मथुरा। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू 19 मार्च से 21 मार्च तक मथुरा और वृंदावन में तीन दिवसीय आध्यात्मिक दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह वृंदावन के प्रमुख मंदिरों के दर्शन करेंगी और गोवर्धन की 21 किलोमीटर लंबी गोल्फ कार्ट से परिक्रमा करेंगी। यह राष्ट्रपति का वृंदावन का दूसरा दौरा है और वह भारत की तीसरी राष्ट्रपति हैं जो वृंदावन आएंगी।

राष्ट्रपति 19 मार्च को अयोध्या से रवाना होकर आगरा एयरपोर्ट पहुंचेंगी। यहां से सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा मथुरा कैंट स्थित आर्मी हैलीपेड पर उतरने के बाद राष्ट्रपति का काफिला वृंदावन के लिए रवाना होगा। शाम करीब 5 बजे राष्ट्रपति वृंदावन पहुंचेंगी और एक पांच सितारा होटल में रुकने के बाद इस्कॉन और प्रेम मंदिर में दशर्न करेंगी। इन मंदिरों में वे भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण को अनुभव करेंगी।

20 मार्च को राष्ट्रपति संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम केलि कुंज जाएंगी, जहां करीब 30 मिनट तक संत से आध्यात्मिक चर्चा करेंगी और जीवन में आध्यात्मिकता के महत्व पर विचार साझा करेंगी। इसके बाद होटल लौटकर कुछ समय रुकने के बाद वह परिक्रमा मार्ग स्थित नीम करौरी बाबा आश्रम और स्वामी श्री पूर्णानंद तीर्थ ट्रस्ट उड़िया बाबा के स्थान का दौरा करेंगी। दोपहर में राष्ट्रपति राम कृष्ण मिशन हॉस्पिटल में कैंसर Oncology डिपार्टमेंट का लोकार्पण करेंगी और देर शाम साध्वी ऋतंभरा के आश्रम वात्सल्य ग्राम जाएंगी।
21 मार्च को राष्ट्रपति गोवर्धन के लिए रवाना होंगी। वह दानघाटी मंदिर में पूजा और दर्शन करेंगी, उसके बाद गोल्फ कार्ट से गिरिराज जी की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करेंगी। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद राष्ट्रपति दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी। प्रशासन ने इस दौरे के लिए सड़कों की साफ-सफाई, सजावट और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित की है।
इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पहली बार 25 सितंबर 2025 को वृंदावन आईं थीं। इससे पहले निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी दो-दो बार वृंदावन का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा, पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी वृंदावन पधारे थे।
राष्ट्रपति का यह तीन दिवसीय आध्यात्मिक दौरा स्थानीय प्रशासन, धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं के सहयोग से संपन्न होगा। यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं के सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। इस दौरे के माध्यम से राष्ट्रपति न केवल आध्यात्मिक केंद्रों का दर्शन करेंगी, बल्कि स्थानीय धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से संवाद कर आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश भी फैलाएंगी।

