आगरा। ताजमहल की वैश्विक पहचान और शहर की पर्यटन क्षमता को आधार बनाकर आगरा को देश की नई वेडिंग कैपिटल के रूप में विकसित करने पर वेडिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन-यूपी इंडिया के समिट में मंथन हुआ। होटल ट्राइडेंट में आयोजित परिचर्चा में वेडिंग प्लानर, डेकोरेटर, कैटरर्स, टूर एंड ट्रेवल्स तथा वेन्यू ओनर्स समेत इंडस्ट्री से जुड़े स्टेकहोल्डर्स ने वेडिंग टूरिज्म को पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि एक डेस्टिनेशन वेडिंग से 300 से 500 पर्यटक तीन दिन तक शहर में रुक सकते हैं, जिससे 25 से अधिक स्थानीय कारोबारों और 200 से ज्यादा परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। एसोसिएशन ने यूपी टूरिज्म पॉलिसी में वेडिंग टूरिज्म के लिए अलग कैटेगरी और सिंगल विंडो परमिशन सिस्टम लागू करने की मांग भी उठाई।

होटल ट्राइडेंट, आगरा में आयोजित परिचर्चा का विषय ‘वेडिंग टूरिज्म-भारतीय पर्यटन की नई शक्ति’ रखा गया, जबकि मुख्य थीम ‘वेडिंग सेक्टर-भारतीय पर्यटन विकास का एक मजबूत स्तंभ’ रही। कार्यक्रम का उद्देश्य विवाह आयोजनों को केवल पारिवारिक समारोह के बजाय पर्यटन, आतिथ्य, स्थानीय व्यापार और रोजगार को गति देने वाले व्यापक आर्थिक अवसर के तौर पर देखने पर विचार करना रहा। आगरा में ताजमहल के कारण पहले से मौजूद अंतरराष्ट्रीय पर्यटक पहचान को डेस्टिनेशन वेडिंग की संभावनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
समारोह का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान वरिष्ठ उद्यमी, समाजसेवी और राष्ट्रीय चिंतक पूरन डाबर, वेडिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल रावी, होटल ट्राइडेंट के महाप्रबंधक युवराज सिंह नेगी, संगठन के महासचिव संदीप उपाध्याय, उपाध्यक्ष सौरभ सिंघल, पंकज गोयल, मनीष सिंघल, तरुण अग्रवाल, संरक्षक राजेश गोयल और संजय अग्रवाल प्रमुख रूप से मौजूद रहे। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई और इसके बाद वक्ताओं ने विवाह पर्यटन के मौजूदा परिदृश्य तथा आगरा की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता पूरन डाबर ने कहा कि वेडिंग इंडस्ट्री अब केवल आयोजन कराने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा इंजन बन चुकी है। उनके अनुसार भारत की वेडिंग इंडस्ट्री लगभग सात से आठ लाख करोड़ रुपये की है। उन्होंने कहा कि आगरा के पास ताजमहल जैसा वैश्विक प्रेम का प्रतीक मौजूद है, इसलिए शहर को वेडिंग टूरिज्म के बड़े हब के रूप में विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। ताजमहल की अंतरराष्ट्रीय पहचान को विवाह आयोजनों से जोड़कर आगरा को देश-विदेश के लोगों के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
संगठन के महासचिव संदीप उपाध्याय ने वेडिंग टूरिज्म के व्यापक आर्थिक प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सामान्य शादी में दो परिवार जुड़ते हैं, लेकिन डेस्टिनेशन वेडिंग होने पर इसका दायरा काफी बड़ा हो जाता है और पूरा शहर तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था इससे जुड़ती है। उनके मुताबिक विवाह समारोह के लिए बाहर से आने वाले मेहमानों को ठहरने, भोजन, यात्रा, सजावट, मनोरंजन, खरीदारी और अन्य सेवाओं की आवश्यकता होती है। इससे आयोजन से जुड़े अनेक छोटे-बड़े कारोबारों को काम मिलता है और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।
होटल इंडस्ट्री विशेषज्ञ और होटल ट्राइडेंट के महाप्रबंधक युवराज सिंह नेगी ने कहा कि आगरा पर्यटन के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। शहर में मौजूद होटल प्रॉपर्टीज पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आगरा के पर्यटन को बढ़ावा देने में भूमिका निभा रही हैं। आने वाले समय में कई नए होटल आगरा में आने वाले हैं, जो पर्यटन विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार को थोड़ा और ध्यान देने की आवश्यकता है। उनके अनुसार होटल इंडस्ट्री को वेडिंग सेक्टर से आर्थिक बूस्टर डोज मिलता है, क्योंकि बड़े विवाह आयोजनों में कमरे, बैंक्वेट, खानपान और अन्य आतिथ्य सेवाओं की मांग एक साथ बढ़ जाती है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल रावी ने कहा कि परिचर्चा में वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर्स एक मंच पर मौजूद रहे। वेडिंग प्लानर, डेकोरेटर, कैटरर्स, टूर एंड ट्रेवल्स तथा वेन्यू ओनर्स के साथ इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि आगरा के साथ उत्तर प्रदेश और पूरे भारत को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में किस तरह प्रमोट किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत के मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की विशेष पहचान है और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर आगरा का अपना अलग स्थान है। इस पहचान को समझते हुए ऐतिहासिक स्मारकों को पर्यटन और विवाह आयोजनों के साथ जोड़ने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
मनीष अग्रवाल रावी ने कहा कि आगरा की ऐतिहासिक विरासत शहर की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। ताजमहल के साथ यहां मौजूद अन्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी डेस्टिनेशन वेडिंग की ब्रांडिंग में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि संगठन आगामी 21 और 22 सितंबर को एक बड़ा आयोजन करने जा रहा है, जिसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले आयोजन के माध्यम से भी वेडिंग सेक्टर से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने और इस उद्योग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
परिचर्चा में चार प्रमुख विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इनमें ‘Wedding = Tourism Growth’, ‘Hotels & Hospitality’, ‘Local Economy Boost’ और ‘Future Roadmap’ शामिल रहे। वक्ताओं ने इन सभी पहलुओं को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि विवाह पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवल आयोजन स्थलों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। इसके लिए होटल, परिवहन, पर्यटन स्थल, खानपान, सजावट, मनोरंजन, स्थानीय बाजार और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को एक समन्वित ढांचे में विकसित करना होगा।
विशेषज्ञों ने बताया कि एक डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए 300 से 500 पर्यटक तीन दिन तक आगरा में ठहर सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मेहमानों के आने से होटल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के अलावा स्थानीय परिवहन, कैटरिंग, डेकोरेशन, इवेंट मैनेजमेंट, पर्यटन सेवाओं और बाजार को भी सीधा लाभ मिल सकता है। चर्चा के अनुसार ऐसे आयोजन 25 से अधिक स्थानीय कारोबारों को काम देने की क्षमता रखते हैं और 200 से ज्यादा परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार का अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। इससे शहर में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।
बैठक में आगरा के स्थानीय उत्पादों को डेस्टिनेशन वेडिंग से जोड़ने का सुझाव भी सामने आया। वक्ताओं ने कहा कि शहर का पेठा, मार्बल हैंडीक्राफ्ट और जरी वर्क विवाह समारोहों में गिफ्ट आइटम के रूप में प्रमोट किया जा सकता है। बाहर से आने वाले मेहमानों को स्थानीय उत्पाद उपलब्ध कराने से उन्हें आगरा की विशिष्ट पहचान से परिचित कराया जा सकेगा और स्थानीय कारीगरों तथा कारोबारियों को भी बाजार मिल सकेगा। इस तरह विवाह समारोह केवल होटल या आयोजन स्थल तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी आर्थिक गतिविधियां पहुंचेंगी।
एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश सरकार के सामने वेडिंग टूरिज्म को लेकर नीतिगत मांग भी रखी। संगठन का कहना है कि यूपी टूरिज्म पॉलिसी में वेडिंग टूरिज्म को अलग कैटेगरी बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही विभिन्न विभागों से अनुमति लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो परमिशन सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। संगठन का मानना है कि यदि आयोजन से संबंधित अनुमतियां एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से मिलेंगी तो डेस्टिनेशन वेडिंग आयोजित करने वालों के लिए प्रक्रिया सरल होगी और आगरा समेत प्रदेश के अन्य पर्यटन शहरों को भी इसका लाभ मिलेगा।
चर्चा में यह भी सामने आया कि वेडिंग टूरिज्म को विकसित करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। होटल, आयोजन स्थल, ट्रैवल एजेंसियां, कैटरिंग कंपनियां, डेकोरेटर्स और वेडिंग प्लानर्स अपने-अपने स्तर पर सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, लेकिन इन सभी को एक साझा पर्यटन रणनीति के तहत जोड़ने से बड़ा प्रभाव पैदा किया जा सकता है। आगरा जैसे शहर में पर्यटन की मौजूदा मांग के साथ विवाह आयोजनों को जोड़कर पूरे साल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ।
कार्यक्रम में होटल ताज व्यू के जनरल मैनेजर शांतनु बोस भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में एक्सपर्ट इवेंट्स के सिंह के साथ हर्ष सिसोदिया, संदीप सिकरवार, मुकेश गौतम, दिलीप गुप्ता, विपिन गुप्ता, शिखा जैन, आशीष अरोड़ा, अजीत बंसल, मानवेंद्र जादौन, प्रियंका तिवारी, रिया शर्मा, विमल गोयल और कमलप्रीत सिंह शैंकी सहित अनेक लोग शामिल रहे। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम में वेडिंग और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की व्यापक भागीदारी को दर्शाया।
परिचर्चा में शामिल कारोबारियों और विशेषज्ञों ने माना कि बदलती पर्यटन अर्थव्यवस्था में डेस्टिनेशन वेडिंग एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभर रही है। भारत की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्थलों, होटल सुविधाओं और विविध परंपराओं के कारण देश विदेशी तथा घरेलू दोनों तरह के आयोजनों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। आगरा के संदर्भ में ताजमहल की लोकप्रियता इस अवसर को और मजबूत आधार देती है। जरूरत इस बात की है कि शहर की मौजूदा सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित कर विवाह आयोजनों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाओं और सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
वक्ताओं ने स्थानीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में भी वेडिंग टूरिज्म की भूमिका पर जोर दिया। उनका कहना था कि किसी बड़े आयोजन में केवल होटल और बैंक्वेट हॉल ही सक्रिय नहीं होते, बल्कि परिवहन से लेकर फूल, सजावट, कपड़े, उपहार, फोटोग्राफी, मनोरंजन, खानपान और खरीदारी तक अनेक क्षेत्रों में मांग पैदा होती है। यदि इन सभी सेवाओं को आगरा की पर्यटन पहचान के साथ जोड़ा जाए तो शहर के छोटे कारोबारियों और सेवा प्रदाताओं को भी लाभ मिल सकता है।
कार्यक्रम के दौरान आगरा को देश की नई वेडिंग कैपिटल के रूप में विकसित करने की संभावना पर भी विचार हुआ। ताजमहल के कारण शहर पहले से ही प्रेम और पर्यटन की वैश्विक पहचान रखता है। इसी छवि को विवाह समारोहों के अनुभव से जोड़कर नई ब्रांडिंग तैयार करने पर जोर दिया गया। इसके लिए ऐतिहासिक स्थलों, होटल सुविधाओं, स्थानीय उत्पादों और पेशेवर वेडिंग सेवाओं को एक पैकेज के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में काम करने की जरूरत बताई गई।
समारोह का संचालन महासचिव संदीप उपाध्याय ने किया। उन्होंने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए वक्ताओं और प्रतिभागियों के विचारों को मंच प्रदान किया। धन्यवाद ज्ञापन अनिल सविता ने किया। कार्यक्रम में मौजूद स्टेकहोल्डर्स ने परिचर्चा को वेडिंग सेक्टर के लिए उपयोगी मंच बताया और आगरा को डेस्टिनेशन वेडिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए आगे भी सामूहिक प्रयास जारी रखने की आवश्यकता जताई।
होटल ट्राइडेंट में हुई इस परिचर्चा ने आगरा के पर्यटन क्षेत्र के सामने विवाह उद्योग को नए आर्थिक अवसर के रूप में देखने की दिशा में चर्चा को आगे बढ़ाया। संगठन की ओर से 21-22 सितंबर को प्रस्तावित बड़े आयोजन को लेकर भी क्षेत्र से जुड़े लोगों में उत्सुकता है। समिट में उठाए गए नीतिगत सुझाव, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, होटल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की भूमिका तथा रोजगार की संभावनाएं इस बात की ओर संकेत करती हैं कि यदि सरकारी सहयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी एक साथ आगे बढ़े तो आगरा डेस्टिनेशन वेडिंग के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
