यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र में अवसरवादी के प्रश्न के चार विकल्पाें में शामिल किया पंडित शब्द
कैबिनेट मंत्री ने कहा यह समाज के लिए अपमानजनक
आगरा (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश में हाल ही में आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा में सामान्य हिंदी के प्रश्न “अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे?” को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस प्रश्न के चार विकल्पों में पंडित, अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी शामिल थे। सवाल सामने आते ही सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर विरोध शुरू हो गया।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पहले ही इस विकल्प का विरोध किया। अब राज्य सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी इस पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि “अवसर के अनुसार बदलने वाले के लिए ‘पंडित’ शब्द का विकल्प देना न तो औचित्यपूर्ण था और न ही प्रश्न से तालमेल रखता है। यह कुकृत्य किसी मानसिक विकृति से पीड़ित पेपर सेटर द्वारा जानबूझ कर किया गया प्रतीत होता है, जो हिंदू समाज की समरसता को बिगाड़ना चाहता है।”
मंत्री ने आगे कहा कि इस तरह का विकल्प न केवल सामाजिक समरसता को प्रभावित करता है, बल्कि वर्ग विशेष की संवेदनाओं को भी आहत करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि कुछ समय पूर्व इसी तरह किसी फिल्म के टाइटल को भी अपमानजनक रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसके विरोध के बाद समाज में आक्रोश फैला था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के असामाजिक कृत्यों का पता लगाने के लिए किसी शोध की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पेपर सेटिंग की प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय होती है। पेपर का परीक्षण तीन-चार चरणों में नहीं होता ताकि प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना कम रहे। योगेंद्र उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि ऐसे पेपर सेटर को शीघ्र दंडित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी समाज के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने से लोग बचें। उनका कहना था कि यह केवल एक परीक्षा प्रश्न नहीं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और सम्मान बनाए रखने का मुद्दा है।
इस मामले में परीक्षा आयोग और संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि दोषी पेपर सेटर को चिन्हित कर कठोर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसे विवादों को रोका जा सके। इस विवाद ने परीक्षा और पेपर सेटिंग प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा इसे गंभीरता से लिया जा रहा है और सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि भविष्य में इस प्रकार के अपमानजनक विकल्प परीक्षा में शामिल नहीं किए जाएं।

