आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज कल्याण विभाग स्थित सावित्रीबाई फुले भवन (महिला छात्रावास) के ग्राउंड फ्लोर पर ‘फायर सेफ्टी एवं डिजास्टर मैनेजमेंट वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशों के अनुसार हुआ, जिसमें छात्राओं को अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया गया।

कार्यशाला का संचालन छात्रावास की वार्डन डॉ. रत्ना पांडे ने किया। कार्यक्रम में लगभग 80 छात्राओं और 5 स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया। विशेषज्ञ प्रशिक्षण हेतु फायर स्टाफ ऑफिसर अनूप कोटिया और सिविल डिफेंस स्टाफ ऑफिसर बृज भूषण शर्मा उपस्थित रहे।

कार्यशाला में आग लगने की स्थिति में अपनाए जाने वाले जरूरी कदमों पर विस्तार से चर्चा हुई। अनूप कोटिया ने छात्राओं को सलाह दी कि आपातकाल में घबराने की बजाय शांत रहें। उन्होंने बताया कि निकटतम आपातकालीन निकास का उपयोग करें, धुएं से बचने के लिए गीले कपड़े से मुंह ढकें और जमीन पर झुककर या रेंगते हुए सुरक्षित बाहर निकलें। इसके अलावा शॉर्ट सर्किट, गैस रिसाव और विद्युत उपकरणों से उत्पन्न होने वाली आग के संभावित खतरों के प्रति भी सचेत किया गया।
कार्यशाला के व्यावहारिक सत्र में राजेश कुमार ने वाटर, CO₂, फोम और ड्राई पाउडर जैसे अग्निशमन यंत्रों के सही उपयोग का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने छात्राओं को बताया कि आग के प्रकार के अनुसार उपयुक्त फायर एक्सटिंग्विशर का चयन करना चाहिए। विद्युत आग पर पानी का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ‘PASS तकनीक’ (Pull pin, Aim low, Squeeze lever, Sweep nozzle) का अभ्यास कराते हुए आग बुझाने की सही प्रक्रिया सरल ढंग से समझाई।
कार्यक्रम में छात्रावास में स्थापित अग्निशमन यंत्रों, आपातकालीन अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और फायर ड्रिल की महत्ता पर भी विशेष चर्चा हुई। छात्राओं ने व्यावहारिक डेमो प्रस्तुत कर अपने सीखे गए कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिससे उनकी जागरूकता और आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा, “आज की लड़कियां कल का भविष्य हैं। अग्नि सुरक्षा कार्यक्रमों से वे न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगी, बल्कि आपात स्थिति में दूसरों की मदद भी कर सकेंगी। आत्मनिर्भरता महिलाओं की सबसे बड़ी शक्ति है—शांत रहें, प्रशिक्षित रहें, विजयी रहें।”
कार्यक्रम के समापन पर समाज कल्याण विभाग के मुख्य विकास अधिकारी मनोज सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निरंतरता पर जोर दिया। सभी प्रतिभागियों ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता की आवश्यकता व्यक्त की।
इस कार्यशाला ने न केवल छात्राओं को आपदा प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, सजग और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह कदम महिलाओं की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
कार्यक्रम की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया कि ऐसी पहलें युवाओं में जागरूकता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। छात्राओं ने सीखे गए कौशलों का व्यावहारिक प्रदर्शन कर न केवल अपनी सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया, बल्कि अन्य छात्राओं के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत किया।

