आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के समाज कार्य विभाग द्वारा मिढ़ाकुर गांव में चलाया गया जागरूकता अभियान दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

इस अभियान के जरिए ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले दिव्यांग व्यक्तियों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और मतदान के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, जिससे उनमें आत्मविश्वास और जागरूकता दोनों का संचार हुआ।
यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. आशु रानी के दिशानिर्देशन में तथा समन्वयक क्षेत्र कार्य डॉ. राजीव वर्मा के नेतृत्व में आयोजित किया गया। समाज कार्य विभाग के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए गांव में घर-घर जाकर लोगों से संवाद स्थापित किया और दिव्यांगजनों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। इनमें दिव्यांग पेंशन, छात्रवृत्ति, यात्रा रियायत, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आर्थिक सहायता योजनाएं शामिल रहीं।
छात्रों ने ग्रामीणों को यह भी समझाया कि यदि दिव्यांगजन इन योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाते हैं तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं और अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया और उसके लाभों के बारे में भी जानकारी दी गई, जिससे वे सरकारी सुविधाओं तक आसानी से पहुंच बना सकें।
अभियान के दौरान विशेष जोर दिव्यांगजनों के संवैधानिक अधिकारों पर दिया गया। विद्यार्थियों ने उन्हें मतदान के अधिकार के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से होती है। उन्होंने दिव्यांगजनों से आगामी चुनावों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की और बताया कि उनका वोट भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी अन्य नागरिक का।
ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता अभियान न केवल जानकारी बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में बराबरी और सम्मान की भावना को भी मजबूत करते हैं। कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि उन्हें पहली बार इतनी विस्तृत जानकारी एक साथ मिली है, जिससे वे अब योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित हुए हैं।
इस अभियान में शुभम कुमार, सार्थक गोयल, पार्थ भदौरिया, प्रशांत सोलंकी, सूरज सोलंकी, गोविंद सिंह, सुधा चौधरी, हिमांशु सोलंकी, अक्षय दुबे और राधा रानी की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया।
यह पहल न केवल समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि युवा शक्ति यदि जागरूक और प्रतिबद्ध हो, तो वह समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है।

