आगरा। भूजल सप्ताह 2026 के तहत सोमवार को फतेहपुर सीकरी से लेकर आगरा शहर तक जल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया। किसानों, ग्रामीणों, नगर पालिका कर्मचारियों, सफाई कर्मियों, पर्यटकों और विद्यार्थियों को भूजल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूक करते हुए जल बचाने की शपथ दिलाई गई। ईशान इंजीनियरिंग कॉलेज में रेनवाटर हार्वेस्टिंग की उन्नत तकनीकों पर परिचर्चा आयोजित कर विद्यार्थियों से भूजल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया गया।

भूजल सप्ताह 2026 के पांचवें दिन सोमवार को आगरा जिले में जल संरक्षण को लेकर विभिन्न स्थानों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। भूगर्भ जल विभाग ने सरकारी विभागों, गैर सरकारी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से किसानों, ग्रामीणों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और पर्यटकों को भूजल संरक्षण के महत्व से अवगत कराया। अभियान का उद्देश्य लोगों में जल के विवेकपूर्ण उपयोग की भावना विकसित करना और वर्षा जल संचयन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना रहा।
ग्राम जैताना, फतेहपुर सीकरी में आयोजित कार्यक्रम में भूगर्भ जल विभाग की टीम, गैर सरकारी संगठन ग्राम विकास एवं बाल विकास सेवा समिति आगरा, ग्राम प्रधान, नाबार्ड के प्रतिनिधियों तथा किरावली रेंज वन विभाग के अधिकारियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के दौरान किसानों और ग्रामीणों के साथ भूजल संवाद स्थापित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। किसानों को जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई और सभी उपस्थित लोगों को भूजल बचाने की शपथ दिलाई गई।

इसके बाद नगर पालिका परिषद फतेहपुर सीकरी के सभागार में कर्मचारियों और सफाई कर्मियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान दैनिक जीवन में अपनाई जा सकने वाली छोटी-छोटी जल संरक्षण विधियों, वर्षा जल संचयन और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर पानी की बचत को आदत बना ले, तो भूजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में सभी कर्मचारियों ने जल संरक्षण की शपथ ली।
भूजल सप्ताह के तहत विश्व प्रसिद्ध बुलंद दरवाजा, फतेहपुर सीकरी पर भी विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। यहां देश-विदेश से आए पर्यटकों को भूजल संरक्षण का संदेश दिया गया। विभागीय अधिकारियों ने पर्यटकों को जल बचाने के महत्व से अवगत कराया और उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण का संदेश पहुंचाने की अपील की। ऐतिहासिक धरोहर पर चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक जल संरक्षण का संदेश पहुंचाना था।
इसी क्रम में भूगर्भ जल विभाग, खंड-आगरा की ओर से ईशान इंजीनियरिंग कॉलेज में रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को वर्षा जल संचयन की उन्नत तकनीकों, उनके वैज्ञानिक महत्व और व्यावहारिक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि प्रत्येक संस्थान और भवन में प्रभावी रेनवाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था विकसित की जाए, तो भूजल स्तर में सुधार लाया जा सकता है और भविष्य में जल संकट की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
परिचर्चा के दौरान सीनियर जियोफिजिसिस्ट शंशाक शेखर सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भूजल का विवेकपूर्ण उपयोग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पानी की हर बूंद अमूल्य है और इसका संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और अपने परिवार तथा समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि भूजल सप्ताह को केवल एक सप्ताह तक सीमित कार्यक्रम नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसे निरंतर चलने वाले जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना होगा। जब तक आमजन जल संरक्षण की जिम्मेदारी स्वयं नहीं निभाएंगे, तब तक भूजल संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से रेनवाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने और जल संरक्षण के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
पूरे दिन चले इन कार्यक्रमों में किसानों, ग्रामीणों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, सफाई कर्मियों और पर्यटकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के जनजागरूकता अभियान लोगों में जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करेंगे और भूजल बचाने के प्रयासों को एक व्यापक जनआंदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
