-लक्ष्मी नगर खेत से घायल सारस को किया गया रेस्क्यू, पंख में गंभीर चोट
-सेना छावनी क्षेत्र से मिला फ्लेमिंगो, गर्मी और डिहाइड्रेशन से था पीड़ित
-वाइल्डलाइफ एसओएस की ट्रांजिट फैसिलिटी में दोनों पक्षियों का चल रहा उपचार
मथुरा। उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त रैपिड रिस्पांस टीम ने मथुरा में दो महत्वपूर्ण और संकटग्रस्त पक्षियों एक सारस क्रेन और एक फ्लेमिंगो को अलग-अलग स्थानों से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है। दोनों पक्षियों को वर्तमान में वाइल्डलाइफ एसओएस की ट्रांजिट फैसिलिटी में इलाज और देखभाल प्रदान की जा रही है।

पहला मामला मथुरा के लक्ष्मी नगर स्थित एक खेत का है, जहां किसानों ने एक सारस क्रेन को संकटग्रस्त अवस्था में देखा और तुरंत वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम को मौके पर बुलाया। रेस्क्यू टीम ने पाया कि पक्षी गंभीर रूप से घायल था और उसका दाहिना पंख खेत में लगी तार की फेंसिंग में फंसने के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

टीम ने सावधानीपूर्वक पक्षी को सुरक्षित रेस्क्यू कर उपचार के लिए भेजा। फिलहाल सारस का इलाज जारी है और उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है, हालांकि पंख की हड्डी को गंभीर नुकसान होने के कारण उपचार लंबा चल सकता है। विशेषज्ञों द्वारा यह तय किया जाएगा कि पूरी तरह ठीक होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सकता है या नहीं।

दूसरी घटना मथुरा के सेना छावनी क्षेत्र की है, जहां एक फ्लेमिंगो (राजहंस) उड़ने में असमर्थ अवस्था में पाया गया। सेना कर्मियों ने तुरंत पक्षी को वन विभाग के कार्यालय पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे वाइल्डलाइफ एसओएस के अस्पताल भेजा गया। जांच में पाया गया कि पक्षी किसी बाहरी चोट से पीड़ित नहीं था, लेकिन अत्यधिक गर्मी और डिहाइड्रेशन के कारण उसकी हालत गंभीर हो गई थी। वर्तमान में फ्लेमिंगो को विशेष देखभाल दी जा रही है, जिसमें पर्याप्त पानी, पोषण और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पक्षी अभी छोटा है और उसे पूरी तरह स्वस्थ होने तक गहन निगरानी में रखा जाएगा।
सारस क्रेन (Sarus Crane) दुनिया का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी माना जाता है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। यह भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है। वहीं फ्लेमिंगो (Greater Flamingo) भी पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेषकर वेटलैंड क्षेत्रों के संरक्षण में।
कार्तिक सत्यनारायण, सह-संस्थापक और सीईओ वाइल्डलाइफ एसओएस ने इस घटना पर कहा कि इन दोनों संकटग्रस्त पक्षियों का रेस्क्यू वन विभाग, किसान समुदाय और सेना के त्वरित सहयोग से संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि यह मानव और वन्यजीवों के बीच सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के निदेशक (कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स) बैजू राज एम.वी. ने कहा कि इस तरह के रेस्क्यू अभियान यह साबित करते हैं कि यदि समाज का हर वर्ग समय पर जिम्मेदारी निभाए, तो कई अनमोल जीवन बचाए जा सकते हैं। उन्होंने किसानों, सेना और वन विभाग की तत्परता की सराहना की।
यह पूरा रेस्क्यू अभियान वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता और सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मानव प्रयासों से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है और जैव विविधता को संरक्षित रखा जा सकता है।
