– छात्रों ने ग्रामीणों को बताया प्लास्टिक के दुष्प्रभाव
– सिंगल यूज़ प्लास्टिक छोड़ने का दिया संदेश
– ग्रामीणों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प
आगरा: आगरा के ग्राम देहतौरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज कार्य संस्थान द्वारा आयोजित प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान ने ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना जगाई। छात्रों ने न केवल प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, बल्कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक से दूर रहने और वैकल्पिक साधनों को अपनाने का संदेश भी दिया, जिसका सकारात्मक असर गांव में देखने को मिला।

आगरा के ग्राम देहतौरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज कार्य संस्थान की ओर से प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक प्रभावी जागरूकता अभियान चलाया गया। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम न केवल शिक्षण संस्थान की सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने का एक प्रेरणादायी उदाहरण भी बनकर सामने आया है। यह अभियान कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशन में समाज कार्य संस्थान के द्वितीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं द्वारा संचालित किया गया।
अभियान के दौरान छात्र-छात्राओं ने गांव के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों से संवाद स्थापित किया और उन्हें प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता को भी प्रभावित करता है और जल स्रोतों को प्रदूषित करता है। प्लास्टिक कचरा लंबे समय तक नष्ट नहीं होता, जिससे यह भूमि और जल दोनों के लिए स्थायी खतरा बन जाता है।
छात्रों ने यह भी जानकारी दी कि प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग पशु-पक्षियों के जीवन के लिए भी गंभीर संकट उत्पन्न कर रहा है। अक्सर जानवर प्लास्टिक को भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनकी मृत्यु तक हो जाती है। इस तरह प्लास्टिक प्रदूषण केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं के अस्तित्व के लिए भी खतरा बन चुका है।
अभियान के दौरान सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को विशेष रूप से हानिकारक बताते हुए छात्रों ने ग्रामीणों से इसे पूरी तरह से त्यागने की अपील की। उन्होंने लोगों को कपड़े और जूट के थैलों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाने की सलाह दी, जिससे पर्यावरण को संरक्षित किया जा सके।
इस जागरूकता कार्यक्रम का गांव में व्यापक और सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। ग्रामीणों ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने का संकल्प लिया। इस दौरान गांव के लोगों ने आगे भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम में छात्र प्रांशु बघेल, मोहित कुमार, विवेक बघेल, खुशी सिंह, वंदना कुमारी और रजनेश ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी छात्रों ने पूरे समर्पण और उत्साह के साथ अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी मेहनत और जागरूकता फैलाने के प्रयासों ने ग्रामीणों को प्रभावित किया और उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक बनने के लिए प्रेरित किया।
यह पहल न केवल प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है, बल्कि समाज में जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना को भी सुदृढ़ करती है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज कार्य संस्थान द्वारा किया गया यह प्रयास दर्शाता है कि यदि युवा आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाएं तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना संभव है।

