आगरा। मिढ़ाकुर ग्राम क्षेत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के छात्र-छात्राओं ने नशा मुक्त भारत जागरुकता अभियान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का संचालन कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में एवं सहायक आचार्य एवं क्षेत्र कार्य समन्वयक डॉ. राजीव वर्मा के निर्देशन में किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों में नशा सेवन के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में छात्रों ने ग्रामीणों को नशा सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय लोगों को सतर्क करते हुए यह संदेश दिया कि नशा केवल व्यक्ति का स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए खतरा है। छात्रों ने ग्रामीणों को बताया कि नशा मुक्त जीवन स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक समरसता के लिए आवश्यक है।
इस अभियान में छात्रों ने पैम्फलेट वितरण, बैनर प्रदर्शन और लोक संवाद जैसे तरीकों से ग्रामीणों तक संदेश पहुँचाया। उन्होंने व्यक्तिगत बातचीत के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया और उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने कई प्रश्नोत्तरी और संक्षिप्त सत्र आयोजित किए, जिसमें ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई।
अभियान में सभी पुलिस कर्मियों का भी सहयोग रहा। इसमें पुलिसकर्मी शुभम कुमार, सार्थक गोयल, सूरज सोलंकी, हमांशु सोलंकी, गोविंद सिंह, पार्थ भदौरिया, प्रशांत सोलंकी, सुधा चौधरी, राधा रानी, सौरव और अक्षय दुबे शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को नशे के खिलाफ सतर्क रहने और कानूनी प्रवधानों के बारे में जानकारी दी। छात्रों और पुलिस की संयुक्त सक्रियता ने अभियान को और प्रभावशाली बनाया।
डॉ. राजीव वर्मा ने बताया कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ग्रामीणों को नशा मुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना भी उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति का इस प्रकार समाज में योगदान बेहद महत्वपूर्ण है और यह भविष्य में भी जारी रहेगा।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने छात्रों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नशा मुक्त भारत की दिशा में ऐसी गतिविधियां समाज के लिए मिसाल पेश करती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय और पुलिस के सहयोग की भी प्रशंसा की और कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही नशा मुक्त समाज का निर्माण संभव है।
छात्रों ने ग्रामीणों को नशा मुक्त रहने के लिए कुछ सुझाव भी दिए, जिसमें स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, शिक्षा पर ध्यान देना और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना शामिल है। अभियान में शामिल छात्रों ने यह संदेश दिया कि नशा न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी प्रभावित करता है।
इस जागरुकता अभियान से मिढ़ाकुर ग्राम क्षेत्र में नशा सेवन के प्रति चेतना बढ़ी है और स्थानीय लोग नशा छोड़ने और अपने जीवन को स्वस्थ दिशा में ले जाने के लिए प्रेरित हुए हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के इस पहल को ग्रामीण समुदाय और प्रशासन दोनों ने सराहा।
अभियान में शामिल छात्रों में शुभम कुमार, सार्थक गोयल, सूरज सोलंकी, हमांशु सोलंकी, गोविंद सिंह, पार्थ भदौरिया, प्रशांत सोलंकी, सुधा चौधरी, राधा रानी, सौरव और अक्षय दुबे ने सक्रिय भूमिका निभाई और ग्रामीणों को नशा मुक्त जीवन के प्रति जागरूक किया। इस अभियान ने यह संदेश स्पष्ट किया कि शिक्षा, जागरूकता और पुलिस-सामाजिक सहभागिता के माध्यम से ही नशा मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है।

