- प्रशिक्षण में छात्राओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
- खाद्य प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों की जानकारी
- स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान संस्थान में खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण को लेकर 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य छात्राओं के साथ-साथ जरूरतमंद महिलाओं को व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का 13वां दिन बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। “स्मार्ट प्रिज़र्वेशन फॉर हेल्दी लिविंग” विषय पर आधारित यह प्रशिक्षण गृह विज्ञान संस्थान के खाद्य एवं पोषण विभाग तथा महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सरकारी फूड साइंस ट्रेनिंग सेंटर, आगरा का भी सहयोग मिल रहा है।
इस कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशन में किया जा रहा है, जबकि गृह विज्ञान संस्थान की निदेशक प्रो. अचला गक्खर और प्रो. अर्चना सिंह के मार्गदर्शन में इसे प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी सुपरवाइजर तारा सिंह द्वारा संभाली जा रही है।
कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें केवल छात्राओं को ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे वे खाद्य प्रसंस्करण की तकनीकों को सीखकर अपने लिए रोजगार के अवसर तैयार कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फल एवं सब्जियों के संरक्षण और प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया। इसमें विशेष रूप से मिक्स्ड जैम, स्क्वैश, शरबत, अचार, नवरत्न चटनी, सैजवान चटनी जैसे उत्पादों को तैयार करने की विधियां सिखाई गईं।
इसके साथ ही निर्जलित उत्पादों के अंतर्गत पापड़, चिप्स और सहजन (मोरिंगा) की पत्तियों से बनने वाले उत्पादों का भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ को बढ़ाया जा सकता है और उनकी पोषण गुणवत्ता को बनाए रखते हुए सुरक्षित भंडारण किया जा सकता है।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने स्वच्छता, सुरक्षा और वैज्ञानिक तरीकों के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों को बताया गया कि सही तकनीक अपनाकर न केवल खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि उन्हें बाजार में बेचकर आय का स्रोत भी बनाया जा सकता है। इससे ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
गृह विज्ञान संस्थान की निदेशक प्रो. अचला गक्खर ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्राओं के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
समन्वयक प्रो. अर्चना सिंह ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास को बढ़ावा देते हैं, जिससे प्रतिभागी अपने जीवन में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. दीप्ति सिंह ने “स्मार्ट प्रिज़र्वेशन फॉर हेल्दी लिविंग” की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखते हुए उनके पोषक तत्वों को संरक्षित किया जा सकता है। सह-संयोजक डॉ. अनुपमा गुप्ता ने भी खाद्य संरक्षण तकनीकों को दैनिक जीवन में अत्यंत उपयोगी बताया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 50 छात्राओं एवं महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विभिन्न तकनीकों को सीखते हुए अपने कौशल को निखारा। इस अवसर पर डॉ. संगमित्रा गौतम, डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. नेहा सक्सेना, डॉ. प्रिया यादव, डॉ. प्रीति यादव एवं सुश्री नेहा अग्रवाल सहित कई शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेकर इसे अपने लिए उपयोगी बताया और इस प्रकार के कार्यक्रमों को भविष्य में भी जारी रखने की आवश्यकता जताई।

