आगरा। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर चैम्बर सभागार में खाद्य विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के बीच बैठक हुई। चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में हुई चर्चा में सहायक आयुक्त खाद्य-2 महेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसकी बिक्री करने वाले के खिलाफ एफआईआर का प्रावधान है। कारोबारियों को एफएसएसएआई के शिड्यूल-4 में दिए नियमों का पालन करने, खाद्य सामग्री की शुद्धता, रंगों की निर्धारित मात्रा, साफ-सफाई, व्यक्तिगत स्वच्छता, रसोई की व्यवस्था और कर्मचारियों के स्वास्थ्य परीक्षण पर ध्यान देने को कहा गया। बैठक में चैम्बर ने खाद्य कारोबारियों की समस्याएं भी रखीं और विभाग से छोटी कमियों पर पहले समझाने की व्यवस्था की मांग की।

बैठक का संचालन खाद्य प्रसंस्करण प्रकोष्ठ के चेयरमैन विकास चतुर्वेदी और कार्यक्रम समन्वयक राजकुमार भगत ने किया। खाद्य विभाग की ओर से खाद्य सुरक्षा अधिकारी रविन्द्र सिंह परमार, राकेश यादव, सुरेन्द्र चौरसिया और श्वेता चक्रवर्ती मौजूद रहे। अधिकारियों ने कारोबारियों की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब दिए और खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी साझा की।
सहायक आयुक्त खाद्य-2 महेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने कारोबारियों को एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफएसएसएआई के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार ऐसे उत्पादों का विक्रय प्रतिबंधित है। यदि कोई विक्रेता प्रतिबंध के बावजूद इन उत्पादों की बिक्री करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर कराई जा सकती है। उन्होंने कारोबारियों से खाद्य कारोबार में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री की गुणवत्ता और तय मानकों पर विशेष ध्यान देने को कहा।
उन्होंने एफएसएसएआई की वेबसाइट पर दिए गए शिड्यूल-4 का भी उल्लेख किया। इसमें खाद्य कारोबार से जुड़े स्वच्छता और संचालन संबंधी नियम दिए गए हैं। कारोबारियों से कहा गया कि वे इन प्रावधानों को समझें और अपनी दुकानों, प्रतिष्ठानों तथा खाद्य निर्माण स्थलों पर लागू करें। विशेष रूप से मिठाई और अन्य तैयार खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी बताया गया।
बैठक में खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले रंग को लेकर भी कारोबारियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि हर रंग खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल करने योग्य नहीं होता। निर्धारित मानकों के अनुरूप ही खाद्य रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए और उसकी मात्रा भी तय सीमा के अनुसार रखनी जरूरी है। श्वेता चक्रवर्ती ने खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों से संबंधित जानकारी देकर सदस्यों को जागरूक किया।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी रविन्द्र सिंह परमार ने कहा कि खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल की गुणवत्ता और शुद्धता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। खराब या मानक के विपरीत सामग्री का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। उन्होंने खाद्य कारोबारियों को निर्माण और बिक्री के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी।
अधिकारियों ने दुकानों में खाद्य सामग्री को ढककर रखने पर भी जोर दिया। खाद्य पदार्थ खुले में रखने से धूल, गंदगी और अन्य बाहरी तत्वों के संपर्क में आ सकते हैं। इसलिए सामान को सुरक्षित तरीके से रखना जरूरी है। परिसर में कीट नियंत्रण की व्यवस्था पर भी समय-समय पर ध्यान देने को कहा गया, ताकि खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से बचाया जा सके।
खाद्य विभाग की ओर से जारी चेकलिस्ट को भी कारोबारियों के लिए उपयोगी बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए। हाथों की सफाई, साफ कपड़े और काम करने की जगह की स्वच्छता जैसी सामान्य बातों का नियमित पालन किया जाना चाहिए। कर्मचारियों का समय-समय पर मेडिकल चेकअप कराया जाए और उसका प्रमाण पत्र भी उपलब्ध रखा जाए।
खाद्य सामग्री का निर्माण खुले या गंदे स्थान पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए कारोबारियों को उचित रसोई की व्यवस्था करने और वहां साफ-सफाई बनाए रखने को कहा गया। निर्माण स्थल, उपकरणों और खाद्य सामग्री रखने की जगह की नियमित सफाई जरूरी बताई गई। इससे खाद्य पदार्थों को दूषित होने से बचाया जा सकता है।
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने कहा कि खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने उत्पाद की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखें। उन्होंने कच्चे माल की शुद्धता, परिसर की सफाई और फूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के मानकों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने एफएसएसएआई के नियमों का पालन करने पर जोर दिया।
मनोज कुमार बंसल ने खाद्य विभाग से यह भी कहा कि यदि किसी कारोबारी से छोटी गलती होती है तो पहले उसे नियमों की जानकारी देकर सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि चैम्बर की ओर से आगरा की प्रसिद्ध बेडई को ओडीओसी में शामिल करने के लिए उद्योग निदेशक, कानपुर को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
बैठक के दौरान सहायक आयुक्त खाद्य-2 ने चैम्बर सदस्यों की समस्याएं ध्यान से सुनीं और उनकी जिज्ञासाओं का जवाब दिया। कारोबारियों ने खाद्य नियमों, रंगों के इस्तेमाल, स्वच्छता और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल पूछे, जिन पर विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी।
बैठक के अंत में पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में चैम्बर उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, विकास चतुर्वेदी, राजकुमार भगत, प्रशांत जैन, शैलेष अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अमित गोयल, जय अग्रवाल, अभिषेक जैन, गोपाल अग्रवाल, आनंद भगत, रजत पुनीत, प्रदीप कुमार भगत, उमाकांत गुप्ता, एस.पी. शर्मा, वैभव गर्ग, सिद्धांत भगत, विकास गोयल, अतुल अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, राजेश कुमार अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, शिवम भगत, अनूप वार्ष्णेय, अंशु अग्रवाल, तुषार गुप्ता, दिवाकर गुप्ता, पवन कुमार गुप्ता और शरद यादव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
