आगरा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर नहीं मेडिकल बूथ की सुविधा, प्रस्ताव फाइलों में कैद
आगरा। आगरा मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिलना आसान नहीं है। आगरा कैंट, आगरा फोर्ट, ईदगाह और राजामंडी जैसे प्रमुख स्टेशनों पर मेडिकल बूथ की सुविधा नहीं है। पिछले चार महीनों में 2,189 यात्रियों ने चिकित्सकीय सहायता मांगी। इनमें से 496 यात्रियों को समय पर मदद नहीं मिल सकी। रेलवे का कहना है कि इन यात्रियों ने बाद में उपलब्ध कराई गई चिकित्सकीय सहायता लेने से इन्कार कर दिया था। वहीं, हाल में दो यात्रियों की इलाज के दौरान मौत की घटनाओं ने रेलवे की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे अधिक यात्रियों की आवाजाही वाले आगरा कैंट स्टेशन पर भी मेडिकल बूथ नहीं है। ए-वन श्रेणी का दर्जा प्राप्त इस स्टेशन को रेलवे विश्वस्तरीय यात्री सुविधाओं से लैस होने का दावा करता है। इसके बावजूद यहां अचानक बीमार पड़ने वाले यात्रियों के लिए डॉक्टर की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित नहीं है। पिछले महीने आगरा कैंट स्टेशन पर एक पर्यटक अचानक बेहोश होकर गिर गया था। उसके साथ आए लोगों ने पानी डालकर किसी तरह उसे होश में लाने का प्रयास किया। ऐसी स्थिति में यदि यात्री को गंभीर चिकित्सकीय समस्या हो तो स्टेशन पर तत्काल प्राथमिक उपचार की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह सवाल खड़ा होता है।
ईदगाह में यात्री की मौत के बाद उठे सवाल
हाल ही में ईदगाह स्टेशन पर अवध एक्सप्रेस में एक यात्री की मौत हो गई थी। यात्री के बेटे ने रेलवे के सहायता नंबर पर तत्काल डॉक्टर उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसके बावजूद समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी। घटना के बाद स्टेशन पर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे ।
इसी तरह 10 अगस्त को नई दिल्ली से चेन्नई जा रही तमिलनाडु एक्सप्रेस में यात्रा कर रही केरल की 57 वर्षीय महिला यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। महिला को बेचैनी होने पर उसके परिजनों ने रेल मदद के माध्यम से चिकित्सकीय सहायता मांगी। परिजनों के अनुसार करीब दो घंटे बाद चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो सकी। महिला को उपचार के लिए आगरा कैंट स्टेशन पर उतारकर अस्पताल ले जाया गया। बाद में एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने भी ट्रेन और स्टेशन पर तत्काल चिकित्सा सुविधा की जरूरत को सामने ला दिया।
आगरा कैंट स्टेशन से रोजाना करीब 48 हजार यात्री आते-जाते हैं। आगरा फोर्ट स्टेशन से करीब 13 हजार यात्री यात्रा करते हैं। ईदगाह जंक्शन से करीब 1,650 और राजामंडी स्टेशन से करीब 4,700 यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं। इस तरह इन चार प्रमुख स्टेशनों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद किसी भी स्टेशन पर स्थायी मेडिकल बूथ की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
यात्रियों का कहना है कि रेलवे स्टेशनों पर प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा केवल सामान्य चोट या मामूली परेशानी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हार्ट अटैक, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, रक्तचाप बढ़ने या अन्य आकस्मिक स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में स्टेशन परिसर में डॉक्टर, जरूरी दवाएं, स्ट्रेचर और एंबुलेंस उपलब्ध होने से कई मामलों में यात्री को समय रहते उपचार मिल सकता है।
निजी अस्पताल से हुआ था करार
रेलवे ने इस समस्या के समाधान के लिए पिछले वर्ष एक निजी अस्पताल से करार किया था। इसके तहत स्टेशन परिसर में जगह उपलब्ध कराई गई थी। योजना के अनुसार वहां डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी तैनात किए जाने थे। करार में यह व्यवस्था भी शामिल थी कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ट्रेन तक पहुंचकर यात्री को प्राथमिक उपचार देंगे।
योजना के तहत यात्रियों को प्राथमिक उपचार, जरूरी दवाएं, स्ट्रेचर और एंबुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी थीं। इससे ट्रेन में या स्टेशन पर अचानक बीमार पड़ने वाले यात्रियों को तत्काल सहायता मिलने की उम्मीद थी। लेकिन यह प्रस्ताव कागजों से आगे नहीं बढ़ सका। लंबे समय से फाइलों में बंद इस योजना को धरातल पर लाने के लिए अब तक प्रभावी पहल नहीं हो सकी है।
फर्स्ट एड की व्यवस्था के निर्देश
आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि स्टेशनों पर मेडिकल बूथ की सुविधा नहीं है। हालांकि, प्रत्येक स्टेशन अधीक्षक को प्राथमिक उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर रेलवे अस्पताल से डॉक्टर को बुलाया जाता है। उनका कहना है कि यात्रियों को आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
हालांकि, यात्रियों की संख्या और हाल की घटनाओं को देखते हुए सवाल यह है कि क्या केवल प्राथमिक उपचार और जरूरत पड़ने पर रेलवे अस्पताल से डॉक्टर बुलाने की व्यवस्था पर्याप्त है। बड़े स्टेशनों पर स्थायी चिकित्सा कक्ष, डॉक्टर, नर्सिंग कर्मचारी, दवाएं, स्ट्रेचर और एंबुलेंस की सुविधा होने से आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल मदद मिल सकती है। रेलवे के पास इसका प्रस्ताव पहले से मौजूद है, लेकिन उसके क्रियान्वयन का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है।
