नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी राजनीतिक और जनदबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शनिवार शाम करीब 8:15 बजे शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया गया। प्रह्लाद जोशी पहले से खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, ऊर्जा और उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं। पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना दिया जा रहा था। इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी जीत और लोकतंत्र की जीत बताया।
इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर कहा कि सरकार लगातार यह दावा करती रही कि उसके यहां इस्तीफे नहीं होते, लेकिन जनता की ताकत के आगे सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा, “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” दीपके ने कहा कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उनकी दो प्रमुख मांगें अब भी बाकी हैं। उन्होंने कहा कि NEET विवाद के दौरान जिन छात्रों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, “कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं।”
कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह “कॉकरोच की जीत” है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अस्पताल से सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने लिखा कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। उन्होंने CJP और देशभर के युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि नागरिकों की एकजुटता ने बदलाव संभव किया।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के बाद दो पन्नों की करीब 575 शब्दों की एक चिट्ठी भी सार्वजनिक की। इस पत्र में उन्होंने विभिन्न मुद्दों का उल्लेख करते हुए दो स्थानों पर युवाओं को भ्रमित किए जाने की बात लिखी। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे की विस्तृत राजनीतिक वजहों पर अलग से टिप्पणी नहीं की।
वर्ष 2014 में पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद यह पहला मौका है, जब किसी केंद्रीय मंत्री को लंबे विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के बाद इस्तीफा देना पड़ा है। इससे पहले वर्ष 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। उस समय वैश्विक “मी टू” अभियान के दौरान उन पर पत्रकारिता के समय के यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब शनिवार सुबह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान युवाओं और संवाद को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। भागवत ने कहा था कि केवल शक्ति के बल पर सबके मालिक बनने की सोच उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उसे आदेश देने के बजाय तर्क और संवाद के माध्यम से समझाना चाहिए। भागवत के इस बयान के कुछ घंटे बाद ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा हुई।
इससे पहले शुक्रवार रात NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया था। सरकार ने उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की भी बात कही थी। वहीं एक दिन पहले गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों का भी तबादला किया गया था। लगातार हो रही इन प्रशासनिक कार्रवाइयों को सरकार द्वारा परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अभिजीत दीपके ने अपने बयान में वर्ष 2015 का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले यह कहती रही है कि उसकी सरकार में इस्तीफे नहीं होते। उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने ललित मोदी विवाद के दौरान कहा था कि यह यूपीए सरकार नहीं है, जहां इस्तीफे होते हों। उस समय कांग्रेस ने तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से इस्तीफे की मांग की थी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच धर्मेंद्र प्रधान के छात्र राजनीति के दिनों का एक पुराना प्रसंग भी चर्चा में आ गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने बताया कि वर्ष 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक मामले के विरोध में धर्मेंद्र प्रधान स्वयं आंदोलन का नेतृत्व कर चुके थे। उस प्रदर्शन में करीब 1,500 छात्र शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हुए थे और उनके शरीर में कई जगह चोटें आई थीं। बताया जाता है कि उन्हें फ्रैक्चर भी हुआ था।
NEET पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री का इस्तीफा केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी के पास है, जबकि प्रदर्शनकारी संगठन अपनी शेष मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। सरकार की अगली रणनीति और परीक्षा प्रणाली में होने वाले सुधारों पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।
