आगरा। सभी नागरिकों की आभा आईडी बनाई जाएगी और इससे मरीज के इलाज से जुड़ा पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत इसी विषय पर आगरा और अलीगढ़ मंडल की मंडलीय कार्यशाला शुक्रवार को फतेहाबाद रोड स्थित होटल सौरा में आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक रितु माहेश्वरी ने की।

कार्यशाला में बताया गया कि वर्ष 2022 से प्रदेश के सभी नागरिकों की डिजिटल स्वास्थ्य आईडी ‘आभा आईडी’ (आयुष्मान भारत डिजिटल आईडी) बनाने का कार्य चल रहा है। नागरिक स्वयं आभा एप के माध्यम से या अपने नजदीकी चिकित्सालय में जाकर आभा आईडी बनवा सकते हैं। आशा, एएनएम और सीएचओ द्वारा भी आभा आईडी बनाई जा रही है। जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज में पंजीकरण के समय भी मरीजों की आभा आईडी बनाई जा रही है।

आभा आईडी से जुड़े हुए हेल्थ रिकॉर्ड जैसे जांच, इलाज और उपचार से संबंधित सभी जानकारियां एक ही स्थान पर हमेशा के लिए सुरक्षित रहेंगी। इसके माध्यम से किसी भी समय और किसी भी स्थान पर मरीज अपने स्वास्थ्य से संबंधित पूरी जानकारी और पहले कराए गए इलाज का इतिहास देख सकता है। कार्यशाला के दौरान आगरा और अलीगढ़ मंडल के जिलों में आभा आईडी बनने की प्रगति की जनपदवार समीक्षा भी की गई।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की निदेशक रितु माहेश्वरी ने मंडलीय कार्यशाला में बताया कि प्रदेश के सभी नागरिकों की आभा आईडी बनाना लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों के हेल्थ फैसिलिटी रजिस्टर (एचएफआर), स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की यूनिक हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर), पर्सनल हेल्थ रजिस्ट्री (पीएचआर) और हेल्थ इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचआईएस) समेत पांच प्रमुख घटक मिलकर एक डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करते हैं। इसके माध्यम से मरीज अपनी आभा आईडी से जुड़ा स्वास्थ्य रिकॉर्ड देख सकता है और अपनी सहमति के आधार पर आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़े किसी भी चिकित्सा संस्थान के साथ उसे साझा कर सकता है। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली में मरीज का डाटा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगा।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के संयुक्त निदेशक डॉ. मोहित सिंह ने डिजिटल प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य से संबंधित डाटा ऑनलाइन रूप में आभा आईडी से लिंक रहेगा और पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इसमें किसी प्रकार की एडिटिंग संभव नहीं होगी। इससे मरीजों को भौतिक रूप से पर्ची, रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज साथ लेकर चलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
कार्यशाला में आगरा के जिलाधिकारी अरविन्द मलप्पा बंगारी, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आगरा मंडल तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अलीगढ़ डॉ. मोहन झा, जिला चिकित्सालय आगरा के एसआईसी डॉ. राजेंद्र अरोड़ा, जनपद मैनपुरी, फिरोजाबाद, मथुरा, अलीगढ़, एटा, कासगंज और हाथरस के मुख्य चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा डॉ. ऋषि गोपाल, डॉ. सुरेंद्र मोहन, कुलदीप भारद्वाज, पंकज जायसवाल, शैलेन्द्र शर्मा, दिलीप सहित दोनों मंडलों के प्रमुख निजी चिकित्सकों ने भी कार्यशाला में भाग लिया। कार्यक्रम में आईएमए फिरोजाबाद की अध्यक्ष डॉ. पूनम अग्रवाल, आगरा के डॉ. अंकुर बंसल तथा मंडल के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधीक्षक भी मौजूद रहे। मंच संचालन डिप्टी सीएमओ डॉ. पीयूष जैन ने किया।

