आगरा। जांच समिति ने भावनात्मक समझ, विवाद प्रबंधन और विभागीय तालमेल का प्रशिक्षण देने की सिफारिश की, रिपोर्ट मुख्यालय भेजी
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर से मारपीट के मामले में गठित विशेषज्ञ जांच समिति ने आरपीएफ के चार कर्मियों को दोषी माना है। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट रेलवे मुख्यालय भेज दी है। रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आरपीएफ कर्मियों को भावनात्मक समझ, विवाद प्रबंधन और विभागीय तालमेल का प्रशिक्षण देने की सिफारिश की गई है। तनावपूर्ण परिस्थितियों में संयम बनाए रखने और दूसरे विभागों के कर्मचारियों के साथ बेहतर तालमेल के लिए प्रशिक्षण को जरूरी बताया गया है। यह जानकारी शुक्रवार को सामने आई पीटीआई की रिपोर्ट में दी गई है।

जांच समिति के निष्कर्ष के अनुसार, ड्यूटी के दौरान उत्पन्न होने वाले मतभेद को टकराव में बदलने से रोकने के लिए कर्मचारियों में व्यवहारिक और भावनात्मक समझ विकसित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से आरपीएफ कर्मियों के प्रशिक्षण में भावनात्मक समझ और तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने से जुड़े पहलुओं को शामिल करने की सिफारिश की गई है। इससे कर्मचारियों को विपरीत परिस्थितियों में संयम बनाए रखने और विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाने में मदद मिल सकेगी।
समिति ने विवाद प्रबंधन को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने की सिफारिश की है। रेलवे स्टेशन पर परिचालन, वाणिज्य, सुरक्षा और अन्य विभागों के कर्मचारी एक साथ काम करते हैं। अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच ड्यूटी के दौरान मतभेद की स्थिति बन सकती है। समिति के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में विवाद को बढ़ने से रोकने और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए कर्मचारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बेहतर करने की आवश्यकता भी बताई गई है। स्टेशन पर परिचालन व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात आरपीएफ के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। समिति की सिफारिशों का उद्देश्य ड्यूटी के दौरान होने वाले मतभेदों का समय रहते समाधान करना और उन्हें टकराव में बदलने से रोकना है।
मामले की जांच कई चरणों में हुई। घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने विभागीय स्तर पर जांच शुरू की थी। जांच समिति में बदलाव के बाद नई समिति गठित की गई। तीसरी बार गठित तीन सदस्यीय समिति में वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (ऑपरेशन) और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (आरपीएफ) को शामिल किया गया था। समिति को मामले की जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की और इसे रेलवे मुख्यालय भेज दिया।
घटना के बाद आरपीएफ के चार कर्मियों को निलंबित किया गया था। इनमें दो एएसआई और दो कांस्टेबल शामिल हैं। मामले में विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर की तहरीर पर जीआरपी कैंट थाने में आरपीएफ के चार नामजद कर्मियों समेत अन्य स्टाफ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जीआरपी के अनुसार, प्राथमिकी में आरपीएफ के एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिसन सिंह, कांस्टेबल बदन सिंह और कांस्टेबल जितेंद्र कुमार समेत अन्य आरपीएफ कर्मियों को आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 151(2), 115(2), 351(2) और 352 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इस कार्रवाई के बाद मामला विभागीय जांच के साथ कानूनी जांच के दायरे में भी रहा।
मामले को लेकर डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर ने रेलवे अधिकारियों के सामने अपना पक्ष भी रखा था। घटना के विरोध में वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ डीआरएम कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। बैठक में उन्होंने संबंधित आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई, मुकदमा दर्ज करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग रखी थी। उनकी पत्नी ने भी घटना को लेकर कार्रवाई की मांग की थी।
बैठक के दौरान फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर भी पहुंचे थे। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए रेलवे प्रशासन से दोषी आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की थी। साथ ही संबंधित कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग भी रखी थी। बैठक में रेलवे और आरपीएफ के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे थे।
गौरतलब है कि 12 जुलाई 2026 को आगरा कैंट स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर और आरपीएफ कर्मियों के बीच विवाद हुआ था। आरोप है कि विवाद के दौरान उनके साथ मारपीट और अभद्रता की गई तथा उन्हें घसीटकर आरपीएफ थाने ले जाया गया। घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आरपीएफ के चार कर्मियों को निलंबित किया था। इसके बाद मामले की जांच के लिए अंतर-विभागीय समिति गठित की गई। समिति में कई बार बदलाव हुआ और तीसरी बार तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। इसी समिति ने जांच पूरी कर चार आरपीएफ कर्मियों को दोषी माना और अपनी रिपोर्ट रेलवे मुख्यालय भेज दी।
