही भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष अवधेश ठाकुर के नेतृत्व में पदाधिकारी मौके पर पहुंचे।
भाकियू पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विभाग बिना किसी पूर्व सूचना और पारदर्शिता के ग्रामीणों पर स्मार्ट मीटर थोप रहा है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक किसानों की आशंकाओं का समाधान नहीं होगा, तब तक गांव में कोई भी मीटर नहीं लगाया जाएगा। इस दौरान गोविंदा सेंथिया, रामलाल वर्मा और ब्रह्मलाल वर्मा समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
विद्युत विभाग के एसडीओ गौरव राजपूत ने बताया कि टीम को ग्रामीणों और भाकियू के विरोध के कारण लौटना पड़ा। विभाग सोमवार को भाकियू पदाधिकारियों और ग्रामीणों के साथ बैठकर वार्ता करेगा। वार्ता के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
ये हैं स्मार्ट मीटर के फायदे नुकसान
स्मार्ट मीटर पारंपरिक बिजली मीटरों की तुलना में अधिक उन्नत और सुविधाजनक होते हैं। ये रीयल-टाइम डेटा सीधे बिजली विभाग को भेजते हैं, जिससे गलत रीडिंग या अनुमानित बिलिंग की समस्या खत्म हो जाती है। स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर बेहतर नियंत्रण रख सकते हैं और मोबाइल ऐप या इन-होम डिस्प्ले के माध्यम से दैनिक/घंटेवार खपत देख सकते हैं।
इसके अलावा, स्मार्ट मीटर प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों प्रकार की सुविधा प्रदान करते हैं। प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म होने पर बिजली स्वतः कट जाती है, जिससे अनावश्यक बिल नहीं बनते। यदि मीटर में छेड़छाड़ की जाती है तो सिस्टम को तुरंत अलर्ट मिलता है, जिससे बिजली चोरी पर नियंत्रण रहता है। सोलर पैनल वाले घरों के लिए भी स्मार्ट मीटर उपयोगी हैं, क्योंकि यह ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त बिजली की सटीक गणना करता है।
हालांकि स्मार्ट मीटर के कुछ नुकसान और चुनौतियाँ भी हैं। ये इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर करते हैं, इसलिए नेटवर्क खराब होने पर रीडिंग अपडेट में देरी हो सकती है। प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म होने पर बिजली कटना भी समस्याएं पैदा कर सकता है। तकनीकी खराबी की स्थिति में बिलिंग में गड़बड़ी हो सकती है और शुरुआती दिनों में सटीक रीडिंग के कारण बिल ज्यादा लग सकता है।
विद्युत विभाग का उद्देश्य स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाना है। विभाग का कहना है कि मीटर से बिजली चोरी कम होगी, बिलिंग अधिक सटीक होगी और उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा।
गांव पारोली सिकरवार में शनिवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद विद्युत विभाग ने स्थिति को नियंत्रित करने और ग्रामीणों की शंकाओं को दूर करने के लिए सोमवार को बैठक बुलाई है। इस बैठक में किसान यूनियन और विभागीय अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद ही स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिलहाल, गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए टीम को शनिवार को बैरंग लौटना पड़ा, लेकिन विभाग और भाकियू के बीच होने वाली वार्ता ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान निकाल सकती है।

